मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब सिर्फ तेल और एलपीजी गैस की सप्लाई तक सीमित नहीं रहा। इसकी मार अब सॉफ्ट ड्रिंक उद्योग पर भी पड़ रही है। कोका-कोला कंपनी का लोकप्रिय डाइट कोक (Diet Coke) देश के प्रमुख महानगरों में अचानक गायब हो गया है। दुकानों की शेल्फें खाली पड़ी हैं और क्विक कॉमर्स ऐप्स पर भी यह ‘अनुपलब्ध’ दिख रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स इसे ‘नया एलपीजी संकट’ या ‘डाइट कोक संकट’ बता रहे हैं।
दरअसल, बेंगलुरु, मुंबई, पुणे, अहमदाबाद और गुरुग्राम समेत कई बड़े शहरों में अप्रैल 2026 के मध्य से डाइट कोक की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। सुपरमार्केट, रिटेल स्टोर्स और रेस्तरां में स्टॉक खत्म हो चुका है। ब्लिंकइट, ज़ेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट जैसे लोकप्रिय डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर भी कई इलाकों में यह पेय उपलब्ध नहीं है। नियमित उपभोक्ता काफी निराश हैं और अब कई लोग कोक जीरो जैसे वैकल्पिक विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
दूसरी ओर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और इंस्टाग्राम पर यूजर्स लगातार पोस्ट कर रहे हैं। जेन Z ने इस कमी को वायरल ट्रेंड में बदल दिया है। मीम्स, चुटकुले और हास्यपूर्ण टिप्पणियों से सोशल मीडिया भरा पड़ा है। एक यूजर ने लिखा कि स्थानीय दुकान में डाइट कोक मांगा तो बताया गया कि सप्लाई नहीं है। इतना ही नहीं कई लोग इसे मिडिल ईस्ट तनाव का ‘अनोखा साइड इफेक्ट’ बता रहे हैं, तो कुछ इसे मजाक में ‘एलपीजी के बाद अब डाइट कोक संकट’ कह रहे हैं।
एल्युमीनियम कैन की वैश्विक कमी: मिडिल ईस्ट तनाव के कारण शिपिंग रूट्स, खासकर हॉर्मुज स्ट्रेट प्रभावित हुए हैं। इससे एल्युमीनियम की उपलब्धता घटी और कीमतें बढ़ी हैं।
लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन बाधाएं: आयात में देरी और परिवहन संबंधी समस्याओं ने स्थिति को और खराब किया है।
पैकेजिंग नियमों में बदलाव: भारतीय नियमों के अनुरूप हालिया संशोधनों ने भी सप्लाई को प्रभावित किया है।
बढ़ती मांग: जीरो शुगर ड्रिंक्स की लोकप्रियता में तेज इजाफा हुआ है, जिससे उपलब्ध स्टॉक पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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