'द फॉलिंग मैन' तस्वीर सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि 9/11 आतंकी हमले का एक मूक गवाह है, जो इस इतिहास …और पढ़ें
9/11 आतंकी हमला और ‘द फॉलिंग मैन’ की तस्वीर को लेकर चर्चा।
9/11 हमले में ‘द फॉलिंग मैन’ तस्वीर बनी त्रासदी का प्रतीक।
रिचर्ड ड्रू ने अनजाने में खींची थी यह मार्मिक तस्वीर।
तस्वीर ने 9/11 की भयावहता को हमेशा के लिए अमर कर दिया।
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। 11 सितंबर 2001 का वह काला दिन अमेरिकी इतिहास का सबसे भयानक और जख्म देने वाला अध्याय है। आज से ठीक 25 साल पहले अल-कायदा के आतंकियों ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को निशाना बनाकर ऐसा खौफनाक तांडव मचाया, जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया।
आसमान से आए मौत के विमानों ने चंद पलों में खुशियों को मातम में बदल दिया और इस अमानवयी आतंकी हमले ने वैश्विक सुरक्षा की परिभाषा हमेशा के लिए बदलकर रख दी।
इस बात में तो कोई दोहराई नहीं है कि 11 सितंबर 2001 को अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले की कई तस्वीरें इतिहास में दर्ज हैं, लेकिन इनमें से एक तस्वीर ऐसी है जो आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देती है। इस तस्वीर का नाम है- ‘द फॉलिंग मैन’। यह तस्वीर उस शख्स की है जो जलते हुए नॉर्थ टॉवर से नीचे गिर रहा है।
बता दें कि एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मशहूर फोटोग्राफर रिचर्ड ड्रू उस दिन न्यूयॉर्क के ब्रायनट पार्क में एक फैशन शो कवर करने गए थे। तभी उन्हें हमले की खबर मिली। उनके संपादक ने फोन पर कहा कि फैशन शो छोड़ो और तुरंत वहां पहुंचो।
ड्रू तुरंत सबवे ट्रेन पकड़कर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के पास पहुंचे। जब वे स्टेशन से बाहर निकले, तब तक दूसरा विमान साउथ टॉवर से टकरा चुका था। चारों तरफ धुआं, सायरन और जान बचाने के लिए भागते लोगों की चीख-पुकार मची थी।
चारों तरफ फैले मौत के साए के बीच जब लोग जान बचाने के लिए टॉवर की खिड़कियों से नीचे कूद रहे थे, तब फोटोग्राफर रिचर्ड ड्रू ने अपने 200mm जूम लेंस वाले कैमरे को उनकी तरफ किया।
ड्रू ने बाद में एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मैंने यह तस्वीर जानबूझकर नहीं खींची थी, बस कैमरा अपना काम कर रहा था।’ उन्होंने उस व्यक्ति की गिरते हुए 8-9 फ्रेम क्लिक किए। जब वे ऑफिस वापस लौटे और अपने लैपटॉप पर तस्वीरें देखीं, तब उन्हें एहसास हुआ कि उनमें से एक फ्रेम बेहद खास और झकझोर देने वाला है।
बात पहले तस्वीर की करें तो इस तस्वीर में एक अकेला इंसान बिल्कुल सीधे अंदाज में नीचे गिर रहा है, उसके हाथ शरीर के पास हैं और एक घुटना थोड़ा मुड़ा हुआ है। चारों तरफ मचे कोहराम और अराजकता के बीच यह शख्स एकदम शांत और स्थिर नजर आ रहा है।
ऐसे में जब यह तस्वीर अमेरिका के अखबारों जैसे कि द न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी, तो पाठकों ने इसकी तीखी आलोचना की। लोगों का कहना था कि यह किसी की निजी त्रासदी का बहुत ही क्रूर और दर्दनाक प्रदर्शन है, जिसके बाद इसे कुछ समय के लिए अखबारों से हटा लिया गया था। हालांकि, समय के साथ यह 9/11 के इतिहास की सबसे शक्तिशाली और स्थायी तस्वीरों में शुमार हो गई।
गौरतलब है कि इस तस्वीर में दिख रहे व्यक्ति की पहचान को लेकर आज भी रहस्य बना हुआ है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि वह शख्स नोरबर्टो हर्नांडेज थे, जो नॉर्थ टॉवर के ऊपर बने ‘विंडोज ऑन द वर्ल्ड’ नामक रेस्टोरेंट में काम करते थे। वहीं, अन्य रिपोर्ट्स में उन्हें जोनाथन ब्राइली बताया गया, जो उसी रेस्टोरेंट में ऑडियो इंजीनियर थे।
अच्छा, अब एक बात तो साफ है कि भले ही इस व्यक्ति की असली पहचान कभी आधिकारिक तौर पर पूरी तरह पुख्ता नहीं हो पाई, लेकिन इस तस्वीर ने बिना किसी नाम के वह सब कुछ कह दिया जो उस भयानक सुबह हुआ था। उस दिन लगभग 3000 लोगों की जान गई थी और उनमें से हर एक इंसान की अपनी एक कहानी थी। यह तस्वीर आज भी उस त्रासदी का एक मूक और अमर गवाह बनी हुई है।