‘भैया हो, बहुत पानी बढ़ गइल हो… नाव में पानी भर रहलई हई हो…(भैया पानी बहुत बढ़ गया है, नाव में तेजी से पानी भर रहा है)’…वैशाली नाव हादसे से ठीक पहले का वीडियो सामने आया है।
26 सेकेंड के इस वीडियो में बच्चे नाव में पानी भरने की बात कह रहे हैं। बच्चों की हंसी भी सुनाई देती है। अंधेरे के कारण वीडियो बहुत क्लियर नहीं है, लेकिन एक छोटी सी नाव में 20-25 बच्चे बैठे दिख रहे हैं।
बता दें कि 13 अक्टूबर की शाम वैशाली के राघोपुर के रामपुर श्यामचंद गांव में नाव पलट गई थी, जिसमें 13 बच्चों की मौत हो गई। सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरी कहानी…
पहले जानिए हादसे के पहले के वीडियो में क्या है
26 सेकेंड के वीडियो में कुछ बच्चे आपस में हंसी-मजाक कर रहे हैं। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में उनकी खिलखिलाहट मातम में बदल जाएगी।
अंघेरे के कारण तस्वीरें साफ नहीं हैं, लेकिन वीडियो में आवाज आ रही है। सभी आपस में भोजपुरी में बात कर रहे हैं।
एक बच्चे की आवाज आती है- हो भाई जी, पानी निकालने वाला बाल्टी दीजिए, न नाव में पानी भर रहा है। पानी को नाव से बाहर फेंकना है।
जिस पर एक आदमी ने पूछा, पानी भर रहा है, तो बच्चों ने कहा- हां, तेजी से पानी भर रहा है। तभी दूसरे शख्स की आवाज आई, एक साइड होकर ठीक से बैठे रहो।
फिर एक लड़की ने कहा “भइया हो ढेर पानी भर रहा है.. हो, फिर बोल रही पानी बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
नाव चलने के कुछ दूर बाद ही डगमगाने लगी
वीडियो में बातचीत के बीच बच्चे सहज अंदाज में हंसते-बोलते नजर आते हैं। कुछ ही देर बाद नाव में पानी भरने लगा और वो डगमगाने लगी।
करीब आधे घंटे के अंदर नाव गंगा नदी में पलट गई और 13 बच्चों की जान चली गई। जबकि 7 लोगों को बचा लिया गया।
हादसे से पहले के इन पलों का वीडियो अब मृत बच्चों के परिजनों के लिए कभी न भूलने वाला दर्द बन गया है।
हादसे के 8 दिन बाद भी गांव में मातम पसरा है। जिन घरों में दशहरा की तैयारी होनी थी, वहां अब अपनों को खोने का दुख है।
तेरहवीं के भोज में जा रहे थे बच्चे
राघोपुर की रामपुर श्यामचंद पंचायत के एक ही टोले के 25 बच्चे पड़ोसी गांव में श्राद्ध का भोज खाने जा रहे थे। बच्चे दोनों गांवों के बीच स्थित करीब 300 मीटर चौड़ी नदी (ढाब) को पार करने के लिए एक नाव पर सवार हुए थे।
मृतकों की उम्र 6 से 18 साल के बीच थी। इनमें तीन सगी बहनें शामिल थीं। हादसे के बाद सात लोगों को घायल अवस्था में बाहर निकाला गया। उन्हें पटना के NMCH भेजा गया।
जर्जर नाव की नहीं हुई मरम्मत
ग्रामीणों का आरोप है कि नाव की मरम्मत को लेकर पहले भी शिकायत की गई थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। अब हादसे के बाद सवाल उठ रहा है कि अगर नाव की हालत खराब थी, तो उसे लोगों को नदी पार कराने की अनुमति कैसे दी गई?
भास्कर की पड़ताल में भी सामने आया कि 3 साल पुरानी नाव में 20 से ज्यादा छेद थे। नाव के एक ओर 1 फीट की लंबी दरार थी।
इस नाव की क्षमता 5 लोगों की थी, लेकिन इसमें 25 बच्चे सवार थे। दरार और छेद की वजह से नाव के अंदर 5 मिनट में पानी भर गया और वो पलट गई।
छोटी सी नाव में 25 सवार
जिस नाव पर 25 लोग सवार थे उस नाव की डाइमेंशन 15 फीट लंबी, 6 फीट चौड़ी और 2 फीट गहरी थी। नाव की क्षमता सिर्फ 5-6 लोगों के बैठने की थी।
हमने घटना की मुख्य वजह खंगालना शुरू किया। इन्वेस्टिगेशन के दौरान पाया कि नाव 3 साल पुरानी थी। रिपोर्टर खुद नाव पर बैठे तो पाया कि नाव की छेद को भरने के लिए अंदर से मिट्टी की लेप लगाई गई है। जिस लेप से पानी का रिसाव हो रहा था।
रिपोर्टर ने जब मिट्टी को हटाया तो देखा कि नाव में 20 से ज्यादा जगहों पर छोटे-बड़े छेद हैं, जिससे लगातार पानी का रिसाव हो रहा है।
नाव चलाने वालों ने इन छेदों को मिट्टी की लेप लगाकर बंद किया था। पानी के रिसने से मिट्टी की लेप हट गई थी और नाव में पानी भर गया।
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