न समुद्री लुटेरे बचेंगे, न पाक-चीन की पनडुब्बियां… छह P-8I जासूसी विमानों की हो रही डील डन – AajTak

Feedback
भारतीय नौसेना की ताकत को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठने वाला है. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल 16 से 19 सितंबर 2025 तक दिल्ली में रहेगा, जहां 6 अतिरिक्त P-8I समुद्री गश्ती विमानों के लिए 4 अरब डॉलर (लगभग 33,000 करोड़ रुपये) के सौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा. यह डील भारतीय नौसेना को हिंद महासागर क्षेत्र में की निगरानी और पनडुब्बी रोधी क्षमताओं को बढ़ाएगी. 
सितंबर 2025 में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचा है, जिसमें यूएस डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस, बोइंग के प्रतिनिधि, नेवी इंटरनेशनल प्रोग्राम्स ऑफिस (NIPO), मैरिटाइम पेट्रोल एंड रिकग्निशन एयरक्राफ्ट प्रोग्राम ऑफिस (PMA 290) और डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) के अधिकारी शामिल हैं. NIPO वैश्विक समुद्री साझेदारियों का प्रबंधन करता है, जबकि PMA 290 विमानों की खरीद और सपोर्ट देखता है.
यह भी पढ़ें: पहले Tejas Mark-1A और अब स्वदेशी राफेल… इससे कितनी बढ़ जाएगी एयरफोर्स की ताकत?
P-8I Aircraft india-us deal
रक्षा मंत्रालय में अगले 3-4 दिनों में कई बैठकें होंगी. यह डील 2019 में मंजूर हुई थी, लेकिन व्यापारिक तनाव (ट्रंप प्रशासन के उच्च टैरिफ) से रुकी थी. फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के बाद संयुक्त बयान में कहा गया कि सौदा अंतिम चरण में है.
अमेरिका ने मई 2021 में इसे मंजूरी दी थी. नौसेना ने मूल रूप से 10 विमान मांगे थे, लेकिन 6 मंजूर हुए. यह विदेशी सैन्य बिक्री (FMS) के तहत होगा. ट्रंप के टैरिफ के बावजूद, डिफेंस डील्स पर कोई असर नहीं पड़ा. अमेरिका ने पुष्टि की कि यह सौदा जारी रहेगा.
यह भी पढ़ें: कितना ताकतवर है अक्टूबर में मिलने वाला तेजस-Mk1A फाइटर जेट?
P-8I बोइंग का P-8 Poseidon का भारतीय संस्करण है, जो बोइंग 737-800 पर आधारित है. यह लंबी दूरी की समुद्री गश्त, निगरानी और पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) के लिए बनाया गया है. नौसेना के पास पहले से 12 P-8I हैं (8 का पहला बैच 2009 में 2.1 अरब डॉलर में और 4 का दूसरा 2016 में 1 अरब डॉलर से ज्यादा में). ये अरक्कोनम (तमिलनाडु) और गोवा में तैनात हैं.
P-8I Aircraft india-us deal
ये विमान नौसेना की रीढ़ हैं, जो हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में 50+ नौसैनिक जहाजों और 20,000 व्यापारी जहाजों की निगरानी करते हैं.
यह भी पढ़ें: न अमेरिका पर रहेगी निर्भरता, न किसी और देश पर… फाइटर जेट के स्वदेशी इंजन का प्रोजेक्ट साफरान कितना अहम?
हिंद महासागर में चीनी नौसेना की मौजूदगी बढ़ रही है- सर्वे या एंटी-पाइरेसी के बहाने पनडुब्बियां और जहाज आ रहे हैं. पाकिस्तान भी हंगोर-क्लास पनडुब्बियां ला रहा है, जो बाबर-3 मिसाइलों से लैस हैं. 6 नए P-8I से नौसेना की निगरानी 18 विमानों तक पहुंच जाएगी, जो IOR में सबमरीन ट्रैकिंग और इंटेलिजेंस को मजबूत करेगी.
P-8I Aircraft india-us deal
यह डील क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) सहयोग को बढ़ाएगी. डोकलाम और लद्दाख जैसे संकटों में P-8I पहले ही साबित हो चुके. MQ-9B ड्रोन (31 इकाइयां 2029 तक) के साथ मिलकर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी. यह सौदा भारत की रूसी हथियारों पर निर्भरता कम करेगा. अमेरिका से साझेदारी मजबूत करेगा.
P-8I के अलावा, भारत-अमेरिका ने 113 F404 इंजनों का सौदा अंतिम कर लिया है, जो तेजस Mk1A के लिए हैं. जनरल इलेक्ट्रिक (GE) से पहला इंजन मार्च 2025 में मिला. 2025 में 11 और मिलेंगे. 2026 से सालाना 20 इंजन. यह 2021 के 99 इंजनों के बाद का फॉलो-ऑन ऑर्डर है.
अगस्त 2025 में 97 अतिरिक्त तेजस Mk1A के लिए 62,000 करोड़ रुपये मंजूर हुए, कुल 180 विमान. अगले हफ्तों में अमेरिकी टीमें दिल्ली आएंगी, जिसमें MRFA (मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट) खरीद पर चर्चा होगी.
Copyright © 2025 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News