पटना एम्स के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने पहली बार लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया है। इस उपलब्धि से संस्थान में लिवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रम की मजबूत नींव रखी गई है।
यह सफल प्रत्यारोपण पटना निवासी 54 वर्षीय एक पुरुष का हुआ, जो ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस से पीड़ित थे। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र जीवन रक्षक विकल्प बचा था।
मरीज की पत्नी ने अपने लिवर का एक हिस्सा दान करने की इच्छा जताई। इसके बाद 7 अगस्त को संस्थान की पूरी यूनिट द्वारा लिविंग ट्रांसप्लांट किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा।
ऑपरेशन से पहले डोनर और मरीज दोनों की विस्तृत चिकित्सकीय जांच की गई। सभी आवश्यक मानकों पर सुरक्षित पाए जाने के बाद ही प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।
लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट एक अत्यंत जटिल सर्जिकल प्रक्रिया
पटना एम्स के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. राजू अग्रवाल ने बताया कि लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट एक अत्यंत जटिल सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें एक साथ दो बड़ी सर्जरी की जाती हैं: स्वस्थ व्यक्ति के लिवर का एक हिस्सा सुरक्षित रूप से निकालना और उसे मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित करना।
डॉ. अग्रवाल ने आगे बताया कि इस प्रक्रिया में प्रमुख रक्त वाहिकाओं और पित्त नलिकाओं का सूक्ष्मता से पुनर्निर्माण किया जाता है। लिवर की यह विशेषता है कि इसमें पुनः विकसित होने की क्षमता होती है, जिससे ऑपरेशन के बाद डोनर और मरीज दोनों के लिवर का हिस्सा समय के साथ बढ़कर पर्याप्त आकार प्राप्त कर लेता है।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. उत्पल आनंद के नेतृत्व में विकसित किया गया है। कोर टीम में डॉ. कर्णाल पराशर, डॉ. बसंत नारायण सिंह और डॉ. किसलय कांत शामिल रहे।
शुरुआती 5 मरीजों को एम्स रिलीफ फंड से आर्थिक सहायता मिली
एनेस्थीसिया टीम से प्रो. उमेश कुमार भदानी, डॉ. कर्णाल सिंह और डॉ. रजनीश कुमार, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी से प्रो. राजीव नयन प्रियदर्शी तथा गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग से प्रो. रमेश कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह प्रत्यारोपण सेंटर फॉर लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (CLBS) की टीम के प्रो. सुभाष गुप्ता के नेतृत्व और समन्वय में किया गया।
एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजीव अग्रवाल ने बाया की गरीबी रेखा से नीचे (BPL) आने वाले शुरुआती पांच मरीजों को एम्स रिलीफ फंड से आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इससे महंगे लिवर ट्रांसप्लांट का आर्थिक बोझ कम होगा।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य बिहार और पड़ोसी राज्यों के मरीजों को अपने क्षेत्र में ही उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती लिवर ट्रांसप्लांट सुविधा उपलब्ध कराना है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बिहार सरकार से भी मुख्यमंत्री राहत पोस्ट से एम्स को आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि इस जटिल लिवर ट्रांसप्लांट से 14 से 15 लाख रुपए का खर्च आएगा और इसमें 14 से 16 घंटे का समय सर्जरी में लगा है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार के आयुष्मान कार्ड को इस लिवर ट्रांसप्लांट के मेडिकल ट्रीटमेंट से अलग रखा गया है।
Copyright © 2024-25 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.