पत्रकारों संग ट्रंप की 'पार्टी नाइट', जानें कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर क्यों है इतना खास – AajTak

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अमेरिका में व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर लंबे समय से राजनीति, मीडिया और ग्लैमर का बड़ा संगम माना जाता है. साल 1921 में शुरू हुआ यह कार्यक्रम अब एक हाई-प्रोफाइल इवेंट बन चुका है, जहां नेता, पत्रकार, अभिनेता और कई बड़ी हस्तियां एक ही छत के नीचे नजर आती हैं. लेकिन इस बार यह परंपरा अचानक डर में बदल गई, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण से ठीक पहले फायरिंग की खबर सामने आई.
दरअसल, यह डिनर सिर्फ एक आम कार्यक्रम नहीं है, बल्कि अमेरिका में मीडिया और सरकार के रिश्तों का एक अहम प्रतीक माना जाता है. इसे व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन आयोजित करती है. 1924 में केवलिन कूलिज के शामिल होने के बाद से लगभग हर राष्ट्रपति इस कार्यक्रम का हिस्सा रहे हैं और यहां अक्सर हल्के-फुल्के अंदाज में भाषण दिए जाते हैं.
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एसोसिएशन की वेबसाइट के मुताबिक, यह सालाना डिनर सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि उनके पूरे कामकाज का सबसे बड़ा इकोनॉमिक सोर्स भी है. इसी से पत्रकारों को सपोर्ट किया जाता है, फर्स्ट अमेंडमेंट और फ्री प्रेस के महत्व पर कार्यक्रम चलाए जाते हैं और नए पत्रकारों के लिए स्कॉलरशिप दी जाती है.
डिनर के टिकट आम लोगों को नहीं बेचे जाते, बल्कि सिर्फ उन्हीं न्यूज ऑर्गेनाइजेशन को दिए जाते हैं जिनके सदस्य एसोसिएशन का हिस्सा होते हैं. इस इवेंट के जरिए स्कॉलरशिप प्रोग्राम और पत्रकारिता से जुड़े अवॉर्ड्स भी दिए जाते हैं. हर साल जनवरी में एंट्री शुरू होती है और वसंत के समय इस डिनर में अवॉर्ड्स दिए जाते हैं.
हालांकि डोनाल्ड ट्रंप और मीडिया के रिश्ते हमेशा से तनावपूर्ण रहे हैं. उन्होंने कई बार मीडिया को “फेक न्यूज” कहा और कई सालों तक इस डिनर में शामिल नहीं हुए. इस बार वह पहली बार इस डिनर में पहुंचे थे. यह कार्यक्रम वॉशिंगटन हिल्टन में आयोजित किया गया था, जहां सैकड़ों मेहमान मौजूद थे. माहौल हल्का और उत्साह से भरा हुआ था और ट्रंप अपने भाषण में कुछ मजाकिया अंदाज में बातें करने वाले थे. सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे और हर एंट्री पॉइंट पर जांच हो रही थी.
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लेकिन इसी बीच अचानक तेज आवाजें सुनाई दीं. कई लोगों ने 5 से 8 गोलियों जैसी आवाजें सुनीं. शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद यह कोई तकनीकी गड़बड़ी है, लेकिन जल्द ही साफ हो गया कि मामला गंभीर है. इसके बाद पूरे हॉल में अफरा-तफरी मच गई. अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी तुरंत सक्रिय हो गई. ट्रंप को घेरकर सुरक्षित बाहर ले जाया गया. उनके साथ मेलानिया ट्रंप और अन्य वीआईपी को भी बाहर निकाला गया. लोगों को नीचे झुकने और टेबल के नीचे छिपने के निर्देश दिए गए.
कुछ ही मिनटों में पूरे होटल को सील कर दिया गया और नेशनल गार्ड तैनात कर दिए गए. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावर को मौके पर ही पकड़ लिया गया और राष्ट्रपति सुरक्षित हैं. लेकिन इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. खासतौर पर यह कि इतनी सख्त सुरक्षा के बावजूद कोई शख्स अंदर तक कैसे पहुंच गया.
अब जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की तह तक जाने में जुट गई हैं. हमलावर का मकसद क्या था, क्या निशाना राष्ट्रपति थे या यह कोई अलग तरह का हमला था. इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है.
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