भारत गर्मी से जूझ रहा, चीन बाढ़ से… क्विंगझाऊ-ग्वागंशी में सड़कें-गाड़ियां डूबीं, मौसम का इतना अंतर कैसे – AajTak

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अप्रैल 2026 के आखिरी दिनों में एशिया के दो बड़े देशों में मौसम बिल्कुल उल्टा व्यवहार कर रहा है. भारत में भयंकर गर्मी पड़ रही है, कई जगहों पर तापमान 45 डिग्री से ऊपर पहुंच गया है. वहीं चीन के ग्वांग्शी प्रांत के क्विनझाउ (Qinzhou) शहर में इतनी तेज बारिश हुई कि सड़कें, गाड़ियां और घर पानी में डूब गए. 
27 अप्रैल को सिर्फ 8 घंटे में 273 मिलीमीटर बारिश हुई, जिसमें एक घंटे में ही 160 मिलीमीटर पानी गिरा. यह अप्रैल के रिकॉर्ड तोड़ने वाली बारिश थी. सड़कें बंद हो गईं. स्कूल बंद किए गए. बचाव कार्य शुरू हो गए. सवाल उठ रहा है कि इतने करीब के देशों में मौसम में इतना बड़ा अंतर क्यों है?
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भारत के उत्तर, मध्य और पश्चिमी हिस्सों में इस समय हीटवेव चल रही है. दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और विदर्भ जैसे इलाकों में दिन का तापमान 42 से 47 डिग्री तक पहुंच रहा है. रातें भी गर्म हो रह रही हैं, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल रही. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई दिनों तक हीटवेव की चेतावनी जारी की है. लोग कह रहे हैं कि गर्मी बहुत तेज और पहले आ गई है.
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चीन में भारी बारिश और बाढ़
दूसरी ओर चीन के दक्षिणी प्रांत ग्वांग्शी में 27 अप्रैल की सुबह से भारी बारिश शुरू हुई. क्विनझाउ शहर में 8 घंटे में 273 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. एक घंटे में 160 मिलीमीटर पानी गिरने से शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया. सड़कें नदियों जैसी दिखने लगीं, गाड़ियां पानी में डूब गईं. स्कूलों को बंद करना पड़ा और स्थानीय प्रशासन ने पानी निकालने और लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने के लिए बचाव दल भेजे. किसी की मौत नहीं हुई, लेकिन संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचा.
India vs China Weather
दोनों देशों में चरम मौसम की वजहें
भारत में गर्मी बढ़ने के कई कारण हैं. हीट डोम (High Pressure System) बनने से गर्म हवा नीचे फंस जाती है और ठंडी हवा ऊपर नहीं जा पाती. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) कमजोर पड़ने से बारिश और ठंडी हवाएं नहीं आ रही हैं. थार रेगिस्तान की गर्म हवाएं, हिमालय की दीवार और शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट-सीमेंट (Urban Heat Island Effect) गर्मी को और बढ़ा रहे हैं. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) भी लंबे समय से गर्मी की तीव्रता बढ़ा रहा है.
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चीन में भारी बारिश की मुख्य वजह तेज गर्मी के कारण वातावरण में ज्यादा नमी का होना है. गर्म हवा ज्यादा पानी (भाप) सोख सकती है. जब यह नमी अचानक बारिश के रूप में गिरती है तो भारी बारिश होती है. ग्वांग्शी जैसे दक्षिणी इलाकों में मॉनसून से पहले की बारिश (pre-flood season) बढ़ रही है. भारतीय महासागर का तेजी से गर्म होना भी दक्षिण चीन में नमी और बारिश बढ़ा रहा है.
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एशिया में मौसम का इतना अंतर क्यों?
एशिया बहुत बड़ा महाद्वीप है. अलग-अलग इलाकों में भौगोलिक स्थिति, समुद्र की दूरी, पहाड़ और हवा के रुख अलग-अलग हैं. भारत मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में है जहां गर्मी जल्दी बढ़ती है. चीन का दक्षिणी भाग जैसे ग्वांग्शी समुद्र के करीब है, जहां नमी आसानी से पहुंचती है. 
वैज्ञानिक कारण मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन है. ग्लोबल वार्मिंग से वातावरण ज्यादा नमी पकड़ता है, जिससे जहां सूखा पड़ता है वहां गर्मी तेज हो जाती है और जहां बारिश होती है वहां बहुत भारी बारिश होती है. इसे एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स यानी चरम मौसमी घटनाएं कहते हैं. अल-नीनो जैसी घटनाएं भी मौसम के पैटर्न बदलती हैं, जिससे कुछ जगह गर्मी और सूखा तो कुछ जगह बाढ़ आती है.
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भारत गर्मी से और चीन बाढ़ से जूझ रहा है, यह दिखाता है कि जलवायु परिवर्तन पूरे एशिया को अलग-अलग तरीके से प्रभावित कर रहा है. दोनों देशों को अब चरम मौसम से निपटने के लिए बेहतर तैयारी, शहरी नियोजन, पेड़ लगाने और जल प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान देना होगा. वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि भविष्य में ऐसे उलटे-पुलटे मौसम की घटनाएं और बढ़ सकती हैं. 
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