पश्चिम बंगाल में मिली जीत से गदगद भाजपा, इन 2 राज्यों को बनाया अगला टारगेट – Hindustan Hindi News

BJP in Bengal: भाजपा नेतृत्व देश की राजनीति में अपने सबसे कमजोर दक्षिण क्षेत्र के लिए नई रणनीति तैयार कर रहा है। उसकी नजर दो साल बाद होने वाले तेलंगाना और कर्नाटक के विधानसभा चुनावों पर है, जहां वह अपनी सरकार के लिए बेहतर संभावना देख रही है। कर्नाटक में उसे कांग्रेस के पिछली हार का बदला लेकर सत्ता हासिल करनी है तो तेलंगाना में पश्चिम बंगाल की तरह खुद को बदलाव के विकल्प के रूप में पेश करना है।
भगवा पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि तेलंगाना के हालात उसके लिए सबसे बेहतर हैं। वहां नया राज्य बनने के बाद पहले बीआरएस और उसके बाद कांग्रेस सत्ता में रही है। बीआरएस को पिछले चुनाव में जनता ने खारिज कर दिया था और उसका कांग्रेस से भी मोहभंग हो चुका है। राज्य में बदलाव की भावना तेजी से बढ़ रही है। उनका मानना है कि दो साल में सत्ता विरोधी माहौल और बढ़ेगा।
भाजपा के लिए दक्षिण का दूसरा अहम राज्य कर्नाटक है, जहां वह कई बार सत्ता में रह चुकी है। यहां पर भाजपा की जड़ें गहरी हैं और उसे दक्षिण के अन्य राज्यों की तरह जमीन तैयार नहीं करनी है। सिर्फ संगठन और रणनीति को पैना करना है। पार्टी का मानना है कि मौजूदा कांग्रेस में सत्ता के बंटवारे के खेल में राज्य का विकास धीमा पड़ चुका है और जनता एक बार फिर भाजपा की तरफ देख रही है।
भाजपा की सामाजिक पहुंच और संगठनात्मक ताकत को देखते हुए दक्षिण के यही दो राज्य ऐसे हैं, जहां वह अपने लिए बेहतर संभावनाएं देख सकती है। बाकी राज्यों में उसे अभी लंबा रास्ता तय करना है।
कर्नाटक में भी 2023 में विधानसभा चुनाव हुए थे और भाजपा ने 36 प्रतिशत वोट के साथ 66 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 42.88 फीसदी वोट और 135 सीटें मिली थीं। जद (एस) को 13.30 फीसद वोट के साथ 19 सीटें मिली थीं। वर्तमान में भाजपा और जद (एस) गठबंधन में हैं। पार्टी के एक प्रमुख नेता का मानना है कि यह गठबंधन जारी रहता है तब भी और नहीं भी रहता है तब भी भाजपा राज्य में सत्ता में वापसी के लिए संकल्पित है।
भाजपा तेलंगाना में लोकसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करती रही है। विधानसभा चुनाव में उसने अपनी पहचान बना ली थी। 2023 के विधानसभा चुनाव में 19 सीटों में भाजपा को 13.9 फीसदी वोट और आठ सीटें मिली थी। पार्टी के तेलंगाना के प्रभारी महासचिव सुनील बंसल का कहना है कि यह स्थिति तब थी, जब जनता ने बीआरएस की जगह विकल्प के रूप में कांग्रेस को स्वीकार किया था। 2028 के चुनाव में जनता नए विकल्प की तलाश में है।
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बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
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