पहलगाम अटैक पर जयशंकर की वो एक बात… UN चीफ गुटरेस को भी बदलने पड़े सुर, अब कैसे भारत की भाषा बोलने लगे? – News18 Hindi

पहलगाम टेटर अटैक के बाद भारत और पाकिस्तान जंग के मुहाने पर हैं. दोनों देशों के बीच तनाव से दुनिया की टेंशन बढ़ी हुई है. पाकिस्तान नाच-नाचकर दुनिया के सामने अपनी झूठी बेगुनाही का ढिंडोरा पिट रहा है. जबकि भारत अबकी उसको बेनकाब करके ही मानेगा. पहलगाम अटैक को लेकर रूस-अमेरिका जैसे कुछ देश खुलकर भारत के साथ हैं. जबकि चीन-तुर्की समेत कुछ देश पाकिस्तान के साथ हैं. कुछ यूरोपीय देश या तो तटस्थ होकर मजा ले रहे हैं या फिर सैन्य एक्शन न हो, इसका ज्ञान दे रहे हैं. ऐसे में एस जयशंकर ने यूरोपीय देशों को जिस तरह से चमकाया है, उसके बाद तो यूएनचीफ यानी संयुक्त राष्ट्र महाचिव एंटोनियो गुटेरेस के भी सुर बदल गए. उन्होंने भी भारत की भाषा में ही दोषियों को कड़ी सजा देने की बात कह दी.
जी हां, बीते दिनों आर्कटिक सर्कल इंडिया फोरम में जयशंकर ने एक बात कही थी. यह पूरी दुनिया को संदेश था, जो पाकिस्तान का हमदर्द बनते हैं या फिर भारत को सैन्य एक्शन से रोकने का ज्ञान देते हैं. उस कार्यक्रम में एस जयशंकर ने दुनिया को साफ लहजे में कह दिया था कि हमें ज्ञान देने वाला नहीं चाहिए. हम जब दुनिया को देखते हैं तो हम भागीदार ढूंढते हैं न कि उपदेशक यानी ज्ञान देने वाला. खास तौर पर ऐसे उपदेशक जो अपने देश में वह नहीं करते जो वे दूसरों को सिखाते हैं. दरअसल, जयशंकर का इशारा यूरोप के उन देशों की ओर था, यूरोप के कई मुल्क भारत को सैन्य कार्रवाई का विकल्प नहीं आजमाने और बातचीत से मसले को सुलझाने का सलाह दे रहे हैं.
जयशंकर की बात सुन बदले तेवर
जयशंकर की इसी बात को सुन अब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस के भी तेवर बदले हैं. इसकी झलक उनके लेटेस्ट बयान में भी दिखती है, जब उन्होने कहा कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए. एंटोनियो गुटरेस ने 5 मई को अपने लेटेस्ट बयान में कहा, ‘भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव सालों में अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है.मैं दोनों देशों की सरकारों और लोगों का बहुत सम्मान करता हूं और उनका आभारी हूं. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के काम में बहुत बड़ा योगदान दिया है. खास तौर पर यूएन पीसकीपिंग में. ऐसे में दोनों देशों के बीच तनाव देखकर मुझे बहुत दुख होता है.’
भारत की भाषा बोलने लगे यूएन चीफ
संयुक्त राष्ट्र चीफ ने पहलगाम अटैक की कड़ी नींद की है. उनके बयान के मुताबिक, ’22 अप्रैल को पहलगाम में हुए भयानक आतंकी हमले के बाद लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं. मैं इसे समझ सकता हूं. मैं एक बार फिर इस हमले की कड़ी निंदा करता हूं और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं.नागरिकों को निशाना बनाना अस्वीकार्य है. दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए. ये भी बहुत जरूरी है कि इस मुश्किल घड़ी में किसी भी तरह के सैन्य टकराव से बचा जाए. ऐसा कोई भी टकराव आसानी से नियंत्रण से बाहर हो सकता है.’
यूएन चीफ ने क्या अपील की
हालांकि, उन्होंने दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को लेकर कहा, ‘अभी वक्त है संयम बरतने का. पीछे हटने का. मैं लगातार दोनों देशों से यही अपील कर रहा हूं. किसी भी गलतफहमी में मत रहिए. सैन्य कार्रवाई कोई समाधान नहीं है. मैं शांति के लिए दोनों देशों को अपने अच्छे कार्यालयों की पेशकश करता हूं. संयुक्त राष्ट्र ऐसे किसी भी कदम का समर्थन करने के लिए तैयार है जो तनाव कम करने, बातचीत को बढ़ावा देने और शांति की दिशा में काम करे.’ यहां यह जानना जरूरी है कि यूएन चीफ ने पहली बार दोषियों को सजा मिले जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है.

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