4 मार्च को भारत से लौटते समय हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत पर अमेरिका ने टॉरपीडो मारा था. उस शिप पर मौजूद एक नाविक ने अब पूरी बात बताई. वह अब भी जख्मी हालत में हैं. तड़के 3 बजे पहला टॉरपीडो लगा, उस समय सभी जीवित बच गए थे. पढ़िए आगे क्या हुआ.
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भारत के विशाखापत्तनम बंदरगाह पर नौसैनिक अभ्यास में शामिल होकर लौट रहे ईरानी युद्धपोत पर अमेरिका ने कैसे हमला कर दिया था? हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत आईरिस डेना ( IRIS Dena) पर मौजूद रहे एक नाविक ने अब पूरी बात बताई है. हामिद होमेनेह के गले में चोट आई है. वह अब भी पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाए हैं. उनके बयान को नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने शेयर किया है. हामिद बताते हैं कि जहाज को नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए भारत भेजा गया था. घर लौटते समय, जब जहाज हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में चल रहा था, तभी हमला हो गया.
उन्होंने बताया कि उस समय तड़के 3 से 3.30 बजे का वक्त था. सबको पता था कि अमेरिका और ईरान की लड़ाई शुरू हो चुकी है. हामिद ने बताया कि यह कोई युद्ध क्षेत्र नहीं था और हमें कोई चेतावनी भी नहीं मिली थी. अचानक हम पर हमला हो गया.
जब पहला टॉरपीडो शिप से लगा
हां, हामिद ने बताया कि यह हमला एक पनडुब्बी से बिना किसी चेतावनी के किया गया. जब पहला टॉरपीडो शिप से आकर टकराया, तब सभी नाविक अपनी-अपनी जगहों पर तैनात थे और सौभाग्य से उस समय हमें कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ. जहाज पर चालक दल के 104 सदस्य सवार थे और किसी ने भी जहाज नहीं छोड़ा. हर कोई अंत तक अपनी जगह पर डटा रहा.
A narrative of an unjust attack by the United States on the IRIS Dena warship in the Indian Ocean
“Hamed Momeneh,” one of the sailors on the Dena warship:
This vessel had been sent to the port of Visakhapatnam in India to take part in a naval exercise. While returning home, and… pic.twitter.com/yFmk8Hwf1N
— Iran in India (@Iran_in_India) April 19, 2026
A narrative of an unjust attack by the United States on the IRIS Dena warship in the Indian Ocean
“Hamed Momeneh,” one of the sailors on the Dena warship:
This vessel had been sent to the port of Visakhapatnam in India to take part in a naval exercise. While returning home, and… pic.twitter.com/yFmk8Hwf1N
— Iran in India (@Iran_in_India) April 19, 2026
आईरिस डेना के इस नाविक ने कहा कि अगर उनका (अमेरिका) मकसद सिर्फ जहाज को नुकसान पहुंचाना होता, तो वे जहाज के दूसरे हिस्से को निशाना बना सकते थे. लेकिन, उनका लक्ष्य चालक दल को मारना था. इसके बावजूद, हम अंत तक डटे रहे. हमारे लिए डेना पोत ईरान की धरती की तरह था, और उसे छोड़कर जाने का कोई सवाल ही नहीं था.
जहाज जब डूबने लगा, तब क्या हुआ? वह बताते हैं कि जवान रात 11 बजे तक जहाज के साथ ही रहे. उसके बाद उन्हें श्रीलंका के तट के पास के इलाकों तक पहुंचने के लिए समुद्र में कुछ दूर तक तैरकर जाना पड़ा. बाद में पता चला था कि जब तक श्रीलंकाई नेवी मदद के लिए पहुंची, जहाज पूरी तरह डूब चुका था.
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अनुराग मिश्र ज़ी न्यूज डिजिटल में एसोसिएट न्यूज एडिटर हैं. वह दिसंबर 2023 में ज़ी न्यूज से जुड़े. देश और दुनिया की राजनीतिक खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं. इससे पहले नवभारत टाइम्स डिजिटल में शाम की श…और पढ़ें
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