पहली हिंदी पत्रिका ‘आईआईएम रांची वाणी’ का विमोचन – Hindustan

रांची। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रांची के राजभाषा प्रकोष्ठ की पहली हिंदी गृह पत्रिका ‘आईआईएम रांची वाणी’ का विमोचन सोमवार को किया गया। इस पत्रिका में संस्थान के विद्यार्थियों व कर्मियों की 65 से अधिक हिंदी रचनाएं शामिल हैं। समारोह में मुख्य अतिथि, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के पौत्र व डेलॉइट के कार्यकारी निदेशक ऋत्विक उदयन ने ‘रश्मिरथी’ का पाठ करते हुए साहित्य को नेतृत्व कला से जोड़ा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने नाटकों का मंचन भी किया।
रांची, विशेष संवाददाता। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रांची के राजभाषा प्रकोष्ठ की पहली हिंदी गृह पत्रिका- आईआईएम रांची वाणी, सोमवार को विमोचन किया गया। पत्रिका में संस्थान के विद्यार्थियों, प्राध्यापकों और शिक्षकेतर कर्मियों की 65 से अधिक हिंदी रचनाएं शामिल हैं। इनमें लेख, यात्रा संस्मरण, कविताएं, शायरियां और निबंध शामिल हैं। पत्रिका में राजभाषा प्रकोष्ठ की वर्षभर की गतिविधियों और कार्यों का भी विस्तृत विवरण दिया गया है।
समारोह में भारतीय बिजनेस लीडर, रणनीतिकार और डेलॉइट के कार्यकारी निदेशक ऋत्विक उदयन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वे राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के पौत्र हैं। कार्यक्रम समन्वयक प्रो सत्यम ने भाषा को अभिव्यक्ति का माध्यम बताते हुए विद्यार्थियों को रचनात्मक लेखन के लिए प्रेरित किया।
साहित्यिक संध्या में विद्यार्थियों के ड्रामेबाज क्लब ने- अंतराल और दो तरफा, नाटकों का मंचन किया। नाटक अंतराल में आधुनिक जीवन की भौतिक आकांक्षाओं और पारिवारिक रिश्तों व मानवीय जिम्मेदारियों के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाया गया। वहीं, नाटक दो तरफा में व्यक्ति के बाहरी और वास्तविक आंतरिक व्यक्तित्व के बीच के मानसिक द्वंद्व को प्रस्तुत किया गया।
लीडरशिप टॉक में ऋत्विक उदयन ने रश्मिरथी का सस्वर पाठ किया और साहित्य व नेतृत्व के संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने रश्मिरथी के प्रसंगों को प्रतिभा पहचान, बातचीत, हितधारक प्रबंधन और रणनीतिक निर्णयों से जोड़ते हुए सफलता के तीन सूत्र बताए- प्रतिभा की समय पर पहचान व सराहना, अहंकार का त्याग और असफलताओं से सीखना। समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं और नाट्य मंचन में बेहतर प्रदर्शन करने वालों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
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