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गोलन हाइट्स पर अमेरिकी राजदूत टॉम बराक के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया. उन्होंने शुक्रवार को कहा कि इजरायल अब भी गोलान हाइट्स पर कब्जा किए हुए है. यह बात अमेरिका की मौजूदा नीति से अलग थी, क्योंकि 2019 में डोनाल्ड ट्रंप ने इस इलाके पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता दी थी. विवाद बढ़ा तो बराक ने रविवार को सफाई दी कि अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
दरअसल, बराक ने लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी और पत्रकार मारियो नौफल को दिए इंटरव्यू में गोलान हाइट्स का जिक्र किया था. उन्होंने कहा कि इजरायल अब भी इस इलाके पर कब्जा किए हुए है और यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के खिलाफ है.
गोलन हाइट्स सीरिया का रणनीतिक इलाका है. 1967 के युद्ध में इजरायल ने इस पर कब्जा किया था. इसके बाद 1981 में उसने इसे अपने में मिला लिया. संयुक्त राष्ट्र समेत ज्यादातर देश आज भी इजरायल के इस कदम को मान्यता नहीं देते. लेकिन अमेरिका का रुख अलग है. 2019 में ट्रंप ने गोलान हाइट्स पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता दे दी थी. यह कई दशकों से चली आ रही अमेरिकी नीति में बड़ा बदलाव था.
विवाद बढ़ा तो दी सफाई
बराक के बयान के बाद अमेरिका में सवाल उठने लगे. इजरायल की तरफ से भी इसका विरोध हुआ. इसके बाद रविवार को उन्होंने साफ किया कि उनकी बात का मतलब संयुक्त राष्ट्र के रुख का समर्थन करना नहीं था. इंडिया टुडे की रिपोर्ट्स के मुताबिक, बराक ने कहा कि 2019 में ट्रंप ने गोलान हाइट्स को लेकर जो अमेरिकी नीति तय की थी, उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है.
उन्होंने बताया कि गोलान हाइट्स का उदाहरण वह दक्षिणी लेबनान को लेकर चल रही स्थिति समझाने के लिए दे रहे थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका कहना था कि बातचीत से हुए समझौते सिर्फ नक्शे बदलने से ज्यादा टिकाऊ होते हैं.
अमेरिका और इजरायल में कड़ा विरोध
बयान सामने आते ही रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने सवाल खड़े कर दिए. उनका कहना था कि टॉम बराक शायद ट्रंप के उस फैसले को भूल बैठे हैं, जिसमें गोलान हाइट्स को इजरायल का हिस्सा माना गया था. वहीं इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने भी कड़ा विरोध जताते हुए इस बयान को ट्रंप के रुख के एकदम उलट बताया.
सीरिया एयरबेस पर भी घिरे बराक
बराक ने इसी इंटरव्यू में सीरिया के एक एयरबेस पर इजरायल के हमले की आलोचना भी की थी. इजरायल ने मंगलवार को एयरबेस पर हमला किया था. उसका कहना था कि वहां तुर्की की सैन्य मौजूदगी बनने से रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई. इसके बाद काट्ज ने रविवार को इस हमले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि इजरायल सीरिया में तुर्की की ऐसी मौजूदगी को स्वीकार नहीं करेगा, जिससे उसकी सुरक्षा को खतरा हो.
हिजबुल्लाह पर भी सफाई
टॉम बराक एक दूसरे बयान को लेकर भी विवादों में आ गए. उन्होंने इजरायल-लेबनान मसले का जिक्र करते हुए कहा था कि बातचीत की टेबल से हिजबुल्लाह और ईरान गायब हैं. इस पर कयास लगने लगे कि वे दोनों को वार्ता में शामिल करने की वकालत कर रहे हैं. हालांकि बाद में बराक ने तुरंत सफाई दी कि अमेरिका हिजबुल्लाह से कोई बात नहीं करता. उनका मकसद सिर्फ यह समझाना था कि मामला पेचीदा है, क्योंकि हिजबुल्लाह को हथियार और पैसा ईरान से ही मिलता है.
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