इराक के बगदाद में 17-18 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) के विदेश मंत्रियों की परिषद की 52वीं बैठक में पारित भारत विरोधी प्रस्तावों पर भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि OIC को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि OIC की बैठक में भारत के बारे में की गई बातें दुर्भावनापूर्ण, पक्षपाती और झूठी थीं, जिन्हें पाकिस्तान ने प्रायोजित किया था।
विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम 17-18 अक्टूबर, 2026 को बगदाद में आयोजित OIC के विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक के प्रस्तावों में भारत विरोधी बातों को पूरी तरह से खारिज करते हैं। भारत के बारे में ये बातें दुर्भावनापूर्ण, पक्षपाती और झूठी हैं, और इन्हें पाकिस्तान ने प्रायोजित किया है। हमें निराशा है कि OIC ने एक बार फिर खुद को पाकिस्तान के कट्टर एजेंडे के लिए इस्तेमाल होने दिया है।”
विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि OIC बैठक में भारत के खिलाफ दिए गए बयान पूरी तरह से द्वेषपूर्ण, पक्षपातपूर्ण और झूठे हैं, जिन्हें पाकिस्तान ने प्रायोजित किया है। भारत ने गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि OIC एक बार फिर पाकिस्तान के संकीर्ण और कट्टरपंथी एजेंडे का शिकार होकर उसके हाथों इस्तेमाल हुआ है। बता दें कि OIC 57 मुस्लिम देशों का एक बड़ा संगठन है। इसके सदस्य देश चार महाद्वीपों (एशिया, अफ्रीका, यूरोप और दक्षिण अमेरिका/कैरिबियाई क्षेत्र) में फैले हुए हैं।
भारत ने साफ किया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं और राजनीतिक रूप से प्रेरित कोई भी दुष्प्रचार इस जमीनी हकीकत को बदल नहीं सकता। बयान में कहा गया है कि अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के बाद से जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे, पर्यटन, कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास से आम जनता को सीधा लाभ मिल रहा है।
भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) की बदतर स्थिति को उजागर करते हुए कहा कि वहां पाकिस्तान ने आम प्रदर्शनकारियों पर हिंसा, दमन और बर्बरता ढहाई है, जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत कई लोग मारे गए हैं। मीडिया ब्लैकआउट के बावजूद पाकिस्तान के इन गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपाया नहीं जा सकता। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा केवल एक ही मुद्दा बाकी है, पाकिस्तान द्वारा अवैध और जबरन कब्जाए गए भारतीय क्षेत्रों (PoJK) को खाली करना और सीमा पार आतंकवाद को तुरंत बंद करना।
भारत ने कहा कि इस्लामोफोबिया जैसे मनगढ़ंत आरोप लगाकर पाकिस्तान केवल अपने देश में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न, सांप्रदायिक हिंसा, प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक अस्थिरता से दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के इस झूठे एजेंडे को बार-बार समर्थन देने से OIC की अपनी विश्वसनीयता और अखंडता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इसमें आगे कहा गया, “पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे दुर्भावनापूर्ण प्रचार और नैरेटिव का OIC द्वारा बार-बार समर्थन करना, उसकी विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हमें उम्मीद है कि इसके सदस्य बेहतर कदम उठाएंगे और इस संगठन में सुधार लाएंगे।”
दूसरी ओर, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार ने बगदाद में हुई OIC बैठक और बदलते क्षेत्रीय हालात पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची तथा मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्ती से फोन पर चर्चा की। इन बातचीत के दौरान क्षेत्रीय चुनौतियों, कूटनीति, सऊदी अरब के बुनियादी ढांचों पर हूती विद्रोहियों के हमलों और R-4 ढांचे (पाकिस्तान, मिस्र, तुर्किये और सऊदी अरब) के तहत सहयोग पर चर्चा हुई।
प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन’ रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन’ है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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