पाकिस्तान जैसे हालात की ओर बढ़ा बांग्लादेश! जानें भारत की मदद के बावजूद किस झंझट – ABP न्यूज़

Bangladesh-India News: भारत के साथ खराब रिश्तों का असर बांग्लादेश पर पड़ने लगा है. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार खाद्य आपूर्ति संकट और बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने में असमर्थ दिख रही है. इस बीच पड़ोसी मुल्क में पिछले तीन सप्ताह के दौरान चावल की लगभग हर किस्मों की कीमतों में उछाल देखी गई है.
बांग्लादेश में चावल हुआ महंगा
द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक ढ़ाका के करवान, मीरपुर और काजीपुर सहित अन्य बाजारों में तीन सप्ताह पहले की तुलना में बढ़िया चावल की कीमत में 6-8 रुपये, नॉर्मल क्वालिटी के चावल की कीमत में 5-6 रुपये और मोटे चावल की कीमत में 2-3 रुपया प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है.
भारत ने की मदद फिर भी हालत खराब
बांग्लादेश से बदल रहे रिश्तों के बीच भारत ने दिसंबर 2024 में नेबरहुड फर्स्ट की पॉलिसी के तहत बांग्लादेश की मदद की थी. बांग्लादेश में बढ़ती महंगाई के बीच उपभोक्ता मांग को पूरा करने के लिए वहां की अंतिरम सरकार ने भारत से 50,000 टन चावल खरीदने का फैसला किया था. खाद्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश में 17 दिसंबर तक फूड स्टॉक 11.48 लाख टन था, जिसमें से करीब 7.42 लाख टन चावल था.
रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी ढाका के करवान बाजार के एक ट्रेडर्स ने बताया कि वह 40 साल से चावल का बिजनेस कर रहे हैं और इस तरह की महंगाई पहले कभी नहीं देखी. उन्होंने कहा, “टैक्स में छूट और भारत से आयात के बावजूद चावल की कीमतों में इस तरह की बढ़ोतरी नॉर्मल नहीं है.” उन्होंने इसके लिए बड़ी कंपनियों और मिल मालिकों को जिम्मेदार ठहराया है, जो धान की खरीद और स्टोरेज की होड़ में लगे हुए हैं.
बांग्लादेश सरकार की प्लानिंग फेल
रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश की मजूमदार ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के एमडी ने बताया, “चावल आयात की अनुमति मिलने के बाद कंपनी ने 20,000 टन मोटे चावल का आयात किया, लेकिन इसकी मांग कम रही. इस वजह से पिछले हफ्ते भारत से बढ़िया चावल का आयात शुरू कर दिया गया.”
नवंबर में बांग्लादेश के राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (एनबीआर) ने चावल के आयात पर आयात शुल्क और रेगुलेटरी टैक्स को हटा लिया था, साथ ही एडवांस इकम टैक्स को पांच फीसदी से घटाकर दो फीसदी कर दिया गया था. इसके बाद अंतरिम सरकार ने 277 प्राइवेट संस्थाओं को 14.81 लाख टन चावल आयात करने की अनुमति दे दी, ताकि स्टॉक बढ़ाकर घरेलू कीमतों को नियंत्रित किया जा सके, लेकिन बांग्लादेश में महंगाई की स्थिति को देखकर ऐसा लग रहा है कि सरकार की प्लानिंग फेल हो गई.
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