Shreeom Singh
Date: 03-10-26 11:10
Pakistan-Saudi Arabia: यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब अपनी सैन्य तैयारी तेज कर रहा है. सऊदी की योजना लाल सागर के अहम इलाकों में हूतियों का दबदबा कम करने और यमन की सरकारी सेना को आगे करके उनके खिलाफ अभियान चलाने की है. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित ऑपरेशन में जमीन पर यमनी सेना की बड़ी भूमिका होगी, जबकि सऊदी अरब हवाई मदद उपलब्ध कराएगा.
इस बीच पाकिस्तान भी सऊदी अरब की सुरक्षा में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब में 30 से 40 हजार पाकिस्तानी सैनिक तैनात हैं. इनकी मुख्य जिम्मेदारी सऊदी की सीमाओं की सुरक्षा और ड्रोन-मिसाइल हमलों से बचाव में मदद करना है. पाकिस्तान की ओर से सैन्य सलाहकार भी सऊदी अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं. हाल के दिनों में पाकिस्तान ने सैन्य उपकरण लेकर कार्गो विमान भी सऊदी भेजे हैं.
हूतियों के खिलाफ क्या है सऊदी की योजना?
सऊदी अरब के सामने हूतियों से निपटने के लिए दो तरह की रणनीति है. एक योजना लाल सागर के तटीय इलाकों और बाब-अल-मंदेब के आसपास हूतियों के प्रभाव को कम करने की है. इस इलाके को समुद्री व्यापार के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है.
दूसरी योजना यमन के कई हिस्सों में एक साथ सैन्य दबाव बढ़ाने की है. इसमें अल-बायदा, मारिब, ताइज और अल-जौफ जैसे इलाकों को अभियान में शामिल किया जा सकता है. Reuters के मुताबिक, इस कार्रवाई का एक मकसद हूतियों की हालिया बढ़त को रोकना भी है.
पाकिस्तान कैसे कर रहा है सऊदी की मदद?
पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग करता रहा है. हालिया तनाव के बीच भी पाकिस्तानी सैनिक सऊदी में तैनात हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन सैनिकों को सऊदी की सीमा की सुरक्षा और मिसाइल व ड्रोन हमलों से बचाव के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
पाकिस्तान ने सैन्य सामान भी सऊदी समर्थित यमनी बलों तक पहुंचाया है. इसमें एयर डिफेंस सिस्टम, हल्की तोपें, ड्रोन और एंटी-ड्रोन उपकरण शामिल बताए गए हैं. पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी और सलाहकार भी सऊदी पक्ष के साथ रणनीति बनाने में सहयोग कर रहे हैं.
अमेरिका और तुर्की भी सऊदी के साथ
सऊदी अरब को इस पूरे अभियान में अमेरिका से भी मदद मिल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका सीधे जमीनी लड़ाई में उतरने के बजाय सऊदी को खुफिया जानकारी और हवाई हमलों के लिए जरूरी जानकारी उपलब्ध करा रहा है.
वहीं तुर्की के बनाए ड्रोन भी सऊदी के पास मौजूद हैं और इन्हें यमन में इस्तेमाल किया जा रहा है. तुर्की और सऊदी के बीच रक्षा सहयोग भी हाल के समय में बढ़ा है. इसके अलावा फ्रांस भी सऊदी के अहम बंदरगाहों की सुरक्षा में मदद कर रहा है.
यमन में जमीनी लड़ाई आसान नहीं होगी
यमन में अगर बड़ा जमीनी अभियान शुरू होता है तो उसकी जिम्मेदारी मुख्य रूप से यमनी सरकारी बलों पर होगी. सऊदी और संयुक्त अरब अमीरात ने गृह युद्ध के दौरान कई हूती विरोधी गुटों को हथियार और ट्रेनिंग दी थी. अब इन्हीं अलग-अलग गुटों के बीच तालमेल बनाना बड़ी चुनौती हो सकता है.
विश्लेषकों के मुताबिक, हूतियों के खिलाफ लंबे और बड़े अभियान के लिए स्थानीय बलों का एकजुट रहना जरूरी होगा. यमन में अलग-अलग गुटों के बीच पहले भी मतभेद और संघर्ष सामने आ चुके हैं. ऐसे में सऊदी अरब के सामने सिर्फ हूतियों का मुकाबला ही नहीं, बल्कि जमीन पर मौजूद सहयोगी गुटों के बीच तालमेल बनाए रखने की चुनौती भी होगी.
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