Yuvraj Singh
Date: 17-10-26 17:39
दुनिया के कई देशों में खाने-पीने की चीजों की उपलब्धता और उन्हें खरीद पाने की क्षमता आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. कहीं युद्ध और हिंसा ने लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है, तो कहीं बाढ़, सूखा और आर्थिक बदहाली के कारण परिवारों के लिए दो वक्त का भोजन जुटाना भी कठिन हो गया है. इसी बीच अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठन एक्शन अगेंस्ट हंगर की नई रिपोर्ट ने वैश्विक खाद्य संकट की गंभीर तस्वीर सामने रखी है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान समेत दुनिया के 10 देश ऐसे हैं, जहां भुखमरी और खाद्य असुरक्षा का संकट सबसे अधिक केंद्रित है.
पाकिस्तान में 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को मदद की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में आर्थिक परेशानियों, गरीबी, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं ने खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को और गंभीर बना दिया है. अनुमान है कि साल 2026 में पाकिस्तान के करीब 1.06 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत पड़ सकती है. बाढ़, सूखा और भीषण गर्मी जैसी घटनाएं खेती और पशुपालन पर असर डालती हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों की आमदनी प्रभावित होती है. दूसरी ओर, महंगाई के कारण जरूरतमंद लोगों के लिए पर्याप्त और पौष्टिक भोजन खरीदना भी मुश्किल हो जाता है.
दुनिया के इन 10 देशों में खाद्य संकट सबसे गंभीर
एक्शन अगेंस्ट हंगर की रिपोर्ट में जिन 10 देशों को दुनिया के सबसे बड़े खाद्य संकट वाले देशों में शामिल किया गया है, उनमें नाइजीरिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, सूडान, यमन, अफगानिस्तान, म्यांमार, बांग्लादेश, पाकिस्तान, दक्षिण सूडान और सीरिया शामिल हैं. इन देशों में संघर्ष, विस्थापन, गरीबी और जलवायु संबंधी आपदाओं के कारण बड़ी आबादी को पर्याप्त भोजन हासिल करने में परेशानी हो रही है.
दुनिया में 26.6 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा से प्रभावित
रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर भी चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं. इसके मुताबिक, दुनिया के 47 देशों और क्षेत्रों में करीब 26.6 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं. पिछले एक दशक में ऐसे लोगों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है. रिपोर्ट बताती है कि भुखमरी का संकट कुछ देशों में अधिक केंद्रित है और केवल तीन देशों—कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, नाइजीरिया और सूडान—में ही गंभीर भूख से जूझ रहे लोगों की संख्या वैश्विक आंकड़े का लगभग एक-तिहाई है.
युद्ध, महंगाई और जलवायु परिवर्तन बढ़ा रहे मुश्किलें
खाद्य संकट के पीछे केवल अनाज की कमी ही वजह नहीं है. कई देशों में युद्ध और हिंसा के कारण लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं, खेती प्रभावित हो रही है और राहत सामग्री जरूरतमंदों तक पहुंचाना कठिन हो गया है. वहीं, बाढ़, सूखा और बढ़ता तापमान फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं. महंगाई और रोजगार की कमी के चलते कई परिवार बाजार में भोजन उपलब्ध होने के बावजूद उसे खरीद नहीं पाते. ऐसे हालात में बच्चों और महिलाओं के कुपोषण का खतरा भी बढ़ जाता है.
घटती मानवीय सहायता ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट में मानवीय सहायता के लिए मिलने वाली धनराशि में कमी को भी गंभीर चिंता बताया गया है. जब जरूरतमंद लोगों तक भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और दूसरी बुनियादी सुविधाएं समय पर नहीं पहुंचतीं, तो पहले से प्रभावित समुदायों की स्थिति और खराब हो सकती है. विशेषज्ञों के सामने अब बड़ी चुनौती यह है कि संकटग्रस्त क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के साथ-साथ खेती, आजीविका और खाद्य आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि लोगों को लंबे समय तक मदद पर निर्भर न रहना पड़े.
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