पाकिस्तान वाले कश्मीर में बगावत, गोलीबारी के बाद PoK में लोग बेकाबू; कुछ बड़ा होगा क्या? – Hindustan

पाकिस्तान में बगावत के सुर लगातार तेज हो रहे है। एक ओर बलूचिस्तान के लड़ाके पाकिस्तानी सेना को छकाने में जुटे हैं, वहीं अब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में भी आग भड़क उठी है। हजारों की संख्या में लोग शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। हालात बेकाबू होते जा रहे हैं, जिसके मद्देनजर पाक सरकार ने PoK में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं और इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह सस्पेंड कर दिया है।
दरअसल, संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी की मांगों को पूरा करने में सरकार की नाकामी से उपजा गुस्सा अब उफान पर है। पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) के मीरपुर, कोटली और मुजफ्फराबाद समेत पूरे इलाके में विरोध मार्च और रैलियां जोर पकड़ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुजफ्फराबाद में हालात तब और खराब हो गए जब पुलिस ने कथित रूप से प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की। इस हिंसा में दो लोग मारे गए, जबकि 22 से अधिक घायल हो गए। इस घटना ने लोगों का आक्रोश और भड़का दिया, और वे सरकार और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करने लगे।
पाकिस्तानी न्यूज चैनलों पर वायरल वीडियो अराजकता की पोल खोल रहे हैं। एक वीडियो में कुछ लोग हवा में ताबड़तोड़ फायरिंग करते नजर आ रहे हैं, तो दूसरे में प्रदर्शनकारी कारों पर चढ़कर झंडे लहराते और नारे लगाते दिख रहे हैं। एक अन्य क्लिप में एक प्रदर्शनकारी मुट्ठीभर खाली कारतूस दिखाते हुए नजर आ रहा है। आरोप लगाया जा रहा है कि इस्लामाबाद ने इन प्रदर्शनों का जवाब ताकत के बल पर दे रहा है। डॉन न्यूज वेबसाइट के अनुसार, भारी हथियारों से लैस गश्ती दलों ने PoK के कस्बों में फ्लैग मार्च निकाले। पड़ोसी पंजाब प्रांत से हजारों सैनिक हटाकर PoK भेजे गए हैं, और राजधानी इस्लामाबाद से 1000 अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं। इसके अलावा इंटरनेट पर सख्ती से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
गौरतलब है कि PoK की अवामी एक्शन कमेटी ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है, जिसके तहत सभी दुकानें और परिवहन सेवाएं ठप हैं। कमेटी ने 38-सूत्री चार्टर जारी किया है, जिसमें प्रशासनिक सुधारों की मांग की गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को समाप्त किया जाए, क्योंकि इससे उनका प्रतिनिधित्व कमजोर होता है।
इसके अलावा, मंगला हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट से सस्ती बिजली उपलब्ध कराने और पाक सरकार के पुराने वादों को पूरा करने की भी मांग उठाई गई है। कमेटी के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर ने साफ कहा कि हमारा आंदोलन किसी संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि बुनियादी अधिकारों की लड़ाई है। पिछले 70 सालों में हमें ये अधिकार नहीं मिले। अब बस बहुत हो गया… या तो हक दो या जनता के गुस्से का सामना करने को तैयार रहो।
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