पुरुषों में इनफर्टिलिटी बढ़ाती हैं ये 3 आदतें… एक गलती तो ज्यादातर लोग कर रहे, AIIMS ट्रेंड डॉक्टर ने बताया – AajTak

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इनफर्टिलिटी की समस्या आजकल पुरुषों और महिलाओं दोनों में देखने को मिल रही है जिसकी एक बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल को भी बताया जा रहा है. पुरुषों में बांझपन एक ऐसी कंडीशन है जो उनकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है. यानी अगर किसी को यह दिक्कत होती है तो उस व्यक्ति को पिता बनने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में स्पर्म्स का लो प्रोडक्शन, स्पर्म्स का ठीक से परफॉर्म ना कर पाना या फिर स्पर्म्स के फ्लो में रुकावट जैसी स्थितियां हो सकती हैं.
2021 की लैंसेट रिपोर्ट के अनुसार, अनुमान है कि दुनिया भर में 8-12 प्रतिशत जोड़ों में बांझपन की समस्या होती है जिसमें लगभग 50% मामलों में पुरुषों की इनफर्टिलिटी काफी बड़ा फैक्टर होती है. यानी अगर कपल मां-बाप नहीं बन पा रहा है तो इसके पीछे 50 प्रतिशत पुरुष के शरीर में कोई कमी हो सकती है. इसलिए पुरुषों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि उनकी प्रजनन क्षमता पर कौन सी आदतें बुरा असर डाल सकती हैं.
पुरुषों की फर्टिलिटी को प्रभावित करने वाली 3 आदतें
29 सितंबर को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में AIIMS, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ट्रेंड गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने तीन ऐसी रोज की आदतों के बारे में बताया जो पुरुषों में प्रजनन क्षमता को कम कर सकती हैं या फिर इनफर्टिलिटी की समस्या पैदा कर सकती हैं.
इन आदतों के बारे में बताते हुए उन्होंने अपने वीडियो में कहते हैं, पुरुषों की इनफर्टिलिटी को कम करने वाली आदतें जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए. क्या आप जानते हैं कि रोज की कुछ आदतें चुपचाप आपकी प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचा सकती हैं. 
1. हॉट टब और सॉना से रहें सावधान
हॉट टब और सॉना से निकलने वाली गर्मी से शुक्राणु की संख्या और गुणवत्ता कम हो सकती है क्योंकि स्वस्थ शुक्राणु पैदा करने के लिए अंडकोष को कम तापमान की जरूरत होती है. लंबे समय तक गर्मी में रहने से 3 महीने तक शुक्राणु उत्पादन पर असर पड़ सकता है.
2. टाइट अंडरवियर पहनना है खतरनाक
टाइट अंडरवियर पहनने से अंडकोष के आसपास गर्मी बढ़ जाती है जो समय के साथ शुक्राणु के उत्पादन और गुणवत्ता पर बुरा असर डाल सकती है.
3. धूम्रपान और ई सिगरेट से रहें सावधान
धूम्रपान और ई सिगरेट न केवल आपकी सेहत के लिए बल्कि आपकी प्रजनन क्षमता के लिए भी हानिकारक हैं. इन दोनों आदतों से शरीर में हानिकारक केमिकल प्रवेश करते हैं जो शुक्राणु की गुणवत्ता और गतिशीलता (mobility) को कम कर सकते हैं.
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