पोकरण एक बार फिर बदलती युद्ध तकनीक का गवाह बनेगा। इस बार फोकस फाइटर जेट या मिसाइलों पर नहीं, बल्कि ड्रोन और उनसे निपटने वाली तकनीक पर होगा। वायुसेना 14 से 16 सितंबर तक पोखरण रेंज में ‘आईएएफ ड्रोनथॉन’ आयोजित करेगी। इसमें देश के घरेलू निर्माता, स्टार्टअप और इनोवेटर्स अपने मानवरहित हवाई सिस्टम (यूएएस) और काउंटर-यूएएस की क्षमताएं दिखाएंगे। ड्रोनथॉन का उद्देश्य स्वदेशी कंपनियों और सेना की जरूरतों के बीच सीधा तालमेल बनाना भी है। रेगिस्तान में ड्रोनथॉन में सिर्फ नए ड्रोन नहीं दिखेंगे।
लाइव डेमोंस्ट्रेशन के जरिए उनकी परिचालन क्षमता और कॉम्बैट इफेक्टिवनेस परखी जाएगी। वहीं काउंटर-ड्रोन सिस्टम दुश्मन के ड्रोन को डिटेक्ट, ट्रैक और न्यूट्रलाइज करने की क्षमता दिखाएंगे। इनमें जैमिंग और इंटरसेप्शन जैसी तकनीकें भी शामिल हैं।
स्वॉर्म टेक्नोलॉजी जैसी क्षमताएं परखी जाएंगी
ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी यूएवी, काउंटर-यूएएस और वन वे अटैक ड्रोन्स के इस्तेमाल ने ड्रोन वॉरफेयर की अहमियत सामने ला दी। भारतीय प्रणालियों ने वन वे अटैक ड्रोन्स के जरिए दुश्मन के एयर डिफेंस और रडार सिस्टम को भी निशाना बनाया। वायुसेना दो दशक से इस मानवरहित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल निगरानी और टोही जैसी गतिविधियों के लिए करती रही है। 2023 में वायुसेना ने बताया था कि वह रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट्स का बड़े स्तर पर आईएसआर अभियानों में इस्तेमाल कर रही है।
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