भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में शुक्रवार को प्रशासनिक कामों में राजभाषा हिन्दी के इस्तेमाल को लेकर एक कार्यशाला आयोजित हुई। ‘प्रशासनिक कार्य में राजभाषा हिन्दी का कार्यान्वयन’ विषय पर हुई इस कार्यशाला की अध्यक्षता संस्थान के निदे
मुख्य वक्ता करनाल के राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के संयुक्त निदेशक (राजभाषा) धीरज शर्मा ऑनलाइन जुड़े। उन्होंने हिन्दी के विकास और इसके राजभाषा बनने तक के सफर के बारे में बताया।
निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त ने कहा कि इसका मकसद प्रशासनिक कामों में हिन्दी का ज्यादा इस्तेमाल बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि संस्थान में राजभाषा के प्रयोग और प्रचार पर लगातार काम हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि संसदीय राजभाषा निरीक्षण समिति के निरीक्षण में संस्थान ने तय मानकों को पूरा किया था।
संस्थान के अलग-अलग विभागों और अनुभागों में राजभाषा नियमों का पालन करने पर भी जोर दिया जा रहा है। धीरज शर्मा ने राजभाषा की संवैधानिक स्थिति, संविधान के संबंधित अनुच्छेदों और अंकों के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप की जानकारी दी। उन्होंने प्रशासनिक कामों में हिन्दी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने राजभाषा विभाग के सालाना लक्ष्यों, तिमाही प्रगति रिपोर्ट, हिन्दी समिति की बैठकों, कार्यशालाओं और संसदीय निरीक्षण से जुड़ी प्रक्रिया के बारे में भी बताया। साथ ही, हिन्दी के प्रचार से जुड़े खास बिंदुओं को उदाहरणों के साथ समझाया।
कार्यशाला का संचालन राजभाषा प्रभारी अधिकारी रेनू सनवाल ने किया। इसमें संस्थान के वैज्ञानिक, अधिकारी और प्रशासनिक कर्मचारी शामिल हुए।
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