अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने भारत की लंबे समय के लिए विदेशी मुद्रा इश्यूअर डिफॉल्ट रेटिंग (IDR) ‘BBB-‘ पर बरकरार रखी है। साथ ही, इसके आउटलुक को ‘स्टेबल’ यानी स्थिर बताया है। एजेंसी का कहना है कि मजबूत आर्थिक विकास और ठोस विदेशी मामले भारत की रेटिंग का समर्थन करते हैं।
फिच का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 6.5% रहेगी, जो ‘BBB’ श्रेणी के अन्य देशों के मुकाबले काफी अधिक है। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (capex) और निजी खपत में स्थिरता से घरेलू मांग मजबूत बनी रहेगी। हालांकि, निजी निवेश मामूली रहने की उम्मीद है।
फिच का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ का सीधा असर भारत की जीडीपी पर मामूली ही होगा। क्योंकि, अमेरिका को निर्यात भारत की जीडीपी का केवल 2% है, लेकिन इस अनिश्चितता से व्यापारिक मनोबल और निवेश प्रभावित हो सकता है। एजेंसी को उम्मीद है कि प्रस्तावित 50% टैरिफ बातचीत के बाद कम हो जाएगा। ट्रंप का 50 पर्सेंट टैरिफ 27 अगस्त से प्रभावी हो रहा है।
खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट और रिजर्व बैंक की नीतियों की वजह से महंगाई नियंत्रण में है। जुलाई में महंगाई दर घटकर 1.6% रह गई। कोर इन्फ्लेशन 4% के आसपास स्थिर है। कम महंगाई की वजह से साल 2025 में रेपो रेट में 0.25% की एक और कटौती की गुंजाइश बनी हुई है।
सरकारी राजस्व में वृद्धि और सब्सिडी खर्च में कमी से राजकोषीय घाटा सुधर रहा है। केंद्र सरकार का घाटा FY25 में 4.8% रहने का अनुमान है, जो FY21 के 9.2% के मुकाबले काफी बेहतर है। फिच का मानना है कि सरकार FY26 में इसे 4.4% तक लाने के अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेगी। हालांकि, सरकारी कर्ज अभी भी उच्च स्तर पर बना हुआ है।
भारत के विदेशी मामले मजबूत बने हुए हैं। देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 695 अरब डॉलर के पार है, जो आठ महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। चालू खाता घाटा (CAD) FY26 में 0.7% रहने का अनुमान है। यह काफी कम और प्रबंधनीय है।
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