राजस्थान में महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय इस समय छात्र संख्या के सबसे गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। 300 प्रभावित स्कूलों की आधिकारिक सूची ने यह साफ कर दिया है कि यह समस्या किसी एक जिले या ब्लॉक की नहीं बल्कि पूरे राजस्थान की है।
राजधानी जयपुर से लेकर मारवाड़ के केंद्र जोधपुर और शेखावाटी के गढ़ सीकर तक, दर्जनों ऐसे स्कूल हैं जहां ढांचागत कमियों और स्टाफ के टोटे के कारण नामांकन दहाई के आंकड़े में सिमट कर रह गया है। अब शिक्षा विभाग पूरे प्रदेश में “समानान्तर संचालन “ फॉर्मूले के तहत हिंदी माध्यम की री-एंट्री करवाने जा रहा है।
इसका मकसद हिंदी माध्यम के छात्रों को वापस सरकारी स्कूलों से जोड़ना है जो अंग्रेजी माध्यम बनने के बाद या तो स्कूल छोड़ गए या दूर दराज के स्कूलों में जाने को मजबूर हुए। सीबीईओ और सीडीईओ की स्पष्ट अभिशंषा के बाद इसी सत्र से प्रदेश के इन 300 स्कूलों में हिंदी माध्यम की कक्षाएं विधिवत रूप से शुरू हो जाएंगी।
पांच बिंदुओं पर जोर होगा जिसमें क्या वर्तमान में पढ़ रहे बच्चों या उनके माता-पिता से अंग्रेजी या हिंदी माध्यम का कोई लिखित सहमति ली गई है? परिक्षेत्र से हिंदी माध्यम में प्रवेश लेने वाले संभावित छात्र-छात्राओं की कुल संख्या? स्कूल के 3 से 5 किमी के दायरे में संचालित अन्य हिंदी माध्यम स्कूलों की दूरी, उनका स्तर (प्राथमिक/उच्च प्राथमिक) और वहां के वर्तमान नामांकन का पूरा ब्यौरा देना होगा। निदेशालय की सूची के अनुसार प्रदेश नामांकन की स्थिति चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है।
स्टाफ का गणित – वर्तमान में स्कूल में कार्यरत स्टाफ किस विषय का है और वहां कौन-कौन से संकाय (कला, विज्ञान, वाणिज्य) चल रहे हैं। स्कूल के अंग्रेजी माध्यम में बदलने से पहले वहां कितना नामांकन था और बदलने के बाद साल-दर-साल इसमें कितनी गिरावट आई, इसका कक्षावार ब्यौरा मांगा गया है।
प्रदेश में संभागवार विद्यालयों के हालात
जयपुर संभाग – राजधानी के ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं न होने से बच्चे घट गए हैं। जोन के कई स्कूल तो ऐसे जहां कुल छात्र संख्या 30 से 45 के बीच।
जोधपुर संभाग – जोधपुर के सुदूर ग्रामीण इलाकों जैसे बाप और लोहावट ब्लॉक के साथ-साथ नागौर व लाडनूं क्षेत्र के कई महात्मा गांधी स्कूलों में नामांकन 20 से 40 के बीच है। स्वीकृत शिक्षकों की संख्या के अनुपात में छात्रों का यह आंकड़ा बेहद कम माना गया है।
बीकानेर संभाग – श्रीडूंगरगढ़ के इंदिरा कॉलोनी (तेऊ) स्कूल में 7 शिक्षक हैं और पूरे स्कूल में छात्र सिर्फ 29 हैं। लूणकरणसर के धीरेरा स्कूल में 6 स्टाफ पर सिर्फ 30, खाजूवाला के अक्कासर में 7 स्टाफ पर नामांकन 43 है। नोखा के साधासर में 45 और कोलायत के चारणवाला में 46 छात्र है। जयपुर रोड के वृंदावन एन्क्लेव के स्कूल में 7 स्टाफ नामांकन 43 है।
सीकर, अजमेर, राजसमंद- सीकर और अजमेर के ग्रामीण अंचलों में भी कई ऐसे स्कूल इस 300 की सूची में शामिल हैं, जहाँ कक्षा 1 से 8वीं या 12वीं तक की पूरे स्कूल में कुल मिलाकर 50 छात्र भी नहीं मिल रहे हैं।
पूरे प्रदेश के लिए लागू होगा डैमेज कंट्रोल फॉर्मूला
पहला विकल्प – शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों में नामांकन अत्यंत न्यून है, उन्हें पूरी तरह बंद करने या अचानक पूरी तरह हिंदी करने के बजाय हाइब्रिड मॉडल पर चलाया जाएगा। इसके लिए मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों से अगले 7 दिन में दो विशेष विकल्पों के आधार पर प्रस्ताव मांगे गए हैं। पहला विकल्प है कि सिंगल शिफ्ट, डबल विंग। यह प्रदेश के उन महात्मा गांधी स्कूलों में लागू होगा जहाँ पर्याप्त आधारभूत ढांचा उपलब्ध है। स्कूल एक ही पारी में खुलेगा। स्कूल के भीतर दो अलग-अलग विंग या सेक्शन बना दिए जाएंगे। एक हिस्से में अंग्रेजी माध्यम के वर्तमान छात्र पढ़ेंगे और दूसरे हिस्से में हिंदी माध्यम के छात्रों की कक्षाएं लगेंगी।
दूसरा विकल्प: डबल शिफ्ट फॉर्मूला – प्रदेश के उन स्कूलों में जहाँ नामांकन की मांग तो है या छात्र संख्या बढ़ानी है लेकिन स्कूल भवन छोटा है और कमरों की भारी कमी है। यहाँ स्कूल को दो अलग-अलग पारियों में बांटकर चलाया जा सकता है। पहली पारी पूरी तरह महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम के लिए आरक्षित रहेगी जिसमें वर्तमान छात्र पढ़ेंगे। दूसरी पारी में वही स्कूल हिंदी माध्यम के रूप में संचालित होगा जिससे स्थानीय क्षेत्र के हिंदी माध्यम के बच्चे वहां नए सिरे से प्रवेश ले सकेंगे। निदेशालय ने साफ कर दिया है कि किसी भी जिले में बिना ठोस आधार के बदलाव नहीं होगा।
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