फ्री में दिखेगा वर्ल्ड कप? टीवी और स्ट्रीमिंग पर बात नहीं बनी, तो अब इन 3 तरीकों से मैच देख पाएंगे फैंस – Zee News

Fifa World Cup 2026 Broadcast Rights India: भारत में 2026 फीफा वर्ल्ड कप के प्रसारण पर संकट गहराया हुआ है. जियोस्टार और फीफा के बीच डील टूटने के बाद करोड़ों भारतीय फैंस असमंजस में हैं. क्या भारत में फुटबॉल का यह महाकुंभ ब्लैकआउट की ओर बढ़ रहा है?
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Fifa World Cup 2026 Broadcast Rights India: भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के लिए 2026 फीफा वर्ल्ड कप का इंतजार एक अप्रत्याशित मोड़ ले चुका . अभी तक वर्ल्ड कप लिए कोई ब्रॉडकास्टर नहीं मिला है. टूर्नामेंट शुरू होने में अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं और दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन अभी भी अपने सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक में अपना ठिकाना तलाश रहा है. यह एक बेहद अजीब स्थिति है क्योंकि आमतौर पर इस समय तक प्रोमो हर तरफ दिखने लगते थे और फैंस को पता होता था कि उन्हें मैच कहां देखने हैं. इस बार सब शांत है. न तो कोई पुख्ता टीवी पार्टनर है और न ही किसी स्ट्रीमिंग दिग्गज ने इसे लॉक किया है, बस एक लंबा इंतजार चल रहा है.

इस अनिश्चितता के केंद्र में एक ऐसी डील है जो सिरे नहीं चढ़ पाई. जियो-हॉटस्टार से अधिकारों को जीतने की सबसे ज्यादा उम्मीद थी, लेकिन उसकी बोली को फीफा ने खारिज कर दिया. इसके बाद फीफा और भारत के सबसे बड़े मीडिया दिग्गजों के बीच एक दुर्लभ गतिरोध पैदा हो गया है.

क्या 11 जून तक सुलझ पाएगा ये विवाद?

टूर्नामेंट 11 जून से शुरू हो रहा है और समय बहुत तेजी से निकल रहा है. यह स्थिति इसलिए भी असामान्य है क्योंकि फीफा ने पहले ही दुनिया भर के 175 से अधिक क्षेत्रों में प्रसारण सौदे तय कर लिए हैं. भारत और चीन ही ऐसे प्रमुख बाजार बचे हैं जो अभी भी अनिश्चितता के भंवर में फंसे हैं. इस संकट की जड़ में कीमत को लेकर बड़ा अंतर है. फीफा ने शुरुआत में भारत के अधिकारों के लिए लगभग 100 मिलियन डॉलर मांगे थे, जिसे बाद में घटाकर 35 मिलियन डॉलर कर दिया गया. इसके बावजूद जियोहॉटस्टार ने कथित तौर पर केवल 20 मिलियन डॉलर की पेशकश की, जो फीफा के लिए बहुत कम थी.

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क्यों हाथ खींच रहे हैं ब्रॉडकास्टर्स?

इसके पीछे के कारण काफी व्यावहारिक हैं. भारत में अधिकांश मैचों का प्रसारण आधी रात से सुबह (भारतीय समयानुसार रात 12:30 से सुबह 7 बजे) के बीच होगा, जिससे दर्शकों की संख्या और विज्ञापन राजस्व पर बुरा असर पड़ेगा. साथ ही क्रिकेट के दबदबे वाले बाजार में फुटबॉल अधिकारों पर भारी निवेश करना एक बड़ा जोखिम बना हुआ है.
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अब आगे की क्या है संभावना?

फिलहाल सब कुछ अधर में है, लेकिन आमतौर पर वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजन इतने करीब होने पर यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रहती. ज्यादातर संकेत ‘लेट डील’ (देर से होने वाले समझौते) की ओर इशारा करते हैं, लेकिन जब तक आधिकारिक हस्ताक्षर नहीं हो जाते, यह केवल एक इंतजार का खेल है.
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अब तीन विकल्पों पर चर्चा

  • जियोहॉटस्टार की बोली खारिज होने के बाद भी वह रेस में सबसे आगे हैं, बशर्ते दोनों पक्ष कीमत पर सहमत हों.
  • प्रसार भारती (दूरदर्शन) एक ‘सेफ्टी नेट’ विकल्प है जो ‘स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सिग्नल्स एक्ट’ के तहत सेमीफाइनल और फाइनल जैसे बड़े मैच दिखा सकता है.
  • फीफा+ और यूट्यूब: यदि कोई पारंपरिक ब्रॉडकास्टर नहीं मिलता है, तो फीफा अपने स्वयं के प्लेटफॉर्म या यूट्यूब का सहारा ले सकता है.

एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. दैनिक जागरण से करियर की शुरुआत करने वाले रोहित ईटीवी, दैनिक भास्कर, जनसत्ता और अमर उजाला होते हुए जी न्यूज में हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के तौर पर स्पोर्ट्स…और पढ़ें
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