फ्लाइट उड़ते ही कान क्यों हो जाते हैं बंद? उतरते समय दर्द की ये है बड़ी वजह, ENT डॉक्टर से समझें पूरा मामला – India.com

कुछ परेशानियों का सामना हम में से लगभग हर किसी को करना पड़ता है, जैसे फ्लाइट में बैठने पर या पहाड़ों पर तेज़ी से ऊपर-नीचे जाने पर कान बंद होना, भारी लगना या दर्द होना बहुत आम बात है. ये शरीर की बनावट और हवा के दबाव का मिला-जुला असर है, आइए इसे आसान भाषा में Dr Rajat parashar (Assistant professor, Dept of ENT NIIMS HOSPITAL, GREATER NOIDA) से समझते हैं.

Dr Rajat parashar ने बताया कि हमारे कान के तीन हिस्से होते हैं. पहला बाहरी कान, दूसरा मध्य कान और तीसरा भीतरी कान, मध्य कान एक खाली जगह है जिसमें हवा भरी होती है. इस हवा का दबाव बाहर की हवा के दबाव के बराबर रहना बहुत ज़रूरी है, अगर दबाव बराबर न रहे तो कान का पर्दा सही से नहीं हिल पाता और सुनाई ठीक से नहीं देता, वहीं मध्य कान को नाक और गले के पिछले हिस्से से एक पतली नली जोड़ती है. इस नली को यूस्टेशियन ट्यूब कहते हैं। ये नली ज़्यादातर समय बंद रहती है, सिर्फ़ जब हम निगलते हैं, जम्हाई लेते हैं या कुछ चबाते हैं, तब ये थोड़ी देर के लिए खुलती है. खुलने पर अंदर और बाहर की हवा का दबाव बराबर हो जाता है.
अब समझते हैं कि फ्लाइट में कान क्यों बंद हो जाते हैं? रअसल में जब विमान उड़ान भरता है तो तेज़ी से ऊंचाई पर चला जाता है, ऊंचाई बढ़ने पर बाहर की हवा पतली हो जाती है और उसका दबाव कम हो जाता है, लेकिन मध्य कान के अंदर की हवा का दबाव तुरंत नहीं बदलता. नली इतनी तेज़ी से काम नहीं कर पाती, इसलिए अंदर की हवा बाहर की तुलना में ज़्यादा दबाव वाली हो जाती है. ये ज़्यादा दबाव वाली हवा बाहर निकलने की कोशिश करती है, इससे कान का पर्दा थोड़ा बाहर की तरफ़ फूल जाता है, हमें कान में भारीपन या भरा-भरा सा महसूस होता है.

कई लोगों को होती है ये परेशानी-
ज़्यादातर लोगों में हवा आसानी से बाहर निकल जाती है, इसलिए उड़ान भरते समय तकलीफ़ कम होती है. असली समस्या विमान के उतरते समय होती है, जब विमान नीचे आने लगता है तो बाहर का दबाव तेज़ी से बढ़ने लगता है. अब मध्य कान के अंदर का दबाव बाहर से कम हो जाता है. बाहर की ज़्यादा दबाव वाली हवा को अंदर आने की ज़रूरत होती है ताकि दबाव बराबर हो सके, लेकिन यूस्टेशियन ट्यूब का ढांचा ऐसा है कि हवा को अंदर भेजना बाहर निकालने से ज़्यादा मुश्किल होता है. ट्यूब को ज़बरदस्ती खोलना पड़ता है, इसलिए उतरते समय कान बंद होना, दर्द होना और चुभन जैसा महसूस होना बहुत आम है. कई लोगों को ये दर्द काफी तेज़ भी लग सकता है. पहाड़ों पर गाड़ी से ऊपर जाने पर भी यही बात होती है. बस फर्क़ ये है कि गाड़ी में ऊंचाई धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए ज़्यादातर लोगों को बड़ी तकलीफ़ नहीं होती.

नली को समायोजित होने का समय मिल जाता है, लेकिन अगर कोई बहुत तेज़ रफ्तार से पहाड़ी सड़क पर चढ़े तो वही भारीपन या हल्का दर्द हो सकता है जो फ्लाइट में होता है. हर व्यक्ति की ये नली अलग तरह से काम करती है, जिन लोगों को सर्दी, जुकाम, साइनस या एलर्जी की वजह से नाक बंद रहती है, उनकी नली पहले से ही सूजी हुई या आंशिक रूप से बंद होती है. ऐसे लोगों को दबाव बराबर करना बहुत मुश्किल हो जाता है, उन्हें फ्लाइट में तेज़ दर्द हो सकता है. कभी-कभी कान के पर्दे पर बहुत ज़्यादा दबाव बनने से हल्का खून भी आ सकता है. इसे बैरोट्रॉमा कहते हैं, यानी दबाव से होने वाली चोट. डॉक्टर बताते हैं कि छोटे बच्चों में ये समस्या और भी ज़्यादा होती है, बच्चों की यूस्टेशियन ट्यूब वयस्कों की तुलना में ज़्यादा सीधी और पतली होती है, इसलिए वो आसानी से काम नहीं कर पाती. बच्चों को फ्लाइट में कान का दर्द अक्सर होता है.
कैसे बचें?
अब बात करते हैं इससे बचने के आसान तरीकों की. जम्हाई लेने और निगलने से नली खुलने वाली मांसपेशियां काम करती हैं, इसलिए फ्लाइट के दौरान च्यूइंग गम चबाते रहना बहुत फायदेमंद है. बार-बार निगलने से भी मदद मिलती है. पानी या जूस पीते रहना भी अच्छा रहता है.एक और कारगर तरीका है जिसे वलसलवा कहते हैं. नाक को दोनों उंगलियों से बंद कर लें, मुंह भी बंद रखें. फिर धीरे से हवा को नाक की तरफ़ फूंकने की कोशिश करें, इससे नाक और गले के पीछे दबाव बनता है. ये दबाव नली को खोल देता है और हवा अंदर चली जाती है. दबाव बराबर हो जाता है. ये तरीका बहुत सावधानी से करना चाहिए. बहुत ज़ोर से फूंकने से कान के पर्दे को नुकसान पहुंच सकता है, जिन लोगों को पहले से नाक बंद या सर्दी है, उन्हें फ्लाइट से आधा घंटा पहले नाक की सूजन कम करने वाली स्प्रे या दवा ले लेनी चाहिए. इससे नली आसानी से खुल पाती है. डॉक्टर की सलाह लेकर ही दवा लें. बच्चों के लिए उतरते समय पानी पिलाना या कोई मीठी चीज़ चुसवाना बहुत अच्छा रहता है, इससे बच्चा बार-बार निगलता है और नली खुलती रहती है.
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नमस्कार, मैं श्वेता बाजपेई, वर्तमान में India.com हिंदी में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हूं. हिंदी पत्रकारिता में लगभग 10 वर्षों के अनुभव के दौरान मैंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एंटरटेनमेंट … और पढ़ें
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