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सैन फ्रांसिस्को के एक सीईओ की सोशल मीडिया पोस्ट ने इन दिनों नई बहस छेड़ दी है. एक तरफ उन्होंने अपनी पत्नी की डेडिकेशन की तारीफ की, तो दूसरी तरफ लोगों ने इसे काम और निजी जिंदगी के संतुलन पर बड़ा सवाल बना दिया. मामला और भी चौंकाने वाला इसलिए है, क्योंकि यह घटना बच्चे के जन्म के कुछ ही घंटों बाद की है, जब आमतौर पर मां को आराम और देखभाल की जरूरत होती है, लेकिन यहां तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही थी. दरअसल, टैक्स और कंप्लायंस से जुड़ी कंपनी ओ’लैरी के सीईओ एरिक राचमेल ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट शेयर की थी.
इस पोस्ट में उन्होंने अपनी पत्नी सारा वौटीरास राचमेल की एक तस्वीर डाली. तस्वीर में सारा अस्पताल के बेड पर लेटी हुई थीं, उनके पास उनका नवजात बच्चा था, और उनके हाथ में फोन था. एरिक ने बताया कि यह तस्वीर उनके बेटे के जन्म के कुछ ही घंटों बाद की है.
पत्नी की तारीफ के लिए सीईओ की आलोचना
एरिक राचमेल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद, जब सारा अस्पताल में आराम कर रही थीं, उसी समय उन्होंने एक क्लाइंट का फोन उठाया और काम से जुड़ी बात की. उन्होंने यह भी बताया कि कुछ हफ्तों बाद सारा ने वह केस जीत लिया, जिस पर वह उस समय काम कर रही थीं. एरिक ने अपनी पत्नी की तारीफ करते हुए उन्हें देश की सबसे तेज और मेहनती बीमा वकीलों में से एक बताया. साथ ही उन्होंने उन सभी महिलाओं की भी सराहना की, जो चुपचाप अपने काम और परिवार की जिम्मेदारियां एक साथ संभालती हैं.
लोगों ने मेहनत और समर्पण की तारीफ की
शुरुआत में इस पोस्ट को कुछ लोगों ने सराहा और सारा की मेहनत और काम के प्रति समर्पण की तारीफ की. लोगों ने कहा कि यह दिखाता है कि कुछ लोग अपने काम को कितना गंभीरता से लेते हैं और उसे कितना महत्व देते हैं. लेकिन जैसे-जैसे यह पोस्ट ज्यादा लोगों तक पहुंची, वैसे-वैसे इस पर विवाद भी बढ़ने लगा. यह पोस्ट तब और ज्यादा वायरल हो गई जब इसे X पर शेयर किया गया. वहां कई लोगों ने इस घटना को पागलपन बताया. उनका कहना था कि एक महिला जिसने अभी-अभी बच्चे को जन्म दिया है, उसे आराम करने की जरूरत होती है, न कि काम करने की. कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि यह एक तरह से गलत उदाहरण पेश करता है, क्योंकि इससे कंपनियों और बॉस को यह उम्मीद हो सकती है कि कर्मचारी हर स्थिति में काम करें, चाहे उनकी निजी हालत कैसी भी हो.
कई लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि क्या यह सच में सराहनीय है या फिर यह काम के दबाव और गलत वर्क कल्चर को दिखाता है. कुछ यूजर्स का कहना था कि इस तरह की सोच से काम और पर्सनल लाइफ के बीच की सीमा खत्म हो जाती है, जो लंबे समय में लोगों के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति के लिए ठीक नहीं है.
तारीफ के साथ सुनना पड़ा आलोचना
हालांकि, कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने इस आलोचना का विरोध किया. उनका कहना था कि हर व्यक्ति की अपनी पसंद होती है. अगर कोई अपने काम से प्यार करता है और उसे काम करने में खुशी मिलती है, तो इसमें गलत क्या है? एक यूजर ने लिखा कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जो एक साथ कई जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं और उन्हें इससे परेशानी नहीं होती. वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि किसी अच्छे क्लाइंट से बात करना कभी-कभी दोस्त से बात करने जैसा होता है, इसलिए इसे इतना बड़ा मुद्दा नहीं बनाना चाहिए. बहस बढ़ने के बाद खुद एरिक राचमेल ने इस मामले पर सफाई दी. उन्होंने लिंक्डइन पर एक और पोस्ट लिखकर कहा कि उनकी पुरानी पोस्ट को गलत तरीके से समझा जा रहा है. उन्होंने उस व्यक्ति को भी टैग किया जिसने उनकी पोस्ट की आलोचना की थी और कहा कि वह इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा करना चाहते हैं.
एरिक ने कहा कि हर किसी के काम करने का तरीका अलग होता है. कुछ लोग ज्यादा मेहनत करके आगे बढ़ना चाहते हैं, जबकि कुछ लोग कम काम करके अपनी जिंदगी में संतुलन बनाए रखना पसंद करते हैं. उन्होंने यह भी माना कि ज्यादा काम करना हमेशा सही नहीं होता और इसका असर स्वास्थ्य और निजी जिंदगी पर पड़ सकता है. उन्होंने साफ कहा कि अगर कोई अपने काम से प्यार करता है, तो उसे काम करने में खुशी मिलती है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर कोई ऐसा ही करें. हर व्यक्ति को अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार फैसला लेने का हक है. कोई ज्यादा काम करके सफलता पाना चाहता है, तो कोई अपनी जिंदगी को संतुलित तरीके से जीना चाहता है.
इस पूरे मामले ने एक बार फिर काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है. आज के समय में, खासकर बड़े शहरों और प्रोफेशनल लाइफ में, लोग अपने करियर को लेकर काफी गंभीर रहते हैं. कई बार वे अपने काम को इतना महत्व दे देते हैं कि उनकी निजी जिंदगी पीछे छूट जाती है. वहीं दूसरी तरफ, अब धीरे-धीरे यह समझ भी बढ़ रही है कि सिर्फ काम ही सब कुछ नहीं है. परिवार, स्वास्थ्य और मानसिक शांति भी उतनी ही जरूरी है. खासकर ऐसे समय में, जब एक महिला को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के आराम की जरूरत होती है, तब काम का दबाव सही नहीं माना जाता. इस घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर सही क्या है. काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहना या फिर अपनी निजी जिंदगी को प्राथमिकता देना?
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