तंजानिया के गोम्बे में जेन गुडॉल नाम के एक व्यक्ति ने 1960 की किसी दोपहरी में वनमानुष को अजीब हरकतें करते देखा। उस वनमानुष ने एक टहनी से पत्तियां हटाकर टहनी को दीमकों की बांबी में डाला और बाहर निकाला, तो वह टहनी दीमकों से लिपटी पड़ी थी। जेन ने अपने गुरु लुई लीकी को इस बारे में लिखा। कहा जाता है, लीकी ने जवाब दिया कि अब हमें या तो ‘औजार’ की परिभाषा बदलनी होगी या फिर वनमानुषों को इंसान मानना होगा। माना जाता रहा है कि औजार बनाना ही वह खूबी है, जो हमें बाकी सभी जीवों से अलग करती है। उस दोपहर यह धारणा ध्वस्त हो गई।
आश्चर्य होता है कि इंसानों और जानवरों के बीच की विभाजन रेखा इतनी पक्की कैसे बन गई? 20वीं सदी में जानवरों के दिमाग पर अध्ययन की शुरुआत इस सोच से हुई थी कि अगर किसी व्यवहार को समझाने के लिए कोई सरल कारण मौजूद है, तो उसके लिए सोच को जटिल बनाने की जरूरत नहीं है। शोधकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाता था कि जानवर केवल बाहरी माहौल के जवाब में व्यवहार करते हैं। फ्रांस डी वाल ने इस प्रवृत्ति को ‘एन्थ्रोपोडिनियल’ नाम दिया। यानी, दूसरे जानवरों में उन खूबियों को देखते ही इनकार कर देना, जिनको हम खुद में महसूस करते हैं। वाल ने इसे गलत साबित किया। उन्होंने प्रयोग के लिए कैपुचिन बंदरों को चुना। इसमें दो बंदरों को एक जैसा छोटा काम दिया गया। एक को इनाम के तौर पर अंगूर दिया, जबकि दूसरे को खीरा। जिस बंदर को खीरा मिला, उसने उसे देने वाले पर ही वापस फेंक दिया। इससे साफ पता चलता है कि ‘निष्पक्षता’ की समझ जानवरों में भी है। अफ्रीका के सवाना हाथियों पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों ने बताया कि ये जानवर एक-दूसरे को अलग-अलग नामों से बुलाते हैं। एक हाथी सिर्फ उसी पुकार पर प्रतिक्रिया देता है, जो उसके लिए होती है, न कि उस पर, जो किसी और के लिए हो। बस हमारे पास पहले इतना धैर्य और ऐसे उपकरण नहीं थे, जिनसे हम यह समझ पाते कि वे एक-दूसरे को नाम से बुला रहे हैं।
इसमें हम मनुष्यों को सीखने के लिए कई चीजें हैं। एक तो यह कि हम जितना सोचते हैं, जानवर उससे कहीं ज्यादा समझदार हैं। दूसरे, इसका बड़ा सबक यह है कि हमारी पुरानी आम धारणा कितनी गलत थी और वह गलत धारणा भी कितनी स्वाभाविक लग रही थी! पाठ्य-पुस्तकों में पूरे भरोसे के साथ यह पढ़ाया जाता रहा कि जानवरों में नैतिकता नहीं होती, सिर्फ इंसान ही औजार बनाते हैं और दुनिया वही है, जो हमारी पांच इंद्रियां हमें बताती हैं। पढ़े-लिखे लोग भी इन बातों को सच मानते थे, लेकिन जैसे-जैसे ज्ञान बढ़ता गया, ये सभी धारणाएं टूटती गईं। यही वजह है कि हमें खुले दिमाग से और व्यापक रूप से पढ़ना-सीखना चाहिए।
खुले दिमाग से और व्यापक रूप से पढ़ने-सीखने की आदत की शुरुआत बचपन से ही होनी चाहिए। इसमें स्कूली शिक्षा बड़ी कारगर है। सीखने की सामग्री तो हमेशा अधूरी रहेगी। जो लोग शिक्षण संस्थान चलाते हैं या नीतियां बनाते हैं, उनमें अपने ज्ञान को लेकर अत्यधिक आत्मविश्वास होना बहुत खतरनाक हो सकता है। मैंने ऐसा इतनी बार होते देखा है कि गिनना भी मुश्किल है। जो चीज बनी रह सकती है, वह है सीखते रहने का नजरिया और क्षमता। स्कूल इसे विकसित कर सकते हैं।
आइए, विनम्रता के साथ अपनी बात समाप्त करें। अगर हम वनमानुषों, बंदरों और हाथियों की मानसिक क्षमताओं को समझने में इतनी बड़ी गलती कर सकते हैं, तो हम उन लोगों के जीवन के बारे में कैसे पूरी तरह आश्वस्त हो सकते हैं, जो हमसे अलग हैं? जैसे गरीबी में जीवन-यापन कर रहे लोग, अनजान लोग या वे लोग, जिनकी भाषा और आदतें हमसे बिल्कुल अलग हैं। इंसानी दुनिया में दूसरों की क्षमताओं, उनकी अहमियत को नकारने का एक बहुत बुरा इतिहास रहा है। विनम्र होने का मतलब यह नहीं है कि विचार शून्य बनें। इसका सीधा सा मतलब यह याद रखना है कि हमारी समझ का दायरा सीमित है और हो सकता है कि दूसरे लोग कुछ ऐसा देख पा रहे हों, जिसे हम नहीं देख सकते। अगर दुनिया ऐसे लोगों से बने, जिनमें इस तरह की विनम्रता हो, तो वह अधिक मानवीय बन जाएगी।
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। करीब एक सदी से यह अखबार हिंदी भाषी पाठकों की पसंद बना हुआ है। देश-दुनिया की Hindi News को पढ़ने के लिए यह अखबार लगातार पाठकों की पसंद बना हुआ है। इसके अतिरिक्त समकालीन मुद्दों पर त्वरित टिप्पणी, विद्वानों के विचार और साहित्यिक सामग्री को भी लोग पसंद करते रहे हैं। यहां आप ग्लोबल से लोकल तक के सभी समाचार एक ही स्थान पर पा सकते हैं। हिन्दुस्तान अखबार आपको उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, झारखंड, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों की खबरें प्रदान करता है। दक्षिण भारत के राज्यों की खबरें भी आप यहां पाते हैं।
इसके अतिरिक्त मनोरंजन, बिजनेस, राशिफल, करियर, ऑटो, गैजेट्स और प्रशासन से जुड़ी खबरें भी यहां आप पढ़ सकते हैं। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।
आरएसएस विज्ञापन र॓टहमार॓ साथ कामकरेंहमारे बारे मेंसंपर्क करेंगोपनीयतासाइट जानकारी
Advertise with usAbout usCareers Privacy Contact usSitemapCode Of Ethics
Partner sites: Hindustan TimesMintHT TechShineHT Auto HealthshotsHT SmartcastFAB Play