'बात पाकिस्तान के लोगों की थी, देश की नहीं…', मोहन भागवत ने होसबाले के बयान का किया बचाव – AajTak

पाकिस्तान से बातचीत के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का एक बयान सामने आया है. संघ प्रमुख ने साफ कहा कि हम हिटलर जैसे नहीं हैं, जो बातचीत के सारे रास्ते बंद कर दें. उन्होंने पाकिस्तान से बातचीत का रास्ता खुला रखने को लेकर RSS नेता दत्तात्रेय होसबाले के बयान का बचाव किया. भागवत ने साफ किया कि होसबाले की बात पाकिस्तान देश या वहां की सरकार से नहीं, बल्कि वहां के आम लोगों से संवाद बनाए रखने को लेकर थी. इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान को लेकर संघ की कोई अलग विदेश नीति नहीं है और संगठन पूरी तरह भारत सरकार के रुख के साथ है.
दरअसल, केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में RSS के शताब्दी कार्यक्रम के दौरान बातचीत में मोहन भागवत से दत्तात्रेय होसबाले के उस बयान पर सवाल पूछा गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होना चाहिए. इस पर भागवत ने कहा ‘होसबाले की बात को सही संदर्भ में समझने की जरूरत है, क्योंकि उनका इशारा पाकिस्तान सरकार नहीं, वहां के लोगों की तरफ था’. 
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, भागवत ने कहा कि पाकिस्तान में आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो भारत के बंटवारे को गलत मानते हैं. वे दो-राष्ट्र सिद्धांत के खिलाफ सोच रखते हैं. उनके मुताबिक, पड़ोसी देश में ऐसे लोगों की एक पूरी धारा है, जो मानती है कि साथ रहना कहीं बेहतर था. उन्होंने यह भी बताया कि वहां के कई पत्रकार RSS के काम की तारीफ करते हैं.
हम हिटलर जैसे नहीं: मोहन भागवत
इस दौरान RSS प्रमुख ने कहा कि अगर भविष्य में कभी पाकिस्तान कमजोर पड़ता है, तब वहां के लोगों को साथ लेकर चलने या उन्हें शांति से जीने का मौका देने के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखना जरूरी होगा. इसी दौरान उन्होंने कहा, ‘हम हिटलर जैसे नहीं हैं. यह हमारी प्रकृति या हमारा रास्ता नहीं है. अन्याय, अत्याचार को खत्म करना बेहद जरूरी है, लेकिन जो अच्छा है उसे बचाकर भी रखना चाहिए’. हालांकि, भागवत ने यह भी साफ किया कि किसी भी देश को लेकर RSS की अपनी अलग विदेश नीति नहीं होती. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के मामले में संघ वही नीति मानेगा, जो भारत सरकार तय करेगी.
दरअसल, मई में पीटीआई (PTI) को दिए एक इंटरव्यू में दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि देश की सुरक्षा, सम्मान सबसे पहले है. इसके साथ ही हमें बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए. उन्होंने यह बात पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद को लगातार बढ़ावा दिए जाने के सवाल पर कही थी. अब मोहन भागवत के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक नई चर्चा शुरू हो गई है.

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