बिजली विभाग का लेखकार 7 करोड़ के गबन में बर्खास्त – Hindustan Hindi News

वाराणसी। पूर्वांचल डिस्कॉम के एमडी शंभु कुमार ने लगभग सात करोड़ रुपये गबन करने वाले लेखाकार (एकाउंटेंट) केशवेंद्र द्विवेदी को मंगलवार को बर्खास्त कर दिया। साथ ही गबन की शेष धनराशि तीन करोड़ 76 लाख 65 हजार रुपये की रिकवरी के निर्देश दिए हैं। तीन करोड़ 13 लाख 91 लाख रुपये की आरोपी से वसूली पहले ही हो चुकी है। गोरखपुर के तत्कालीन मुख्य अभियंता आशुतोष श्रीवास्तव, उप महाप्रबंधक (लेखा) संतोष कुमार मिश्रा तथा वरिष्ठ लेखाकार नरेंद्र कुमार पांडेय की कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर एमडी ने अब तक की यह सबसे बड़ी कार्रवाई की है। लगभग डेढ़ साल बाद हुए इस एक्शन से विभाग में हड़कंप मच गया है। आरोपी लेखाकार मूलरूप से प्रयागराज का रहने वाला है। मामला उजागर होने के बाद ‘हिन्दुस्तान’ ने इस मुद्दे को लगातार प्रमुखता से उठाया था। कई दिनों तक समाचारीय शृंखला ‘डिस्कॉम का लगा दिया काम’ चर्चा में रही।

राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत 27 मार्च 2004 को कार्यदायी संस्था मेसर्स एनसीसी लिमिटेड (हैदराबाद) को छह करोड़ 90 लाख 57 हजार रुपये का भुगतान किया जाना था, लेकिन लेखाकार केशवेंद्र ने फर्जीवाड़ा कर पूरी राशि अपने खाते में ट्रांसफर करा ली थी। लेखाकार के खाते में एक साथ इतनी बड़ी रकम आने पर बैंक अधिकारियों के कान खड़े हो गए। उन्होंने पूर्वांचल डिस्कॉम प्रबंधन को सूचना दी। इसी बीच कार्यदायी संस्था ने भी खाते में पैसा नहीं आने की शिकायत की। तब तत्कालीन निदेशक (वित्त) संतोष जड़िया ने जांच की तो पता चला कि लेखाकार ने लगभग सात करोड़ का गबन कर लिया है। निदेशक ने इसकी सूचना एमडी को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एमडी ने लेखाकार को तत्काल निलंबित कर दिया। उससे पूछताछ की गई। उसके खिलाफ चितईपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।

विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लेखाकार से पूछताछ कर रहे थे। इसी बीच वह अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर फरार हो गया था। लगभग तीन महीने बाद पुलिस को चकमा देकर केशवेंद्र ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था। वह लगभग आठ महीने जेल में रहा। बाद में उसे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद से वह लापता था। उसने दोबारा संबंद्ध खंड में ज्वाइनिंग नहीं दी।

जांच में पता चला कि लेखाकार ने गबन के रुपये अपनी पत्नी और कई रिश्तेदारों के खाते में ट्रांसफर किए थे। लेखाकार की पत्नी भी बिजली विभाग में इसी पद पर है। बताया जाता है कि लेखाकार ने सबसे अधिक रुपये अपनी पत्नी के खाते में ही भेजे थे।

लेखाकार ने गबन के रुपयों से शहर के कई पॉश इलाके में डुप्लेक्स खरीद लिये थे। कई फ्लैट अपनी पत्नी के नाम लिया था। प्रयागराज में भी संपत्ति बना ली थी। गबन का मामला सामने आने के बाद हुई पड़ताल में पता चला कि आरोपी लेखाकार लग्जरी लाइफ जीता था। महंगी घड़ियां पहनता था। उसके मोबाइल और लैपटॉप की कीमत लाखों में थी। उसने एक लग्जरी कार भी खरीदी थी।

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