वाराणसी। क्या आप जानते हैं कि दुनिया में पेड़-पौधों की भी ऐसी कई प्रजातियां हैं, जिनपर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। अगर हां तो यह भी जानिए कि इनमें से पांच संकटग्रस्त प्रजातियां बीएचयू परिसर में सुरक्षित की जा रही हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की संकटग्रस्त सूची में शामिल इन पांच किस्मों के पेड़-पौधों का बीएचयू के ‘ट्री सेंसस’ के दौरान पता चला। अब परिसर में इन्हें सहेजने और इनकी संख्या बढ़ाने की दिशा में खास प्रयास किए जा रहे हैं। 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर बीएचयू ने वृक्ष गणना के आंकड़े जारी किए। परिसर में 50 समूहों और 158 प्रजातियों के कुल 50,225 वृक्षों की गिनती हुई। इसके साथ ही जिओटैगिंग के जरिए इनका स्थान भी चिह्नित किया गया। इस गणना के दौरान ही पांच ऐसी प्रजातियां भी सामने आईं जो दुनिया की संकटग्रस्त वनस्पति की सूची में शामिल हैं और इन्हें बचाने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इस सूची में चंदन और लाल चंदन के पेड़ भी शामिल हैं। बीते वर्षों में बीएचयू परिसर से इन पेड़ों की चोरी भी काफी चर्चा में रही थी, जिसकी वन विभाग और पुलिस जांच भी कर रही है। बीएचयू परिसर में चंदन के कुल पांच पेड़ और दो पौधे अभी सुरक्षित हैं। जबकि लाल चंदन के 11 पेड़ और पांच पौधों की देखरेख पूरी सतर्कता से की जा रही है。
इस सूची में एक पेड़ चीनी मूल का भी है। गिंको बाइलोबा या मैडेनिहायर नामक यह पेड़ भारतीय उपमहाद्वीप में उगता ही नहीं है, मगर बीएचयू में इसका एकमात्र पेड़ सुरक्षित है और फल-फूल रहा है। आईयूसीएन की संकटग्रस्त और असुरक्षित पांच हजार पेड़ों की सूची में यह संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। गिंको अवसाद और कैंसर दूर करने, माइग्रेन कम करने और आंखों की रोशनी बढ़ाने सहित कई औषधीय गुणों से भरा हुआ है। इसके अलावा रोहिड़ा या रोहितका नामक मरुस्थलीय प्रजाति के 17 पेड़ भी बीएचयू में सुरक्षित हैं। रोहिड़ा की लकड़ी टिकाऊ मानी जाती है। अपने औषधीय गुणों और सुंदर फूल के कारण यह राजस्थान का राज्य पुष्प भी घोषित है।
आईयूसीएन की सूची में एगल मारमेलोज यानी बेल को भी खतरे वाली सूची में रखा गया है। भारतीयों, पूर्वी उत्तर प्रदेश और खासतौर पर काशी के लोगों को यह बात हैरान कर सकती है, मगर यह सच है। बेल गर्मियों में राहत पहुंचाता है। साथ ही बेल के तीन युग्म वाले पत्ते (बिल्वपत्र) महादेव को अर्पित किये जाते हैं। हालांकि बीएचयू परिसर में अभी बेल के 544 पेड़ और 116 पौधे सुरक्षित हैं।
बीएचयू में वृक्ष गणना के दौरान आईयूसीएन की संकटग्रस्त सूची में शामिल पांच प्रजातियों को चिह्नित किया गया है। इन पौधों की देखरेख और सुरक्षा के विशेष इंतजाम कर दिए गए हैं। साथ ही इनकी संख्या बढ़ाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं।
डॉ. अमिय सामल, गणना प्रभारी बीएचयू।
शॉर्ट बायो : अभिषेक त्रिपाठी पिछले 19 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय है। वर्तमान में ‘हिन्दुस्तान’ के साथ वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर जुड़े हैं। वाराणसी संस्करण के लिए वह शिक्षा जगत और राजनीतिक दल में कांग्रेस बीट कवर करते हैं।
परिचय एवं अनुभव
अभिषेक त्रिपाठी वाराणसी में इससे पहले भी विभिन्न पदों पर जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। शिक्षा और राजनीतिक बीट के रिपोर्टर के तौर पर 2021 से इन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। लगभग पांच वर्ष से इस भूमिका में इन्होंने विशिष्ट अभियान, असर और ऑफबीट खबरें भी शामिल हैं।
करियर का सफर (प्रिंट से डिजिटल)
अभिषेक ने अपने करियर की शुरुआत 2007 में अमर उजाला जैसे प्रमुख अखबार से की। यहां पहले डेस्क और फिर रिपोर्टिंग में काम किया। रिपोर्टिंग में मेडिकल, रेलवे और अपराध जैसी बीट पर कााम किया। यहां से 2011 में हिन्दुस्तान वाराणसी की सेवाएं शुरू की। अगले छह वर्ष तक प्रशासन और क्राइम रिपोर्टिंग में कई प्रतिमान स्थापित किए। 2016 में दैनिक भास्कर भोपाल से जुड़े और यहां लोकल रिपोर्टिंग से इतर डिजिटल और देश-दुनिया की खबरों की समझ विकसित की। 2020 तक दैनिक जागरण के अलावा विभिन्न डिजिटल और प्रिंट माध्यमों से जुड़े रहने के बाद 2021 में दोबारा हिन्दुस्तान वाराणसी में शिक्षा बीट पर वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम शुरू किया।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग
12वीं तक विज्ञान, इसके बाद राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ने अभिषेक को जीवन की सभी धाराओं का अनुभव दिया। इसका असर पत्रकारिता में विभिन्न क्षेत्रों में रिपोर्टिंग, लेखन और प्रस्तुतिकरण पर दिखा। अभिषेक राजनीतिक, सांस्कृतिक और मानवीय एंगल वाली खबरों के लेखन में सिद्धहस्त हैं। प्रशासन और अपराध जगत की खबरों पर भी इनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। वाराणसी की भौगोलिक समझ और बड़ा सामाजिक दायरा भी इनकी रिपोर्टिंग में काफी मददगार साबित होता रहा है। 2013 से राजनीतिक, प्रशासनिक और विकास के मोर्चे पर बदलते बनारस के हर पहलू को इन्होंने गहराई से समझा और प्रस्तुत किया है। संप्रति शिक्षा जगत में प्री-प्राइमरी से लेकर आईआईटी की तकनीकी दक्षता वाली खबरों को भी लिख सकने में यह सक्षम रिपोर्टर हैं।
एंटरटेनमेंट और विजन
अभिषेक फिल्म, ट्रेंड्स, यूथ और लाइफस्टाइल विषयों पर भी बेहतरीन पकड़ रखते हैं। सेलिब्रिटी एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के लिए भी वह प्रसिद्ध हैं। बीते वर्षों में अपने अखबार के लिए इन्होंने कई विशेष कवरेज, इंटरव्यू, सीरीज प्लान किए हैं। अभिषेक का मानना है कि पत्रकारिता में विश्वसनीयता और नयापन जरूरी है। इसके साथ ही खबरों का लेखन और प्रस्तुतीकरण सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। मुद्दों की समझ और उनकी सटीक प्रस्तुति पाठक को समाचार पर ठहरने और बाद में उसकी चर्चा करने पर विवश करती है।
विशेषज्ञता
प्रशासनिक और राजनीतिक कवरेज
अपराध और मानवीय एंगल के समाचारों में सिद्धहस्तता
फिल्म स्टार, साहित्यकार और राजनीतिज्ञों के विशेष साक्षात्कार
शिक्षा, धर्म संस्कृति और ऑफबीट खबरें
डेस्क पर खबरों का संपादन और पेजमेकिंग
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