बिहार में पीके फैक्टर का कितना प्रभाव, किसकी बनेगी सरकार? जानिए चुनाव विश्लेषकों के अनुमान – AajTak

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इंडिया टु़डे ग्रुप के आयोजन इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई के पहले दिन बिहार चुनाव पर भी चर्चा हुई. बिहार चुनाव से संबंधित सेशन में एसेंडिया सट्रैटेजीज के मैनेजिंग पार्टनर और वोटवाइब के फाउंडर पार्टनर अमिताभ तिवारी, सीवोटर फाउंडेशन के संस्थापक यशवंत देशमुख और एक्सिस माई इंडिया के चेयरमैन प्रदीप गुप्ता शामिल हुए. यह तीनों चुनाव विश्लेषक इस बात पर एकमत नजर आए कि आज की डेट में चुनाव हुए तो एनडीए सरकार बनाएगा.
यशवंत देशमुख ने जातीय राजनीति और समीकरणों के सवाल पर कहा कि यूपी में भी मुस्लिम-यादव समीकरण वैसे ही रहा है, जैसा आरजेडी का बिहार में है. लेकिन अखिलेश ने पीडीए प्लस का प्रयोग किया और वह सफल रहे. उन्होंने कहा कि यह देखना होगा कि तेजस्वी यादव बिहार में एमवाई प्लस का प्रयोग कितना कर पाते हैं. यशवंत देशमुख ने कहा कि नीतीश कुमार के बिना कोई बिहार क्यों नहीं जीत पाया, क्योंकि उनके पास अपना वोटबैंक है, जिसे वह पेंडुलम की तरह इधर या उधर ले जाने में सक्षम हैं और वह प्लस होता है.
उन्होंने यह भी कहा कि बिहार से अधिक उलझी जातीय राजनीति तमिलनाडु में है, लेकिन उसकी चर्चा नहीं होती. यशवंत देशमुख ने कहा कि आरजेडी को एमवाई प्लस करना होगा, तभी वह बिहार जीत पाएगी. इसमें यूथ, महिला, मिडिल क्लास और अन्य जातियां हो सकती हैं, जैसा अखिलेश यादव ने यूपी में किया. उन्होंने पीके फैक्टर को लेकर कहा कि सीएम के लिए उन्हें (पीके को) पसंद करने वालों में युवा अधिक हैं. प्रशांत अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता को वोट में कितना भुना पाते हैं, यह देखना होगा, लेकिन बिहार से बाहर रहने वाले लोगों के बीच लोकप्रियता रखते हैं.
यशवंत देशमुख ने एसआईआर और वोट चोरी को लेकर महागठबंधन की यात्रा से संबंधित सवाल पर कहा कि भारत जोड़ो यात्रा का फायदा कांग्रेस को मिला. उन्होंने कहा कि बिहार में स्विंग वोट पर सबकी नजरें हैं और देखना होगा कि यह वोटर इस बार किसके साथ जाता है. यशवंत देशमुख ने एनडीए को 175, महागठबंधन को 50 सीटें मिलने का अनुमान जताया. एक सिनोरिया में उन्होंने पिछले चुनाव नतीजों जैसे ही परिणाम की उम्मीद जताई.
तेजस्वी यादव और पीके में बंट रहे युवा मतदाता- अमिताभ तिवारी
अमिताभ तिवारी ने कहा कि यह ट्रिकी स्टेट है. यहां कई छोटी छोटी पार्टियां भी अपना वोटबैंक रखती हैं. यहां केवल तीन बड़ी पार्टियां ही नहीं हैं. चुनाव तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि पिछले तीन चुनावों में 105 सीटों पर एक ही जाति के उम्मीदवार जीते हैं, इसमें 113 ऐसी सीटें भी प्लस करनी होंगी, जहां तीन में से दो बार एक ही जाति को जीत मिली है. अमिताभ तिवारी ने कहा कि युवा एनडीए से छिटककर तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर के बीच बंटता नजर आ रहा है. प्रशांत किशोर एजुकेशन को मुद्दा बनाकर तेजस्वी के मुकाबले युवा मतदाताओं के बीच बढ़त लेते नजर आ रहे हैं.
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उन्होंने कहा कि अजीम प्रेमजी ने कहा था कि भारत में 25 फीसदी लोग अपने जाति के उम्मीदवार को वोट देते हैं, बिहार में ऐसे मतदाताओं की तादाद 57 फीसदी है. अमिताभ तिवारी ने कहा कि जहां सीएम के लिए लोकप्रियता की बात है, बिहार में कितने लोग फेस देखकर वोट करते हैं. बिहार में हाईपरलोकल चुनाव होता है. उन्होंने कहा कि अगर आज की तारीख में चुनाव होते हैं तो करीबी फाइट होगी, लेकिन एनडीए सरकार बना ले जाएगा. उन्होंने एनडीए को 135 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया.
युवा-महिला भी किसी जाति से हैं- प्रदीप गुप्ता
प्रदीप गुप्ता ने कहा कि चुनाव नतीजे का अनुमान लगाने का मतलब मुख्य रूप से यही होता है कि कौन सरकार बनाएगा. हमने 2024 में एनडीए की जीत का अनुमान लगाया था. जाति और महिला फैक्टर को लेकर सवाल पर उन्होंने कहा कि यहां जाति अधिक प्रासंगिक है. बिहार के सभी छह रीजन में एम और वाई (मुस्लिम-यादव) 27 फीसदी के आसपास हैं. यह वोटबैंक आरजेडी के पक्ष में एकजुट रहा है. प्रदीप गुप्ता ने पीके फैक्टर को लेकर सवाल पर कहा कि जीवन में आप कुछ भी शुरू करते हैं, ग्रेजुएट होने के लिए 15 साल लगते हैं.
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उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर पहली बार बिहार चुनाव लड़ रहे हैं. युवा और महिला फैक्टर की हम बात कर रहे हैं, ये भी किसी जाति से आते हैं. प्रदीप गुप्ता ने नीतीश कुमार को लेकर सवाल पर कहा कि एनडीए के वोट का एक बड़ा हिस्सा यह मानकर चल रहा है कि इस बार तो बीजेपी का सीएम बन जाएगा. यह बड़ा फैक्टर होने जा रहा है. उन्होंने कहा कि एंटी इनकम्बेंसी की स्थिति में किधर स्वीच करें, इस पर तीन विकल्प हैं- बीजेपी, आरजे़डी और प्रशांत किशोर. जनता किसकी ओर जाती है, यह देखना रोचक होगा. प्रदीप गुप्ता ने एक सिनोरियो में एनडीए, दूसरे में महागठबंधन और तीसरे में जन सुराज की जीत का अनुमान व्यक्त किया.

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