बिहार को अब केवल ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपराओं की भूमि के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि यह राज्य अब धीरे-धीरे फिल्म निर्माण का उभरता केंद्र बन रहा है। पिछले कुछ दशकों के बाद एक बार फिर से राज्य में हिंदी, मैथिली, भोजपुरी, मगही और अंग्
“बिहान“ के फिल्मांकन की अनुमति
उग्रतारा फिल्म्स की भोजपुरी सिनेमा “संघतिया” साल 2022 में बनी
इसके अतिरिक्त इनसाइट इंडिया की “बिहान”, स्कामाखी एंटरटेनमेंट की “अनमोल घड़ी”, श्री गणेशाय नमः एंटरटेनमेंट की भोजपुरी फिल्म “बंटवारा”, यशी फिल्म्स की हिंदी फिल्म “अंबे है मेरी मां”, फर्स्ट टेक क्रिएशन की भोजपुरी फिल्म “बेटी बनल विजेता”, आरएसवाई फिल्म्स की “अखंड भेदम”, मिश्रा फिल्म्स प्रोडक्शन की “बिहारी भौजी” और आभ्या आराध्या फिल्म्स की भोजपुरी फिल्म “वृहस्पति व्रत कथा” को भी राज्य सरकार से फिल्मांकन की अनुमति मिली है।
सोनू सूद और पंकज त्रिपाठी समेत कई बॉलीवुड अभिनेताओं ने बिहार में शूटिंग की है। बिहान और बिसाही जैसी फिल्मों की शूटिंग पूरी हो चुकी है। इनमें कई रिलीज भी हुई। अबतक की स्वीकृत परियोजनाओं में 2022 में बनी उग्रतारा फिल्म्स की भोजपुरी सिनेमा “संघतिया”, मॉरिशस की एवी आर्ट्स लिमिटेड द्वारा निर्मित भोजपुरी-अंग्रेजी फिल्म “द लॉन्ग जर्नी होम”, प्रबुद्ध एंटरटेनमेंट का हिंदी वृत्तचित्र “बिहार का जलवा”, पूरब टॉकीज की भोजपुरी फिल्म “सुहागिन के सेनुर”, ऐम एपेक्स इंटरनेशनल की हिंदी वेब शृंखला “लाइफ लीला”, विश्वमूर्ति फिल्म प्रोडक्शन की भोजपुरी फिल्में “जिंदगी बितवनी तोहरे प्यार में” (2023), “घर का बंटवारा”, “नारी”, एपीफेनी की “रजनी की बारात”, जार पिक्चर्स की हिंदी फिल्म “ओह माय डॉग”, दैवार्या मीडिया एंड एंटरटेनमेंट की हिंदी फिल्में “टिया”, “छठ”, मगही फिल्म “सुगनी”, तथा हिंदी फिल्म “पेन ब्रश” प्रमुख हैं।
फिल्म नीति का असर
सोनू सूद और पंकज त्रिपाठी समेत बॉलीवुड के कई अभिनेताओं ने राज्य में शूटिंग की
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