बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के अंतिम परिणाम जारी होते ही कोल्हान प्रमंडल के होनहारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। परीक्षा में क्षेत्र के प्रतिभावान युवाओं ने शानदार सफलता हासिल कर पूरे कोल्हान का नाम रोशन किया। सफलता की इस सूची में जमशेदपुर के न्यू केबल टाउन निवासी अंकित शर्मा का नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आया है, जिन्होंने परीक्षा में 218वां रैंक हासिल किया है। अंकित शर्मा का चयन अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) के पद पर हुआ है, जिससे उनके परिवार और क्षेत्र में गौरव का माहौल है। अंकित के लिए यह मुकाम हासिल करना संघर्षपूर्ण रहा, क्योंकि हाल ही में उनके पिता स्वर्गीय परमेश्वर शर्मा का निधन हो गया था, जो पेशे से एक शिक्षक थे।
पिता के आकस्मिक निधन के बाद उपजे गहरे मानसिक और भावनात्मक संकट के बीच एकाग्रता बनाए रखकर परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना अंकित के लिए बड़ी चुनौती थी, जिसे उन्होंने दृढ़ इच्छाशक्ति से पार कर लिया। अंकित की माता इंदु देवी कुशल गृहिणी हैं, जिन्होंने इस कठिन समय में लगातार संबल दिया। अंकित की प्रारंभिक शिक्षा शहर के मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल से हुई है, जिसके बाद उन्होंने ट्रिपल आईटी से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। मेधावी होने के साथ अंकित सामाजिक रूप से भी सक्रिय हैं और खुद ऑनलाइन माध्यम से अन्य विद्यार्थियों को बीपीएससी की परीक्षा के लिए मार्गदर्शन व कोचिंग प्रदान करते हैं। सफलता की इसी कड़ी में चाईबासा की बेटी तृप्ति कुमारी ने भी 70वीं बीपीएससी की परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता दर्ज कराई है। तृप्ति कुमारी का चयन सहायक योजना पदाधिकारी सह सहायक निदेशक के महत्वपूर्ण पद पर हुआ है। घोषित परिणाम में तृप्ति ने पूरे राज्य में ओवरऑल 40वां रैंक प्राप्त किया, जबकि चयनित श्रेणी में उन्होंने शीर्ष स्थान यानी पहला रैंक हासिल कर मेधा का लोहा मनवाया है। तृप्ति ने सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और मामा को दिया है। उन्होंने बताया कि पारिवारिक सहयोग, निरंतर मार्गदर्शन और सकारात्मक प्रोत्साहन ने उन्हें कठिन मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। तृप्ति का परिवार पहले से ही प्रशासनिक और शैक्षणिक सेवाओं से जुड़ा रहा है। उनकी माता बिहार सरकार में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनके मामा रवि कुमार झारखंड के प्रतिष्ठित रेनेशा आईएएस एकेडमी के संचालक हैं।
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शॉर्ट बायो : भादो माझी पिछले 17 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में ‘हिन्दुस्तान’ में प्रिंसिपल कोरेस्पोंडेंट के तौर पर जनजातीय बहुल इलाक़ों में पत्रकारिता कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
भादो माझी प्रिंट मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में प्रिंसिपल कोरेस्पोंडेंट के तौर पर राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों पर नजर रखते हैं। जनजातीय समाज के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, पारंपरिक एवं शैक्षिक पहलुओं के विश्लेषण पर उनका विशिष्ट अनुभव हैं। 2021 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने प्रिंट मीडिया एवं डिजिटल कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।
करियर का सफर :
भादो माझी ने अपने करियर की शुरुआत 2009 में दैनिक जागरण अखबार से की, जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2015 में दैनिक जागरण में उन्हें लोकल कंटेंट क्रिएटर टीम का नेतृत्व दिया गया। 2015 से 2021 तक दैनिक जागरण में लोकल रिपोर्टिंग टीम का नेतृत्व करने के बाद वह ‘हिन्दुस्तान’ से जुड़े।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग
मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएट होने के कारण भादो माझी को पत्रकारिता की तकनीकी और फील्ड प्रैक्टिकलिटी की मजबूत समझ है। इसी वजह से उनका राजनीतिक बीट पर कमांड होने के साथ उन्हें जनजातीय समाज में आ रहे परिवर्तन की शोध स्तरीय विशेषज्ञता प्राप्त है। झारखंड के ट्राइबल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मीडिया स्टडीज के शोध छात्रों के लिए उन्होंने फ़ील्ड गाइड के रूप में भी अपनी एक्स्पर्टीज़ को साझा किया। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध उनकी शोध आधारित स्टोरीज को आज भी रेफरेंस के तौर पर जनजातीय मामलों की रिपोर्ट बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
ट्राइबल स्टडीज एवं योगदान
झारखंड के 32 (अब 33) जनजाति की रूढ़ि परंपरा से लेकर स्वशासन व्यवस्था के बारे में उनकी पकड़ न सिर्फ़ इन जनजातियों के बीच मज़बूत है बल्कि अलग अलग माध्यमों से इन समुदायों की स्थिति और संभावनाओं पर भी इनकी रिपोर्ट सरकार के नीति निर्धारकों तक के लिए इन जनजातियों का मंतव्य प्रस्तुत करती रही है। भादो माझी का मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता है—उनका लक्ष्य पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना तो है ही, साथ ही वंचित वर्ग की आवाज बनकर नीति निर्धारकों तक वस्तुस्थिति पहुंचाना और भविष्य की रणनीति को बेहतर बनाने में अपना योगदान देना है।
विशेषज्ञता
झारखंड के 32 जनजाति समाज की समझ
रूढ़ि परंपरा पर गहरी पकड़
सुदूर गांवों के अंतिम पंक्ति में खड़े आदिवासियों से सीधा संवाद
झारखंड की सभी जनजाति की भाषा की जानकारी
देश की तीसरी सबसे बड़ी जनजाति संथाल समाज से आना
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