कोटपूतली में 4 दिन से चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में अब भी चेतना (3) तक नहीं पहुंच सकी हैं। नए गड्ढे के तैयार होने के बाद रैट माइनर्स को पाइप से 170 फीट नीचे उतारा जाएगा।
इसके बाद वे एक 20 फीट की सुरंग खोदेंगे। बुधवार सुबह 8 बजे से 170 फीट का गड्ढा खोदा जा रहा है। मेजरमेंट सही नहीं होने के कारण 30 घंटे से खुदाई जा रही है।
सोमवार दोपहर करीब 2 बजे से 700 फीट गहरे बोरवेल में फंसी चेतना 72 घंटे से भूखी-प्यासी है। मंगलवार के बाद से उसका मूवमेंट भी कैमरे में नहीं दिखा।
उसकी वर्तमान कंडीशन को लेकिर अधिकारी कुछ भी नहीं कह रहे हैं। देसी जुगाड़ के कारण वह शुरुआती जगह से केवल 30 फीट ही ऊपर आ सकी है।
बीते करीब 48 घंटे से चेतना एक हुक 120 फीट की गहराई पर अटकी है। उसे बाहर निकालने की अब तक 4 कोशिशें फेल रही हैं। परिवार ने बुधवार को प्रशासन पर लापरवाही का भी आरोप लगाया था।
सबसे पहले जानिए- कहां हुआ हादसा
कलेक्टर ने बताया क्यों हो रही देरी
सोमवार दोपहर से चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को देखने के लिए कोटपूतली-बहरोड़ जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल बुधवार देर रात मौके पर पहुंची। उन्होंने पूरे ऑपरेशन को लेकर अधिकारियों से बात की। कलेक्टर का कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है, इस ऑपरेशन को एक मिनट भी नहीं रोका गया है।
उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ की टीम पहले भी ऐसे रेस्क्यू ऑपरेशन को लीड कर चुकी है। अग्रवाल ने कहा कि- पाइलिंग मशीन के लिए काफी तैयारियां करनी पड़ती है। ये मशीन काफी बड़ी होती है। ये एक बड़े ट्रेलर पर लोड होती है। मशीन को यहां तक पहुंचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। हमें सड़कें बनानी पड़ीं। कई बिजली के पोल हटाने पड़े। इस वजह से देरी हुई
रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ी PHOTOS…
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