भारतीय सेना सिलीगुड़ी 18 की जगह 3 घंटे में पहुंचेगी: डोकलाम विवाद के बाद केंद्र ने शुरू कीं 4 सुरक्षा-इन्फ्… – Dainik Bhaskar

अगले चार साल में सिलीगुड़ी कॉरिडोर को देश का सबसे सुरक्षित सैन्य रास्ता बनाने की तैयारी है। जून 2017 में हुए डोकलाम विवाद के बाद केंद्र सरकार ने चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) और सिक्किम क्षेत्र में लगभग 4 बड़ी सुरक्षा-इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स शुरू की हैं।
अभी कठिन पहाड़ी रास्तों और सिंगल-लेन नेटवर्क के कारण भारी तोपों (आर्टिलरी) व सैन्य दस्तों को सीमा तक पहुंचाने में 12 से 18 घंटे का समय लगता है। इन प्रोजेक्ट्स के 2029 तक पूरे होने पर यह समय घटकर मात्र 3 घंटे रह जाएगा।
इससे भारतीय सेना चीन की किसी भी चुनौती का करारा जवाब दे सकेगी। इस रणनीतिक किलेबंदी का मकसद 4 करोड़ पूर्वोत्तर आबादी का शेष भारत से संपर्क रखना है।
जमीन से 20 मीटर नीचे बनेगी 36 किलोमीटर लंबी रेल टनल
इन प्रोजेक्ट्स की खासियत जमीन से 20 मीटर नीचे बनने वाली 36 किलोमीटर लंबी रेल टनल है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के ड्राफ्ट के मुताबिक, यह टनल पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के तीन माइल हाट से सिलीगुड़ी के पास रांगापानी तक बनाई जाएगी।
भारत, नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं के बेहद करीब बनने वाली इस टनल से ट्रेनें गुजरेंगी। इससे दुश्मन के हवाई और ड्रोन हमलों का असर नहीं होगा। युद्ध के दौरान तोपें और जरूरी सामान बिना किसी रुकावट के सेना की अग्रिम चौकियों तक पहुंचाया जा सकेगा।
पांच अंडरग्राउंड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाए जा रहे
नॉर्थ सिक्किम में 19 हजार फीट ऊपर नाकू ला के पास चीनी सेना मौजूद है। इसलिए अब सेना सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य किले जैसा बना रही है। ऑपरेशन फोर्ट्रेस सिलीगुड़ी के तहत ₹534 करोड़ से बन रहे इस 7-लेयर डिफेंस चक्रव्यूह में जमीन में 20-24 मीटर नीचे 5 कमांड सेंटर, 6 संचार सेंटर, 12 एयर डिफेंस व गोला-बारूद स्टोरेज, 12 बम शेल्टर्स बनाए जा रहे हैं।
तिब्बत सीमा पर चीन द्वारा बसाए जा रहे नए गांवों के जवाब में तैयार किया जा रहा यह भूमिगत इन्फ्रास्ट्रक्चर पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने वाले संवेदनशील ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर को किसी भी मिसाइल, ड्रोन या हवाई हमले से पूरी तरह सुरक्षित और अभेद्य बनाएगा।
एक्सपर्ट बोले- बांग्लादेश में नई सरकार आने के बाद स्थिति बदली है
लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) हिमालय सिंह ने कहा कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर नेपाल, बांग्लादेश, चीन और भूटान से घिरा बेहद नाजुक ‘सॉफ्ट स्पॉट’ है। चीन की चुंबी घाटी से इस पर सीधी नजर रहती है।
बांग्लादेश में नई सरकार आने के बाद स्थिति बदली है। चीन और बांग्लादेश मिलकर तीस्ता नदी पर अध्ययन कर रहे हैं और लालमोनिरहाट के पुराने हवाई अड्डे को जिंदा कर रहे हैं।
इन परिस्थितियों में भारत के लिए ये सुरंगें और 7-लेयर डिफेंस सिस्टम बेहद जरूरी हैं। इनसे सेना द्वारा पूर्वोत्तर की सुरक्षा पूरी तरह से सुनिश्चित होगी।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर के दक्षिण में बांग्लादेश, उत्तर-पू्र्व में चीन की चुंबी घाटी है
बंगाल में स्थित सिलीगुड़ी कॉरिडोर ही चिकन नेक है। सिर्फ 22 किमी चौड़ा जमीन का वह पतला गलियारा पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। इस कॉरिडोर के दक्षिण में बांग्लादेश, उत्तर-पू्र्व में चीन की चुंबी घाटी है।
पश्चिम में नेपाल है और उत्तर में भूटान है। कम चौड़ाई और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से घिरे होने के कारण यह भारत का बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण सैन्य चोकपॉइंट है।
————-
ये खबर भी पढ़ें…
अफगानिस्तान ने चीन तक बनाई सड़क, भारत के लिए चिंता:121 किमी का वाखान कॉरिडोर चीन के लिए सीधा रास्ता, लद्दाख के पास बढ़ेगा असर
अफगानिस्तान ने उत्तर-पूर्वी बदख्शां प्रांत में वाखान कॉरिडोर के जरिए चीन के शिनजियांग तक 121 किलोमीटर लंबी सड़क बना ली है। करीब 55 लाख डॉलर की लागत से बनी इस सड़क का उद्घाटन भी हो गया है। यह सड़क अफगानिस्तान और चीन के बीच पहला सीधा जमीनी रास्ता है। पूरी खबर पढ़ें…
Copyright © 2024-25 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News