भारत की परमाणु मिसाइलों की पहुंच से दुनिया हैरान, नई रिपोर्ट ने पाकिस्तान-चीन की बढ़ाई चिंता! – bharat24live.com

Shubham Raja
Date: 04-10-26 19:05
India Nuclear Missile: भारत के पास कितने परमाणु हथियार हैं? विदेशी वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक, भारत के पास करीब 190 परमाणु हथियार हो सकते हैं. हालांकि, परमाणु हथियारों की असली ताकत तभी सामने आती है, जब उन्हें जरूरत पड़ने पर दुश्मन के इलाके तक पहुंचाने की क्षमता भी हो. भारत के पास परमाणु हथियारों के साथ-साथ लंबी दूरी तक हमला करने वाली कई मिसाइल प्रणालियां भी हैं.
‘बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स’ (BAS) की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत लगातार अपने परमाणु हथियारों को पहुंचाने वाली प्रणालियों को आधुनिक बना रहा है. हालांकि, भारत अभी भी अपनी ‘नो फर्स्ट यूज’ यानी पहले परमाणु हथियार इस्तेमाल न करने की नीति पर कायम है.
हैंस एम. क्रिस्टेंसन, मैट कोर्डा, एलियाना जॉन्स और मैकेंजी नाइट-बॉयल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास करीब 190 परमाणु हथियार हो सकते हैं. भारत आज परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम विमानों, जमीन से लॉन्च होने वाली मिसाइलों और समुद्र से छोड़ी जाने वाली प्रणालियों का इस्तेमाल करता है. इन तीनों के मेल से भारत के पास ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ यानी जमीन, हवा और समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत अपने रणनीतिक हथियारों की वास्तविक क्षमता, उनकी तैनाती और ऑपरेशनल रेंज के बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं करता है.
क्या है इस रिपोर्ट में?
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपने परमाणु हथियारों के भंडार को लेकर काफी गोपनीयता रखता है. इसी वजह से बाहर से इसकी सही क्षमता का आकलन करना मुश्किल है. सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध रेंज के आंकड़े भी अनुमान पर आधारित हैं और जरूरी नहीं कि वे किसी सिस्टम की पूरी क्षमता बताते हों.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास दो तरह के ऐसे लड़ाकू विमान हैं जिन्हें परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम माना जाता है. इनमें फ्रांस से मिले और अपग्रेड किए गए मिराज 2000 प्रमुख हैं. इन्हें भारत की परमाणु हमले की क्षमता का अहम हिस्सा माना जाता है.
जगुआर स्ट्राइक एयरक्राफ्ट को भी परमाणु मिशन में दूसरी भूमिका के लिए सक्षम माना जाता है. हालांकि, पुराने जगुआर धीरे-धीरे सेवा से बाहर हो रहे हैं. ऐसे में रिपोर्ट का अनुमान है कि आने वाले समय में फ्रांस से मिले राफेल लड़ाकू विमान इस भूमिका में ज्यादा अहम हो सकते हैं.
भारत की एयर-बेस्ड परमाणु क्षमता अमेरिका और चीन से अलग है. अमेरिका के पास B-2 और B-21 जैसे स्टील्थ बॉम्बर हैं, जबकि चीन H-6 सीरीज के बॉम्बर और नई लंबी दूरी की प्रणालियों पर काम कर रहा है. पाकिस्तान की परमाणु हथियार पहुंचाने की क्षमता मुख्य रूप से लड़ाकू विमानों और मिसाइलों पर निर्भर है.
भारत ने भी अपनी रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने के लिए लड़ाकू विमानों, जमीन से मार करने वाली मिसाइलों और पनडुब्बियों से लॉन्च होने वाली मिसाइलों का मिश्रण तैयार किया है.
भारत के पास मिसाइलों की ताकत
भारत की रणनीतिक मिसाइल क्षमता में ‘अग्नि’ सीरीज की अहम भूमिका है. इन मिसाइलों को मुख्य रूप से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है. भारत ने मिसाइल तकनीक में काफी हद तक अपनी क्षमता खुद विकसित की है.
रिपोर्ट में परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम छह ऑपरेशनल बैलिस्टिक मिसाइल प्रणालियों का जिक्र किया गया है. इनमें पृथ्वी-II, अग्नि-I, अग्नि-II, अग्नि-III, अग्नि-IV और अग्नि-V शामिल हैं.
इसके अलावा अग्नि प्राइम यानी अग्नि-P भी ऑपरेशनल तैनाती की दिशा में आगे बढ़ रही है. सार्वजनिक अनुमानों के अनुसार, अग्नि-I की रेंज करीब 700 किलोमीटर, अग्नि-II की 2,000 किलोमीटर से ज्यादा, अग्नि-III की 3,200 किलोमीटर से ज्यादा, अग्नि-IV की 3,500 किलोमीटर से ज्यादा और अग्नि-V की 6,000 किलोमीटर से कम बताई जाती है.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के अंदर से लॉन्च किए जाने पर अग्नि-V पाकिस्तान और चीन के बड़े हिस्से के साथ मध्य एशिया, रूस के कुछ हिस्सों, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप के कुछ इलाकों तक पहुंच सकती है.
अग्नि-V की लंबी रेंज का एक फायदा यह भी है कि इसे सीमावर्ती इलाकों से दूर देश के अंदरूनी हिस्सों में तैनात किया जा सकता है.
भारतीय मिसाइलें कितनी खास?
भारत की मिसाइलों में कैनिस्टर आधारित सिस्टम का इस्तेमाल भी अहम माना जाता है. इससे मिसाइल को कम समय में लॉन्च करने की क्षमता मिलती है और प्रतिक्रिया का समय घटता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अग्नि-V ने ‘मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल’ यानी MIRV तकनीक का प्रदर्शन किया है. इस तकनीक के जरिए एक मिसाइल से कई पेलोड को अलग-अलग लक्ष्यों की ओर भेजा जा सकता है. हालांकि, रिपोर्ट के लेखकों का अनुमान है कि इसमें फिलहाल सीमित संख्या में वॉरहेड हो सकते हैं.
भारत की परमाणु क्षमता का समुद्री हिस्सा भी लगातार मजबूत हो रहा है. रिपोर्ट में अप्रैल 2026 में भारत की तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS अरिधमन के शामिल होने का जिक्र किया गया है. यह INS अरिहंत और INS अरिघात के साथ भारत की समुद्री परमाणु क्षमता को और मजबूत करती है.
इसके अलावा नई पनडुब्बियों पर काम जारी है और K-4 जैसी लंबी दूरी की पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों की तैनाती बढ़ाने की दिशा में भी काम चल रहा है.
रिपोर्ट में भारत के न्यूक्लियर ट्रायड को ऑपरेशनल बताया गया है. इसमें परमाणु हथियार ले जाने वाले विमान, जमीन से लॉन्च होने वाली मिसाइलें और समुद्र आधारित परमाणु क्षमता शामिल है. पनडुब्बियों की खासियत यह है कि वे लंबे समय तक समुद्र में छिपी रह सकती हैं. इससे किसी परमाणु हमले के बाद भी जवाबी कार्रवाई की क्षमता बनाए रखने में मदद मिलती है.
पहले नहीं, लेकिन दूसरा हमला पक्का
भारत की परमाणु नीति में ‘नो फर्स्ट यूज’ यानी पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करने की नीति अहम है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने इसके साथ ही ऐसी क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया है, जिससे परमाणु हमला होने की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की जा सके.
इसका मतलब है कि भारत पहले परमाणु हमला शुरू नहीं करने की नीति पर कायम है, लेकिन उस पर हमला होने की स्थिति में जवाब देने की क्षमता बनाए रखता है.
मिसाइल वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम अग्नि मिसाइल को लेकर कई बार इसके दोहरे महत्व की बात कर चुके थे. उनका कहना था कि मिसाइल तकनीक सिर्फ एक डिलीवरी सिस्टम है और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए होगा, यह राजनीतिक फैसले पर निर्भर करता है.
BAS की यह रिपोर्ट भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के संदर्भ में भी आई है. इसमें 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों के खिलाफ भारत के ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट में भारत की मिसाइल क्षमताओं के साथ ब्रह्मोस जैसे पारंपरिक लंबी दूरी के हथियारों की बढ़ती क्षमता का भी उल्लेख किया गया है.
कुल मिलाकर रिपोर्ट भारत की परमाणु क्षमता की एक ऐसी तस्वीर पेश करती है, जिसमें विदेशी लड़ाकू विमान, स्वदेशी अग्नि मिसाइलें और परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां शामिल हैं. भारत ने जमीन, हवा और समुद्र तीनों माध्यमों से परमाणु हथियार पहुंचाने की क्षमता विकसित की है.
हालांकि भारत अपने रणनीतिक हथियारों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों से साफ है कि उसकी परमाणु और मिसाइल क्षमता लगातार आधुनिक हो रही है. इसका मुख्य उद्देश्य परमाणु हमले की स्थिति में विश्वसनीय जवाबी कार्रवाई की क्षमता बनाए रखना है.
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