भारत ने स्वदेशी अनमैन्ड सरफेस वेसल (USV) का निर्माण कर रक्षा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिससे वह अब चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है।
भारत ने स्वदेशी USV निर्माण में बड़ी उपलब्धि हासिल की
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वर्तमान समय में युद्ध लड़ने के तरीकों में बड़ा बदलाव हो रहा है। लाल सागर से काले सागर और होर्मुज स्ट्रेट तक बिना चालक वाले सिस्टम समुद्री लड़ाई का नया चेहरा बन रहे हैं। ऐसे समय में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
भारत अब उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जो अनमैन्ड सरफेस वेसल यानी यूएसवी बना सकते हैं। इसका मतलब है पानी पर चलने वाली ड्रोन नाव। जिसका इस्तेमाल रूस-यूक्रेन युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हो रहा है।
यह उपलब्धि केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि आत्मनिर्भर भारत मिशन के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है। पुणे की निजी रक्षा कंपनी सागर डिफेंस इंजीनियरिंग ने स्वदेशी अनमैन्ड सरफेस वेसल (यूएसवी) का निर्माण किया है।
यूएसवी एक ऐसा समुद्री प्लेटफॉर्म है जिसमें कोई मानव चालक दल नहीं होता और इसे रिमोट कंट्रोल या पूरी तरह ऑटोमेटिक मोड में चलाया जा सकता है।
इस जहाज को जोखिम भरे अभियानों के लिए डिजाइन किया जाता है। इसमें निगरानी, टोही, सैनिकों की सुरक्षा और असममित युद्ध जैसी भूमिकाएं निभाई जा सकती हैं।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जवानों को सीधे खतरे में डालने की जरूरत नहीं रहती। वर्तमान युद्ध परिदृश्य में जब ड्रोन और बिना चालक वाले सिस्टम प्रमुखता हासिल कर रहे हैं, तब यूएसवी भारतीय नौसेना की क्षमता बढ़ाने वाला एक प्रभावी हथियार साबित होगा।
भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने के बाद इस यूएसवी को दिल्ली में आयोजित स्वालंबन प्रदर्शनी में पहली बार जनता के सामने रखा गया। स्वालंबन भारतीय नौसेना की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य नवाचार को प्रोत्साहित करना और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताएं विकसित करना है। इस आयोजन के जरिए सशस्त्र बलों और देश के उद्योग व स्टार्टअप जगत के बीच सहयोग बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।
इस यूएसवी के प्रदर्शन से यह साफ संकेत मिला है कि भारत अब केवल विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय अपने दम पर आधुनिक रक्षा प्रणालियां विकसित करने में सक्षम हो चुका है। नौसेना में इसके शामिल होने से परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी रखने की क्षमता मजबूत होगी।
दुनिया भर की नौसेनाएं तेजी से चालक रहित और स्वचालित प्लेटफॉर्म्स की ओर रुख कर रही हैं। ऐसे में भारत का यह कदम वर्तमान वैश्विक रुझान के अनुरूप है। अमेरिका, चीन, इजरायल और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ अब भारत भी इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है।
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