भारत के किन राज्यों को 'ड्राई ​स्टेट' कहते हैं, आखिर क्या होता है इसका मतलब; यहां जानें सब कुछ – India TV Hindi

इंटरनेट पर आपने कई बार खास मौकों पर ‘ड्राई डे’ और ‘ड्राई स्टेट’ जैसे टर्म सुने होंगे। सामान्यत: टर्म्स का इस्तेमाल खबरों, रिपोर्ट्स, ब्लॉग्स, मीम्स या फिर आम बोलचाल की भाषा में किया जाता है। आमतौर पर जिन राज्यों में शराब के उत्पादन, बिक्री, खरीद, कब्जे या सेवन पर पूरी तरह कानूनी रूप से रोक होती है उन्हें ‘ड्राई स्टेट’ कहा जाता है। ड्राई स्टेट का मलतब सिर्फ शराब की दुकानें बंद होना नहीं है। इसमें अवैध उत्पादन, तस्करी स्मगलिंग, कब्जा और सेवन पर सख्त सजा का प्रावधान होता है। कई जगहों पर पहली बार पकड़े जाने पर भी कई साल की सजा और भारी जुर्माना हो सकता है। आइए जानते हैं कि, भारत के किन राज्यों में शराब बैन है यानी किन राज्यों को ड्राई स्टेट कहा जाता है : 
गुजरात भारत का सबसे लंबे समय तक शराबबंदी वाला राज्य रहा है। वास्तव में, यह भारत के सबसे प्रसिद्ध ‘ड्राई स्टेट्स ऑफ इंडिया’ कहे जाने वाले राज्यों में से एक है, जहां 1960 में शराब पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। यह राज्य पूर्व बॉम्बे राज्य के विभाजन के बाद बना था। 1949 का बॉम्बे निषेध अधिनियम गुजरात में आज भी लागू है, जिसके तहत शराब का निर्माण, बिक्री और सेवन अवैध है। जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दें कि गुजरात में घर में बनी शराब के निर्माण और बिक्री पर कड़ी सजा का प्रावधान है। महात्मा गांधी के विचारों और सामाजिक सुधार आंदोलन से प्रेरित यह प्रतिबंध आज भी जारी है। 
बिहार सरकार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार उत्पाद शुल्क (संशोधन) अधिनियम के तहत 2016 में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया था। इसका उद्देश्य शराबखोरी और उससे जुड़े नुकसानों को कम करना था। यहां शरा के निर्माण, बिक्री, कब्जा और सेवन सब अवैध हैं। सजा भी बहुत सख्त है- सेवन पर भी न्यूनतम पांच साल की कैद और एक लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। 2026 में भी राज्य सरकार ने प्रतिबंध जारी रखने की पुष्टि की है, हालांकि अवैध शराब और राजस्व नुकसान की चुनौतियां बनी हुई हैं। 
नागालैंड में 1989 के नागालैंड शराब निषेध अधिनियम के तहत शराब पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कानून पूरे राज्य में मादक पेय पदार्थों की बिक्री, कब्ज़ा, सेवन और निर्माण पर रोक लगाता है। वास्तव में, यह भारत के सबसे सख्त शराब निषेध वाले राज्यों में से एक है। इस प्रतिबंध के पीछे मुख्य रूप से सामाजिक और सांस्कृतिक कारण थे। इसमें शराब के दुरुपयोग को लेकर समुदाय की चिंताएं भी शामिल थीं।
कुछ अपवादों के साथ लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश में अधिकांश निवासियों के लिए शराब निषेध है। ऐतिहासिक रूप से, सामाजिक व्यवस्था और स्थानीय संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए द्वीपों में शराब की बिक्री और सेवन प्रतिबंधित है। उल्लेखनीय अपवादों में बंगाराम द्वीप शामिल है, जो एक प्रमुख पर्यटन क्षेत्र है। यहां पर्यटकों के लिए चुनिंदा लाइसेंस प्राप्त स्थानों पर शराब की अनुमति है। बता दें कि, जून 2026 सरकार ने यहां 47 साल पुराने शराब प्रतिबंध को नई नीतियां जारी कर रद्द कर दिया था। कई वायरल रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि, केंद्र सरकार अब पर्यटन को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों के तहत एक विनियमित लाइसेंसिंग प्रणाली लागू कर रही है और इस स्थिति को बदल रही है।
मिजोरम की शराब नीति को समझना थोड़ा जटिल है। मिजोरम शराब निषेध अधिनियम, 1995 ने 1997 में शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगा दिया था। 2007 में, इस अधिनियम में संशोधन करके अमरूद और अंगूर से वाइन बनाने की अनुमति दी गई, लेकिन इसमें अल्कोहल की मात्रा और रखने की सीमा पर प्रतिबंध लगा दिया गया। अब मिजोरम शराब (निषेध और नियंत्रण) अधिनियम लागू है। मिजोरम को शराब निषेध राज्यों की सूची में शामिल किया गया है।
गौरतलब है कि, कई राज्यों ने पहले प्रतिबंध लगाया और बाद में हटाया। वहीं, मिजोरम और मणिपुर में भी समय-समय पर बदलाव होते रहे हैं। यात्रियों को भी ध्यान रखना चाहिए कि, ड्राई स्टेट्स में शराब लेकर जाने से बचें अन्यथा सख्त सजा का सामना पड़ेगा।
ये भी पढ़ें –
कुछ ट्रेनों के इंजन में ‘हावड़ा’ या ‘गाज़ियाबाद’ क्यों लिखा होता है? समझने में भूल करते हैं तो जवाब जान लें
© 2009-2026 Independent News Service. All rights reserved.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News