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भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक रिश्तों में जल्द ही एक नया अध्याय शुरू होने वाला है. भारत-UK कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट यानी CETA के 2026 के पहले छह महीनों में लागू होने की उम्मीद जताई गई है. ब्रिटेन के डिप्टी हाई कमिश्नर एंड्रयू फ्लेमिंग के मुताबिक, यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएगा और व्यापार के कई नए रास्ते खोलेगा.
ब्रिटिश अधिकारी ने इस समझौते को अब तक की सबसे व्यापक और महत्वाकांक्षी ट्रेड डील बताया है. उन्होंने कहा कि यह ऐसा समझौता है, जिस पर दोनों देशों की सरकारों ने लंबे समय तक बातचीत की है. करीब 20 हजार पन्नों वाले इस करार में टैरिफ, टेक्नोलॉजी, सर्विस सेक्टर और निवेश जैसे कई अहम पहलुओं को शामिल किया गया है.
CETA का सबसे बड़ा फायदा भारतीय निर्यातकों को मिलने वाला है. इस समझौते के लागू होने के बाद भारत के लगभग 99 फीसदी उत्पादों को ब्रिटेन में ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी. इससे टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, मरीन प्रोडक्ट्स और खिलौनों जैसे सेक्टर को सीधा फायदा होगा. इसके साथ ही इंजीनियरिंग, केमिकल और ऑटो पार्ट्स जैसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों के लिए भी नए बाजार खुलेंगे.
यह समझौता सिर्फ सामान तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की ताकत माने जाने वाले सर्विस सेक्टर पर भी खास फोकस करता है. आईटी, फाइनेंशियल सर्विसेज और प्रोफेशनल सेवाओं में काम करने वाले भारतीयों के लिए ब्रिटेन में बेहतर अवसर बनने की उम्मीद है. इससे दोनों देशों के बीच सर्विस ट्रेड में अच्छी बढ़त देखने को मिल सकती है.
CETA की एक खास बात यह है कि इसमें महिलाओं और जेंडर से जुड़े कारोबार पर अलग चैप्टर शामिल किया गया है. यह भारत-UK के किसी भी ट्रेड समझौते में पहली बार हुआ है. पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के लिए यह अहम है, जहां महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों की संख्या काफी अधिक है. इससे कारीगरों, छोटे कारोबारियों और MSME सेक्टर को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
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फिलहाल भारत और ब्रिटेन के बीच सालाना व्यापार करीब 56 अरब डॉलर का है. इस समझौते का लक्ष्य इसे आने वाले समय में दोगुना कर 112 अरब डॉलर तक पहुंचाना है. इसके जरिए दोनों देश आर्थिक सहयोग को और गहरा करना चाहते हैं.
ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर ने साफ किया कि CETA को लागू करने की तैयारी तेजी से चल रही है और 2026 के पहले छह महीने इसकी संभावित समयसीमा मानी जा रही है. उन्होंने भारतीय कारोबारियों से अपील की कि वे अभी से इस समझौते से मिलने वाले फायदों के लिए खुद को तैयार करें. कुल मिलाकर, भारत-UK ट्रेड पैक्ट को दोनों देशों के लिए विन-विन डील माना जा रहा है, जो रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास को नई रफ्तार दे सकता है.