भारत में कम तेल खरीदने की अपील… जानिए दूसरे देशों का क्या है हाल – AajTak

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अमेरिका – ईरान में जंग शुरू होने के बाद से दुनिया भर में तेल और गैस की किल्लत हो गई है. यूरोप हो या एशिया, अफ्रीका, आस्ट्रेलिया और अमेरिका तक सभी महादेश तेल की कमी की मार झेल रहे हैं. ऐसे में कई देशों की सरकार ने तेल की खपत को कम करने के लिए तरह- तरह के उपाय कर रहे हैं. भारत में भी तेल की खपत कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई उपाय सुझाए हैं. ऐसे में जानते हैं दूसरे देशों में इसको लेकर क्या हो रहा है.  
सबसे पहले नजर डालते भारत के पड़ोसी देशों में क्या हो रहा है. पाकिस्तान की बात करें तो वहां स्कूल-कॉलेज ऑनलाइन मोड पर आ गए हैं. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के  ट्रेकर के मुताबिक, पाकिस्तान में सरकारी अधिकारियों के लिए सप्ताह में चार दिन का कार्यदिवस लागू कर दिया गया है. शेष दिनों में 50 प्रतिशत काम रिमोट मोड में होंगे. वहीं प्राइवेट सेक्टर में रिमोड और वर्क फ्रॉम होम को प्रोत्साहित किया जा रहा है. 
भारत के पड़ोसी देशों में कैसे बचाया जा रहा है तेल
पाकिस्तान में सरकारी अधिकारियों के विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. सड़कों पर वाहनों की स्पीड लिमिट कम कर दी गई है. नए वाहन खरीदने पर भी रोक लगा दिया गया है. वहीं पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर किराये में रियायत दी जा रही है. 
बांग्लादेश की बात करें तो यहां AC को 25 डिग्री से पर चलाने का निर्देश दिया गया है. सार्वजिनक और निजी यूनिवर्सिटी बंद कर दिए गए हैं. व्यवसायियों और आम जनता को   कम से कम लाइट जलाने की अपील की गई है. बांग्लादेश में वाहनों के लिए पेट्रोल और डीजल की खरीद को सीमित कर दिया गया है.
नेपाल में सरकारी वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है. एलपीजी की राशनिंग हो रही है. गैस सिलेंडर आधे भरकर दिए जा रहे हैं. वहीं श्रीलंका में बुधवार को सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों को बंद रखने का आदेश जारी किया गया है. मीटिंग और दूसरे काम ऑनलाइन करने को कहा गया है. दफ्तरों में AC को 26 डिग्री पर चलाने के आदेश हैं. प्रतिदिन हर घर में 1-2 घंटे बिजली और पानी बंद रखने और पंखे के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है.
श्रीलंका में निजी कारों और मोटरसाइकिलों के लिए क्यूआर कोड आधारित राष्ट्रव्यापी ईंधन राशनिंग प्रणाली शुरू की गई है. इसके तहत ड्राइवरों को प्रति सप्ताह 15 लीटर और मोटरसाइकिल चालकों को 5 लीटर तक सीमित कर दिया गया रात 9 बजे के बाद बिलबोर्ड की लाइटें बंद करने की अपील की गई है.
ब्रिटेन और फ्रांस में भी दिख रही तेल की कमी
ब्रिटेन में प्रशासनिक बोझ कम करके इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा दिया जा रहा है.  सड़क के किनारे इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन लगाने के नियमों में ढील देने की योजना की घोषणा की गई है. ताकि, ज्यादा से ज्यादा EV का इस्तेमाल हो. यूके में तापमान कम रहता है. इसलिए घरों को एलपीजी या तेल आधारित हीटिंग से हीट पंप और अन्य घरेलू  उपायों पर स्विच करने के लिए सब्सिडी दी जा रही है. 
फ्रांस में भी इलेक्ट्रिक वाहनों के ज्यादा इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है. पेट्रोल और डीजल वाली गाड़ियों के इस्तेमाल कम करने की अपील की गई है. कम आय वाले जो लोग निजी कारों पर निर्भर हैं, उन्हें इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए लीजिंग योजना की सहूलियत दी जा रही है.
कई देशों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट कर दिए गए हैं फ्री
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के दो राज्यों में, लोगों को गाड़ी न चलाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके लिए वहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मुफ्त कर दिया गया है. ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में ट्रेनों, ट्रामों और बसों में यात्रा मई के अंत तक मुफ्त कर दी गई है. इसके बाद साल के अंत तक किराए में आधी कटौती की जाएगी.
वहीं तस्मानिया में यात्रियों को जून के अंत तक बसों, कोचों और फेरी के लिए किराया देने की आवश्यकता नहीं होगी.तस्मानिया के परिवहन मंत्री ने ऐलान किया है कि वैसे स्कूल बसों को चार्ज करते थे, उन्हें मुफ्त कर दिया जाएगा.
मिस्र, जो आयातित तेल पर काफी हद तक निर्भर है. उसने ईंधन की खपत को कम करने के लिए कई अस्थायी उपाय पेश किए हैं. दुकानों, रेस्तरां और कैफे को हर रात 9 बजे बंद करने का आदेश दिया गया है, जबकि स्ट्रीट लाइट और सड़क किनारे लगे लाइट वाले विज्ञापन भी मंद किए जा रहे हैं. होटल और पर्यटन स्थलों को इससे छूट दी गई है. इसके अलावा ऊर्जा की अधिक खपत करने वाली बड़ी सरकारी परियोजनाओं को धीमा कर दिया गया है.और सरकारी वाहनों के ईंधन भत्ते में लगभग एक तिहाई की कटौती की गई है.
फिलीपींस ने तो राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है. इसके तहत सरकार ने परिवहन चालकों को सब्सिडी की पेशकश की है. नौका सेवाओं में कटौती की है और सरकारी कर्मचारियों के लिए चार दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया है.
थाईलैंड, म्यांमार और वियतनाम में किए जा रहे ये उपाय
थाईलैंड में सरकार ने एयर कंडीशनिंग यूनिटों द्वारा खपत की जाने वाली ऊर्जा की मात्रा को कम करने के उपायों के तहत लोगों से अपनी जैकेट उतारने का आग्रह किया है. थाईलैंड में लोगों को एसी को 26-27 डिग्री सेल्सियस पर रखने के लिए कहा गया है, जबकि सभी सरकारी एजेंसियों को घर से काम करने के लिए कहा गया है.यह एशियाई देश लगातार गर्म और आर्द्र रहता है, और बैंकॉक में अप्रैल के महीने में आर्द्रता आमतौर पर 72% तक पहुंच जाती है.
म्यांमार में निजी वाहनों को उनकी लाइसेंस प्लेट पर ऑड और इवेन नंबर  के आधार पर वैकल्पिक दिनों में चलने की अनुमति दी गई है. इलेक्ट्रिक वाहनों को इससे छूट दी गई है. सरकार ने एक डिजिटल रूप से निगरानी की जाने वाली ईंधन राशनिंग प्रणाली भी लागू की है. इसके तहत गाड़ियों पर र मौजूद क्यूआर कोड का इस्तेमाल करके खरीदारी को स्कैन किया जाता है और ट्रैक किया जाता है.
वियतनाम में, सरकार ने लोगों से साइकिल चलाने, कारपूल करने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है.  अनावश्यक होने पर निजी वाहनों के उपयोग को कम करने की अपील की गई है. साथ ही नागरिकों को ईंधन बचाने के लिए अधिक समय तक घर पर रहने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
कोरिया में निजी क्षेत्र में रिमोट मोड में काम को बढ़ावा दिया जा रहा है. गाड़ियों के नंबर प्लेट पर ऑड और इवन के आधार पर सप्ताह के अलग-अलग दिन परिचालन के लिए बांट दिए गए हैं. खुद की गाड़ी चलाने वालों को स्वेच्छा से सप्ताह में एक दिन गाड़ी घर से बाहर नहीं निकालने की अपील की गई है.
सिंगापुर में भी एसी को 25 डिग्री तक रखने का निर्देश दिया गया है. यहां भी निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने की अपील की गई है और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है.  
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