केरलम सीएम को लेकर कांग्रेस का ‘फैसला’ बना नेतृत्व को फंसाने वाला – AajTak

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केरल को छोड़ कर जिन राज्यों में भी चुनाव हुए थे, नई सरकारें भी बन गई हैं. असम, पश्चिम बंगाल और पुड्डुचेरी का तो तकरीबन तय ही था, तमिलनाडु में थोड़ी रुकावटें आ रही थीं. तमिलनाडु में भी सी. जोसेफ विजय मुख्यमंत्री भी बन गए, जिसमें कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका है. केरल में सरकार बनाने का मौका मिलने के बाद भी कांग्रेस नेतृत्व अब तक फैसला नहीं ले पाया है. हालांकि, जयराम रमेश इस मुद्दे पर उठ रहे सवालों को शांत करते हुए कह रहे हैं कि कल यानी गुरुवार को सीएम के नाम की घोषणा कर दी जाएगी.
मुख्यमंत्री पद की रेस में कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल शुरू से ही सबसे आगे बताए जा रहे हैं, जबकि वीडी सतीशन उनके रास्ते में बड़ी चुनौती बने हुए हैं. एक छोर पर केरल में कांग्रेस के सीनियर नेता रमेश चेन्नीथला भी डटे हुए हैं. 
कुछ मसले ऐसे होते हैं जिनमें फैसला लेना मुश्किल होता है. खासकर तब, जब फैसला लेने में तर्क पर भावनाएं हावी हो जाती हों. केरल में मुख्यमंत्री चुने जाने के मामले में भी ऐसा ही लगता है. मामला पसंद-नापसंद का अपनी जगह है, स्थानीय समीकरणों में उसे फिट करने का चैलेंज अलग से है.  
वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर केरल में प्रदर्शन हो रहे हैं, जिस पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे कड़ी नाराजगी जता चुके हैं – लेकिन, अब वायनाड में जो धमकी भरे पोस्टर देखे गए हैं, हालात की गंभीरता की तरफ इशारा कर रहे हैं. 
वायनाड को अमेठी बनाने की धमकी वाले पोस्टर
मुख्यमंत्री उम्मीदवार को लेकर केरलम में विधायकों की राय जानने के लिए सीनियर नेताओं अजय माकन और मुकुल वासनिक को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था. उसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने यहां एक महत्वपूर्ण मीटिंग बुलाई थी. मीटिंग में राहुल गांधी के साथ-साथ केसी वेणुगोपाल और वीडी सतीशन भी शामिल हुए थे.
जब बात उस मीटिंग में भी नहीं बन पाई, तो केरल से पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वीएम सुधीरन, मुल्लापल्ली रामचंद्रन, के मुरलीधरन, के सुधाकरन और एमएम हसन जैसे नेताओं को भी दिल्ली बुलाया गया. कार्यकारी अध्यक्ष पीसी विष्णुनाथ, शफी परम्बिल, एपी अनिल कुमार और तिरुवंचूर राधाकृष्णन को भी दिल्ली पहुंचने का फरमान भेजा गया. मंथन जारी है, लेकिन अगर कोई नतीजा निकला है, तो सामने नहीं आया है. 
खास बात यह रही कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर बुलाई गई बैठक से पहले राहुल गांधी ने केसी वेणुगोपाल से अलग से मुलाकात की. रिपोर्ट के मुताबिक, मल्लिकार्जुन खड़गे की बुलाई मीटिंग में जब वीडी सतीशन पहुंचे तो राहुल गांधी ने उनसे उनके खिलाफ लगे आरोपों के बारे में पूछा था. राहुल गांधी जानना चाहते थे कि केरलम में उनको मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर हो रहे प्रदर्शनों में उनकी क्या भूमिका है. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के खिलाफ जो पोस्टर लगाए गए थे, उनका आरोप है कि यह काम कांग्रेस नेता वीडी सतीशन के समर्थन से ही हुआ था. बताते हैं, वीडी सतीशन ने उस वक्त स्वीकार किया कि वो केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाए जाने के खिलाफ हैं.
मीटिंग में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे दोनों ने केरलम में हो रहे प्रदर्शनों पर गहरी नाराजगी जताई थी. लेकिन, अब तो मामला उससे भी कहीं आगे बढ़ चुका है. वायनाड में कुछ ऐसे पोस्टर लगे हैं जो नेतृत्व को सीधे चैलेंज कर रहे हैं. वायनाड लोकसभा सीट से राहुल गांधी सांसद रह चुके हैं, और फिलहाल प्रियंका गांधी वाड्रा प्रतिनिधित्व कर रही हैं. 
एक पोस्टर में तो यहां तक लिखा है – वायनाड अगला अमेठी होगा (Wayanad will be next Amethi). 2019 में राहुल गांधी अमेठी की अपनी परंपरागत सीट से बीजेपी उम्मीदवार स्मृति ईरानी से हार गए, तब उनको संसद पहुंचाने में वायनाड ही मददगार बना था – बाकी पोस्टर में भी अंग्रेजी में ऐसी ही बातें लिखी गई हैं.
1. मिस्टर राहुल और प्रियंका, वायनाड को भूल जाइए. आप यहां से दोबारा नहीं जीतेंगे.
2. मिस्टर राहुल, केसी शायद आपके झोला उठाने वाले हों, लेकिन केरलम के लोग आपको कभी माफ नहीं करेंगे.
3. RG और PG, यह कोई चेतावनी नहीं है. इस बड़ी गलती के लिए केरलम आपको कभी माफ नहीं करेगा.
तीन दावेदार, और कांटे का मुकाबला
केरलम के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में तीन सीनियर नेता शामिल हैं. सीनियर नेता रमेश चेन्निथला, विधानसभा में निवर्तमान नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन और कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल. 
1. केरलम के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों से रायशुमारी को लेकर वीडी सतीशन खेमा काफी खुश है. वीडी सतीशन को केरलम के जमीनी कार्यकर्ताओं और UDF के सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का भी समर्थन हासिल है. वीडी सतीशन के समर्थकों का दावा है कि IUML का स्टैंड भी जनभावनाओं को ही दिखा रहा है. सूत्रों के हवाले मालूम हुआ है कि वीएम सुधीरन और के मुरलीधरन जैसे नेताओं की राय है कि मुख्यमंत्री के सेलेक्शन में जनभावनाओं को तरजीह दी जानी चाहिए. 
2. केसी वेणुगोपाल के समर्थकों का दावा है कि उन्हें ज्यादातर विधायकों और सांसदों का समर्थन हासिल है. वीडी सतीशन का आरोप है कि कांग्रेस महासचिव होने के नाते केसी वेणुगोपाल विधायकों पर दबाव डालकर अपने पाले में करने की कोशिश कर रहे हैं. 
3. रमेश चेन्निथला के समर्थकों की अपनी अलग दलील है. उनका कहना है कि रमेश चेन्निथला सबसे सीनियर नेता हैं जो हर हालात में कांग्रेस और गांधी परिवार के साथ डटकर खड़े रहे हैं. रमेश चेन्निथला के समर्थक उनके लंबे राजनीतिक अनुभव का हवाला देकर उनकी पैरवी कर रहे हैं. 
गांधी परिवार की पसंद बताए जा रहे केसी वेणुगोपाल के मुख्यमंत्री बनने की सूरत में नई चुनौती खड़े हो जाने की बात की जा रही है. अगर ऐसा हुआ तो केरल में दो उपचुनावों का जोखिम भी उठाना पड़ेगा. केसी वेणुगोपाल के इस्तीफा देने पर अलाप्पुझा लोकसभा चुनाव, और उनके विधायक बनने के लिए विधानसभा उपचुनाव, जिसके लिए किसी विधायक को इस्तीफा देना पड़ेगा. 
हर बार कांग्रेस में ऐसा क्यों होता है
केरलम में जो कुछ भी संभावित लग रहा है, उसकी सिर्फ झलक नहीं, बल्कि पूरी पिक्चर पहले भी कई बार देखी जा चुकी है. कर्नाटक तो ताजातरीन उदाहरण है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार दिल्ली-बेंगुलुरू एक किए हुए हैं. ऐसे ही झगड़े पहले अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच राजस्थान में देखे जा चुके हैं. छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल से लड़ते लड़ते तो टीएस सिंहदेव थक ही गए, और आखिर में हथियार डाल दिए. 
सभी मामलों में एक कॉमन बात सामने आई कि कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से ढाई-ढाई साल के कार्यकाल के बंटवारे का वादा किया गया था. जिसे पहले मौका मिला, उसने कुर्सी छोड़ी ही नहीं – और कांग्रेस नेतृत्व झगड़ा भी नहीं सुलझा सका. राजस्थान में तो राहुल गांधी और सोनिया गांधी की तरफ से काफी कोशिशें भी हुईं, लेकिन असफलता ही मिली. तब पर्यवेक्षक बनकर जयपुर गए मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को बैरंग लौटना पड़ा था.
ऐसे मुश्किल मामले अक्सर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी सुलझाती रही हैं, लेकिन हर बार पेच एक ही जगह जाकर फंस जाता है. राजस्थान के मामले में तो प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के साथ साथ तब अहमद पटेल भी लगे हुए थे, लेकिन पंचायत के फैसले लागू ही नहीं हो पाए. 
अब केरलम का नया चैप्टर उसी कड़ी में जुड़ने जा रहा है. कांग्रेस नेतृत्व जब फैसले नहीं ले पाता है, तो स्टेट यूनिट पर डाल देता है. पश्चिम बंगाल चुनाव लड़ने का फैसला भी बंगाल यूनिट पर डाल दिया गया था. वैसे ही विजय के साथ जाने फैसला भी तमिलनाडु यूनिट पर छोड़ दिया गया था. और, अब वैसे ही केरल में मुख्यमंत्री चुनने के मामले में भी कोशिश हो रही है – भविष्य की घटनाओं का अभी से अंदाजा लगाया जा सकता है.
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