Shreeom Singh
Date: 16-10-26 12:02
अंकारा/वॉशिंगटन: भारत में अमेरिकी F-35 स्टील्थ फाइटर जेट की तैनाती को लेकर तुर्की में सवाल उठने लगे हैं. तुर्की का कहना है कि अमेरिका ने रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के कारण उसे F-35 प्रोग्राम से बाहर कर दिया था. ऐसे में अब वही अमेरिका भारत में F-35 विमान कैसे भेज रहा है, जबकि भारत के पास भी रूसी S-400 सिस्टम मौजूद है?
दरअसल, राजस्थान के जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर होने वाले संयुक्त युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका ने अपने F-35 लड़ाकू विमान भेजे हैं. इसके बाद तुर्की के मीडिया और रक्षा विशेषज्ञों ने अमेरिकी नीति पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि अमेरिका भारत और तुर्की के लिए अलग-अलग नियम अपना रहा है.
तुर्की ने अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
तुर्की के कई मीडिया संस्थानों ने भारत में F-35 विमानों की मौजूदगी पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि तुर्की NATO का सदस्य होने के बावजूद अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, जबकि भारत के मामले में अमेरिका का रवैया अलग दिखाई देता है.
अमेरिका ने तुर्की को F-35 प्रोग्राम से इसलिए बाहर किया था, क्योंकि उसने रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था. अमेरिकी अधिकारियों को डर था कि अगर F-35 विमान और रूसी S-400 सिस्टम एक साथ इस्तेमाल किए गए, तो रूस को अमेरिकी विमान की तकनीक से जुड़ी अहम जानकारी मिल सकती है. इससे F-35 की स्टील्थ क्षमता और दूसरी तकनीकों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है.
भारत के पास भी रूस से खरीदे गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम हैं. भारत ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इस सिस्टम का इस्तेमाल किया था. इसी वजह से तुर्की में अमेरिका की नीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
भारत ने रूस से कब खरीदा था S-400 सिस्टम?
भारत ने साल 2018 में रूस के साथ S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए समझौता किया था. यह सौदा करीब 5.33 अरब डॉलर का था. इसके तहत भारत को पांच स्क्वाड्रन मिलने थे. खबर में दी गई जानकारी के मुताबिक, इनमें से चार स्क्वाड्रन भारत को मिल चुके हैं, जबकि पांचवें की डिलीवरी का इंतजार है.
S-400 लंबी दूरी तक हवाई खतरों का पता लगाने और उन्हें निशाना बनाने में सक्षम एयर डिफेंस सिस्टम है. भारत अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इसका इस्तेमाल करता है.
तुर्की को क्यों लग रहा है दोहरा रवैया?
तुर्की के रक्षा विशेषज्ञों का सवाल है कि अगर S-400 की मौजूदगी F-35 की सुरक्षा के लिए खतरा है, तो अमेरिका भारत में अपने इन विमानों को भेजने के लिए तैयार कैसे हो गया? तुर्की के अखबार ‘येनी अकित’ ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा है कि भारत और तुर्की के मामले में अमेरिकी रवैया अलग नजर आता है.
अमेरिका ने तुर्की से साफ कहा है कि जब तक वह अपने S-400 सिस्टम को हटाता नहीं है, तब तक उसकी F-35 प्रोग्राम में वापसी नहीं हो सकती. इसी शर्त के चलते तुर्की अब इस सिस्टम से छुटकारा पाने की कोशिश कर रहा है.
S-400 को लेकर रूस ने भी बढ़ाई तुर्की की मुश्किल
तुर्की के सामने परेशानी यह है कि वह S-400 सिस्टम को दूसरे देश को बेचने की कोशिश कर रहा है, लेकिन रूस की मंजूरी के बिना ऐसा करना आसान नहीं है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि तुर्की को S-400 से जुड़े समझौते का पालन करना होगा. रूस की मंजूरी के बिना इस सिस्टम को किसी दूसरे देश को नहीं सौंपा जा सकता.
ऐसे में तुर्की के लिए S-400 को हटाकर F-35 प्रोग्राम में वापस आने का रास्ता मुश्किल बना हुआ है. दूसरी ओर, भारत में अमेरिकी F-35 विमानों की मौजूदगी ने इस विवाद को फिर से चर्चा में ला दिया है.
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