भारत साल के आखिर तक पेश करेगा अपना फाउंडेशनल AI मॉडल, अश्विनी वैष्णव ने बताया प्लान – Aaj Tak

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दुनियाभर में चीनी AI मॉडल डीपसीक ने हलचल मचा दी है. इस बीच केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कहा कि भारत का फाउंडेशनल AI मॉडल इस साल के आखिर तक तैयार हो जाना चाहिए और कुछ भारतीय कंपनियों ने वाकई में काफी पावरफुल मॉडल बनाए हैं. इंडिया टुडे-बिजनेस टुडे के ‘बजट राउंड टेबल 2025’ कार्यक्रम में बोलते हुए वैष्णव ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा 10 महीने के भीतर भारत का AI मॉडल सभी के सामने होगा. 
कैसा होगा भारत का AI मॉडल
उन्होंने कहा कि यह ओपन AI और अन्य की तुलना में छोटा होने की संभावना है, लेकिन सुविधाओं के मामले में काफी ताकतवर है. इसके बाद मॉडल का बड़ा वर्जन भी पेश किया जाएगा ताकि हमारा मॉडल दुनिया के टॉप मॉडलों के साथ मुकाबला कर सके. चीन के डीपसीक ने वैश्विक स्तर पर प्रमुख टेक प्लेयर्स के बाजार मूल्यांकन को नुकसान पहुंचाया है. चीनी कंपनी अमेरिकी तकनीक दिग्गजों की तुलना में बहुत कम लागत पर सबसे एडवांस मॉडल बनाने में सक्षम है.
केंद्र सरकार ने भी 10 हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ देश में एआई मिशन शुरू किया है. आईटी मिनिस्टर ने कहा कि हमने 18000 ग्राफिक प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) को सूचीबद्ध किया है और 10,000 पहले से ही उपलब्ध हैं. पहली चीज जो आपको चाहिए वह है कंप्यूटिंग शक्ति और यह सभी के लिए उपलब्ध है. इसे कुछ दिनों में शुरू कर दिया जाएगा और रिसर्चर्स, कॉलेजों, शिक्षाविदों और अन्य लोगों की इस तक पहुंच होगी और वे इस पर काम कर सकेंगे. इस क्षेत्र में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के बारे में मंत्री ने कहा कि एआई अभी शुरू ही हुआ है और हम इसमें अभूतपूर्व इनोवेशन देखेंगे.
प्रोवाइडर से प्रोडक्ट नेशन का सफर
उन्होंने बताया कि भारत इनोवेशन के मामले में टॉप 4 में है और हमें पूरा भरोसा है कि इस तकनीक में भी हम आगे रहेंगे. इसके अलावा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी की दुनिया में हर कोई एक आधार लेता है और फिर आगे कदम बढ़ाता है. अश्विनी वैष्णव ने मानसिकता में बदलाव लाने और भारत को सर्विस प्रोवाइडर से प्रोडक्ट नेशन बनने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने घोषणा की कि इस साल भारत में निर्मित पहली चिप्स बाजार में आ जाएंगी.
अश्विनी वैष्णव ने देश के AI मॉडल को लेकर तीन चीजें अहम बताईं जिनमें मूल में कोडिंग के साथ एक फाउंडेशनल मॉडल, इसे कुशलतापूर्वक प्रशिक्षित करने के लिए डेटा सेट और अपना खुद का जीपीयू होना शामिल है. उन्होंने कहा कि हमने टेक्नोलॉजी के सभी तीन घटकों पर काम किया है. सभी स्टार्टअप्स का कोर और बड़ी संख्या में डेटा सेट पर पूरा कंट्रोल होगा जो मौसम, ट्रैफिक और कृषि जैसे क्षेत्र पर फोकस है.
मंत्री ने कहा कि पूरा सॉवरेन डेटा बहुत बड़ा है और इसका इस्तेमाल हमारे मॉडलों को ट्रेंड करने के लिए किया जाएगा. GPU सेमीकंडक्टर, प्रोसेसर और चिप्स के काम के लिए हम कई विकल्पों पर काम कर रहे हैं जैसे ओपन सोर्स या लाइसेंस लेना और खुद का GPU बनाना, इससे 3-5 साल में खुद का GPU मिल जाएगा.
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