भारत से दोस्ती बढ़ाना चाहता है चीन, इंडियन आर्मी को कहा- थैंक्यू, आखिर चीन का क्यों बदल रहा दिल? – India.Com

Published By: Arun Kumar | Updated: Jul 22, 2026, 3:54 PM
चीन की सेना या चीन के राजनेता भारत से दोस्ती की बात करें तो बात कुछ हजम नहीं होती. इतिहास में दोनों के रिश्ते भले कितने ही मधुर क्यों न रहे हों, लेकिन आधुनिक इतिहास में दोनों प्रतिद्वंद्वी की तरह पेश आते हैं. समय-समय पर दोनों देशों के बीच सीमाओं को लेकर टकराव की खबरें भी अकसर सामने आती हैं. 1962 में दोनों के बीच एक युद्ध भी हो चुका है. (तस्वीर: AI)
ऐसे में चीन की सेना भारत की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाती दिख रही है. इस पर जानकारों को हैरानी है. चीन ने हाल ही में अपनी सेना की स्थापना की 99वीं वर्षगांठ का समारोह सेलीब्रेट किया है. इस मौके पर उसने भारतीय सेना द्वारा उस पर किए एक साहसिक काम की सराहना करते हुए उसे थैंक्यू कहा. (तस्वीर: unsplash.com/)
चीनी सेना के इस थैंक्यू की वजह पिछले साल केरल के तट के पास उसके एक कार्गो शिप में आग लगने के बाद भारतीय सेना की दरियदिली थी. दरअसल पिछले साल चीन के कार्गो शिप में आग लगी तो भारतीय सेना (नेवी) ने उसके 12 नाविकों (क्रू मेंबर्स) को बचाने का काम किया था. चीन भारतीय नेवी के इसी साहसिक काम के लिए उसे दिल से थैंक्यू बोल रहा है. (तस्वीर: AI)
न्यूज एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में चीन के डिफेंस अताशे रियर एडमिरल यू जियान ने इस मुद्दे पर मंगलवार, 21 जुलाई को अपनी ये भावनाएं जाहिर कीं. चीन के रियर एडमिरल यू जियान ने पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के कार्यक्रम में कहा, 'चीन और भारत अहम पड़ोसी हैं और दोनों ही विकास और आमूलचूल बदलाव के अहम दौर से गुजर रहे हैं. हमें खुशी है कि हमारे नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन में, चीन-भारत संबंध सुधार और विकास की सही राह पर लौट आए हैं.' (तस्वीर: unsplash.com/)
उन्होंने कहा, 'हम यह नहीं भूलेंगे कि पिछले साल जून में केरल के तट के पास हमारे एक कार्गो शिप में आग लगने और धमाका होने के बाद भारतीय सेना ने 12 चीनी क्रू मेंबर्स को बचाया था.' इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हमारे मतभेदों की तुलना में हमारे साझा हित कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं. (तस्वीर: unsplash.com/)
इस मौके पर चीनी रियर एडमिरल ने कहा कि हम भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं. इससे राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से आपसी बातचीत बनी रहे. आपसी भरोसा बढ़े और बातचीत से जरिए आपसी सहयोग को बढ़ावा मिले. इससे दोनों देशों के लोगों की भलाई का काम हो सके. (तस्वीर: unsplash.com/)
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