'भोले भक्त हमारी बनाई ड्रेस पहनते हैं…', सहारनपुर के मुस्लिम कारीगर की बात सुन भावुक हो जाएंगे आप – Aaj Tak News

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सावन का महीना शुरू होते ही उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कांवड़ यात्रा की रौनक बाजारों में साफ दिखाई देने लगी है. शहर की गलियां भगवा रंग में रंग चुकी हैं और भगवान शिव के भक्तों के लिए कांवड़ ड्रेस तैयार करने वाली फैक्ट्रियों में दिन-रात काम चल रहा है. खास बात यह है कि इन ड्रेसों को तैयार करने वाले बड़ी संख्या में मुस्लिम कारीगर हैं, जो पूरे उत्साह के साथ भोले भक्तों के लिए विशेष परिधान तैयार कर रहे हैं.
कांवड़ यात्रा ने इस बार भी सहारनपुर के कारोबार को नई रफ्तार दी है. दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है और फैक्ट्रियों में ऑर्डर पूरे करने की होड़ लगी हुई है. सावन के मौसम में शहर का कपड़ा बाजार पूरी तरह कांवड़ यात्रा के रंग में रंग जाता है.
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कारीगरों का कहना है कि उनके लिए यह केवल कारोबार नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और विश्वास की मिसाल भी है. वर्षों से वे श्रद्धालुओं के लिए ड्रेस तैयार कर रहे हैं और हर बार इस काम को पूरी लगन और सम्मान के साथ करते हैं.
2010 से बना रहे हैं कांवड़ ड्रेस
सहारनपुर के फैक्ट्री मालिक फरमान अहमद ने बताया कि वह वर्ष 2010 से सिलाई और कांवड़ ड्रेस बनाने का काम कर रहे हैं. उनके मुताबिक, सावन के सीजन में काम इतना बढ़ जाता है कि एक से डेढ़ महीने पहले ही तैयारियां शुरू करनी पड़ती हैं ताकि समय पर सभी ऑर्डर पूरे किए जा सकें.
उन्होंने बताया कि इस बार बाजार में महाकाल और भोलेनाथ की प्रिंट वाली ड्रेस की सबसे ज्यादा मांग है. करीब 50 नए डिजाइन इस सीजन में बाजार में आए हैं और उनकी फैक्ट्री में अब तक एक लाख से ज्यादा कांवड़ ड्रेस तैयार की जा चुकी हैं.
सहारनपुर
फरमान अहमद के अनुसार, जिस तरह सर्दियों के मौसम में उनका कारोबार चलता है, उसी तरह सावन का सीजन भी उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है. इस दौरान बड़ी संख्या में व्यापारी देश के अलग-अलग हिस्सों से ड्रेस खरीदने सहारनपुर पहुंचते हैं.
‘ड्रेस बनाते समय गर्व महसूस होता है’
फरमान अहमद कहते हैं कि कांवड़ियों के लिए ड्रेस बनाना उनके लिए सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि सम्मान और खुशी का विषय है. उन्होंने कहा, जब भोले भक्त हमारी बनाई हुई ड्रेस पहनकर गंगाजल लेने जाते हैं तो दिल में गर्व महसूस होता है. हमें लगता है कि हमारी मेहनत भी इस आस्था की यात्रा का हिस्सा बन रही है.
उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 से यह काम कर रहे हैं, लेकिन आज तक किसी ने उनसे यह सवाल नहीं किया कि वह मुस्लिम होकर कांवड़ ड्रेस क्यों बना रहे हैं. उनके मुताबिक, सहारनपुर की पहचान ही आपसी सौहार्द और भाईचारे से है.
फरमान का कहना है कि शहर में हिंदू और मुस्लिम हर साल मिल-जुलकर सभी त्योहार मनाते हैं. यही वजह है कि यहां कभी धर्म के आधार पर काम को नहीं देखा जाता, बल्कि मेहनत और विश्वास को प्राथमिकता दी जाती है.
सहारनपुर
गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बना सहारनपुर
कांवड़ यात्रा के दौरान सहारनपुर का यह नजारा गंगा-जमुनी तहजीब की मजबूत तस्वीर पेश करता है. एक ओर शिवभक्त कांवड़ यात्रा की तैयारियों में जुटे हैं तो दूसरी ओर मुस्लिम कारीगर पूरे समर्पण के साथ उनके लिए ड्रेस तैयार कर रहे हैं.
सावन के इस मौसम में कारोबार भी तेज हुआ है और हजारों परिवारों को रोजगार मिला है. कपड़ा बाजार से लेकर सिलाई इकाइयों तक लगातार काम जारी है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है.
सहारनपुर की यह तस्वीर बताती है कि आस्था, मेहनत और भाईचारा जब साथ चलते हैं तो समाज में सौहार्द की ऐसी मिसालें सामने आती हैं, जो लोगों को जोड़ने का काम करती हैं. कांवड़ यात्रा के बीच मुस्लिम कारीगरों की यह पहल इसी साझा संस्कृति और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बन गई है.
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