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उत्तर प्रदेश पुलिस ने साल 2019 में बिना पूर्व नोटिस के घर तोड़ने के मामले में महराजगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी अमरनाथ उपाध्याय और अन्य अधिकारियों समेत कई लोगों पर FIR दर्ज की है. यह FIR सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सोमवार को कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई.
FIR में पूर्व डीएम अमरनाथ उपाध्याय, तत्कालीन अपर जिलाधिकारी कुञ्ज बिहारी अग्रवाल, नगर पालिका के कार्यकारी अधिकारी राजेश जायसवाल, PWD अधिकारियों मणिकांत अग्रवाल और अशोक कन्नौजिया, और NHAI अधिकारी दिग्विजय मिश्रा समेत अन्य इंजीनियर, पुलिस अधिकारी और अज्ञात लोगों को नामजद किया गया है.
DM समेत कई अधिकारियों के खिलाफ FIR
इन पर भारतीय दंड संहिता की धाराओं 147 (दंगा), 166 (कानून का उल्लंघन), 167 (गलत दस्तावेज बनाना), 323 (चोट पहुंचाना), 504 (जानबूझकर अपमान), 506 (धमकी), 452 (घर में जबरन घुसना), 420 (धोखाधड़ी), 467 (कीमती दस्तावेज की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का इस्तेमाल) और 120B (आपराधिक साजिश) समेत अन्य धाराएं लगाई गई हैं.
यह मामला 2019 का है, जब रोड चौड़ीकरण के नाम पर महराजगंज में एक घर को बिना नोटिस के तोड़ा गया. पीड़ित पत्रकार मनोज तिब्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. 6 नवंबर को कोर्ट ने यूपी सरकार को फटकार लगाते हुए पीड़ित को ₹25 लाख का मुआवजा देने और FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था.
कोर्ट ने दिया पीड़ित को 25 लाख का मुआवजा देने का ऐलान
इस मामले पर कोतवाली सदर प्रभारी सतेंद्र राय ने बताया कि सरकार के आदेश पर FIR दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच CB-CID करेगी. बता दें, बीते छह नवंबर को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा था कि प्रक्रिया का पालन किए बगैर किसी के घर में घुसना, तोड़ना अराजकता है. पीठ ने यूपी सरकार को नगर पालिका परिषद महराजगंज के हमीद नगर में 2019 में सड़क चौड़ी करने के लिए घरों को तोड़े जाने के मसले पर पीड़ित मनोज टिबड़ेवाल की ओर से भेजे पत्र पर संज्ञान लेकर शुरू किए गए मामले में आदेश दिया था.
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