महिला के पेट में 13 पेन, 5 चम्मच और एक मोमबत्ती पाई गई, डॉक्टरों ने क्या कहा? – BBC

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एक महिला के पेट में 13 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और एक मोमबत्ती थी. इनमें से एक पेन 25 सेंटीमीटर लंबा था.
डॉक्टरों ने ये सभी चीज़ें सफलतापूर्वक बाहर निकाल लीं और महिला की जान बचा ली.
लेकिन सवाल यह है कि ये सारी चीज़ें एक महिला के पेट में गईं तो कैसे?
आमतौर पर, खाने की चीज़ों के अलावा कोई छोटी-सी चीज़ भी निगलने पर तेज़ पेट दर्द या दस्त की समस्या होती है.
लेकिन पेट में मौजूद इन सभी चीज़ों की वजह से उस महिला को आख़िर किस तरह की परेशानी हुई?
इन चीज़ों को किस तरह बाहर निकाला गया, इसकी जानकारी सर्जरी करने वाले डॉक्टरों ने बीबीसी को दी है.
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मिली जानकारी के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के पालनाडु ज़िले के नरसारावपेट की 33 साल की एक शादीशुदा महिला के सीने में बाईं तरफ़ तेज़ दर्द हो रहा था.
इसके बाद उसके परिवार वालों ने उसे माताश्री प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया.
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डॉक्टरों ने तुरंत उसका ईसीजी और एंडोस्कोपी किया. डॉ. रामचंद्र रेड्डी ने बीबीसी को बताया कि ईसीजी में सब कुछ ठीक था. लेकिन एंडोस्कोपी के दौरान उसके पेट में पेन, चम्मच और मोमबत्ती जैसी कुछ बाहरी चीज़ें मिलीं.
डॉ. रामचंद्र रेड्डी ने बताया कि सीटी स्कैन से इसकी तुरंत पुष्टि करने के बाद उन्होंने एंडोस्कोपी और लैप्रोस्कोपी सर्जरी करने का फ़ैसला किया.
उन्होंने बताया कि इस सर्जरी के ज़रिए सभी पेन, मोमबत्तियां और लकड़ी के चम्मच निकाल दिए गए.
बच्चों के इस्तेमाल वाला 25 सेंटीमीटर लंबा एक पेन महिला के पेट में छेद कर चुका था. इसकी वजह से 'न्यूमोमीडियास्टिनम' नाम की स्थिति पैदा हो गई थी.
उन्होंने बताया कि महिला को दर्द हो रहा था, इसलिए वह उनके पास आई थी.
डॉ. रामचंद्र रेड्डी ने बताया कि इसके बाद लैप्रोस्कोपी के ज़रिए महिला के पेट से ये चीज़ें निकाली गईं.
उन्होंने बताया कि महिला के पेट से कुल 13 पेन, एक मोमबत्ती और 5 लकड़ी के चम्मच निकाले गए. उन्होंने यह भी बताया कि महिला की हालत अभी स्थिर है.
इस तरह की समस्या आमतौर पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे लोगों में होती है.
डॉ. रामचंद्र रेड्डी ने कहा कि मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों की देखभाल करना और यह देखना कि वे अपनी दवाइयां ले रहे हैं या नहीं, माता-पिता की ज़िम्मेदारी है.
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संबंधित महिला ने बताया कि एक साल पहले भी उसने इसी तरह चार पेन निगल लिए थे. सर्जरी करके उन्हें बाहर निकाला गया था.
डॉ. रामचंद्र रेड्डी ने बताया कि वह मानसिक समस्याओं से जूझ रही थीं और उनका मनोचिकित्सक के पास भेजा गया था. फ़िलहाल उनका इलाज चल रहा है.
हालांकि, हर कोई ऐसी चीज़ें नहीं निगल सकता. उन्होंने साफ़ किया कि ऐसा अक्सर मानसिक परेशानी से जूझ रहे मरीज़ ही करते हैं.
उन्होंने कहा कि 25 सेंटीमीटर लंबी चीज़ का पेट में पहुंचना बहुत दुर्लभ है. अपने करियर में उन्होंने पहली बार किसी को इतना बड़ा पेन निगलते हुए देखा है.
डॉक्टर ने बताया कि महिला का अपने पिता से झगड़ा हुआ था. इसके बाद उसने ये चीज़ें निगल ली थीं.
हालांकि, डॉ. रामचंद्र रेड्डी ने कहा कि कई लोग ऐसी चीज़ें खाते हैं, जिन्हें पचाया नहीं जा सकता, जैसे बाल वगैरह.
इस तरह के मामलों को ट्राइकोबेज़ोअर्स कहा जाता है.
अगर निगलते समय अंदर कहीं छेद न हो, तो आंतों में रुकावट हो सकती है और उल्टी हो सकती है.
बोल्ट और पेन जैसी नुकीली चीज़ों से आंतों में छेद भी हो सकता है.
उन्होंने आगे बताया कि कुछ छोटी चीज़ें मल के ज़रिए बाहर निकल सकती हैं. छोटे बच्चे अनजाने में सिक्के निगल लेते हैं. कई बार उनके माता-पिता को भी इसका पता नहीं चलता. बाद में वे सिक्के मल के ज़रिए बाहर निकल जाते हैं.
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उन्होंने यह भी बताया कि अगर आंतों में छेद हो जाए, तो कुछ मरीज़ों को संक्रमण हो सकता है और सेप्टिक शॉक आ सकता है. यह जानलेवा हो सकता है.
गुंटूर के डॉ. साई कृष्णा ने बीबीसी को बताया कि ऐसे मामले कभी-कभी सामने आते हैं. इनमें से 90 फ़ीसदी मामलों में मरीज़ मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे होते हैं.
उन्होंने बताया कि ऐसे मरीज़ एक साथ सभी चीज़ें नहीं निगलते. कई बार वे जो भी चीज़ें निगलते हैं, वे सभी पेट में ही रह जाती हैं. उन्होंने आगे बताया कि जब ये चीज़ें पेट में फंस जाती हैं, तभी दर्द होता है. इन चीज़ों को पेट से तुरंत निकालने के लिए एंडोस्कोपी और लैप्रोस्कोपी जैसी सर्जरी की जाती हैं.
उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्होंने एक मरीज़ के पेट से 20 बैटरियां निकाली थीं. उनके मुताबिक, निगलने के बाद ये चीज़ें कभी-कभी महीनों तक पेट में रह सकती हैं. पेट में जाने के बाद ये आंतों तक नहीं पहुंचतीं. अगर वे आंतों में चली जाएं, तो एक्स-रे करना पड़ता है और सर्जरी करनी पड़ती है.
ऐसे मामलों में सर्जरी के दौरान लैप्रोस्कोपी की जाती है.
डॉ. साई कृष्णा ने कहा कि ट्राइकोबेज़ोअर के मामलों में बाल पेट में ही जमा रहते हैं और उन्हें सर्जरी करके निकालना पड़ता है.
उन्होंने बताया कि नरसारावपेट में हुई घटना में मरीज़ के शरीर में एक छेद हो गया था. यह एक बहुत बड़ी समस्या थी. इसलिए डॉक्टरों को महिला की तुरंत सर्जरी करनी पड़ी.
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द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में उत्तर प्रदेश के हापुड़ के एक अस्पताल में 40 साल के एक व्यक्ति के पेट से 29 स्टील के चम्मच, 19 टूथब्रश और दो पेन निकाले गए.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सर्जरी से कम से कम एक महीने पहले उसे ग़ाज़ियाबाद के एक नशामुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया था.
हालांकि, द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मरीज़ ने बताया कि नशामुक्ति केंद्र में भर्ती होने के बाद किसी ने उसकी ठीक से देखभाल नहीं की और उसे ठीक से खाना भी नहीं दिया गया.
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ग़ुस्से और हताशा में उस व्यक्ति ने ख़ुद को नुक़सान पहुंचाने के लिए इन चीज़ों को निगल लिया.
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन ने भी ऐसे ही एक मामले का हवाला देते हुए बताया है कि ईरान के अहवाज़ स्थित इमाम ख़ोमैनी अस्पताल के डॉक्टरों ने 2024 में एक 36 साल के व्यक्ति के पेट से 450 से ज़्यादा धातु की चीज़ें सफलतापूर्वक निकाली थीं.
तेज़ पेट दर्द, लगातार उल्टी और तरल या ठोस चीज़ें खाने-पीने में परेशानी के बाद उस व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. मरीज़ के एक्स-रे और एंडोस्कोपी में उसके पेट में कई धातु की चीज़ें मिलीं.
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मरीज़ की गैस्ट्रोस्टॉमी सर्जरी की गई. उसके पेट से 2,900 ग्राम वज़न के 452 स्क्रू, नट, चाबियां, पत्थर और धातु की दूसरी चीज़ें निकाली गईं.
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन के मुताबिक, निगली गई चीज़ों को सफलतापूर्वक बाहर निकाल पाना भी दुर्लभ है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीज़ों को निगलना एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है और यह बच्चों में सबसे ज़्यादा देखी जाती है. हालांकि, कुछ वयस्कों में, ख़ासकर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों और जेलों में भी यह समस्या आम तौर पर देखी जाती है.
दवाइयों और थेरेपी की मदद से मानसिक बीमारियों का इलाज संभव है. इसके लिए आपको मनोचिकित्सक की मदद लेना ज़रूरी है. अगर आपको या आपके किसी परिचित में इस तरह की मानसिक बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो इन हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करके मदद ली जा सकती है.
हितगुज हेल्पलाइन, मुंबई – 022-24131212
सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्रालय – 1800-599-0019 (13 भाषाओं में उपलब्ध)
इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज़ – 9868396824, 9868396841, 011-22574820
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज़ – 080-26995000
विद्यासागर इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड एलाइड साइंसेज़, 24×7 हेल्पलाइन – 011-29802980
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