मुंबई लोकल में फूटा यात्रियों का गुस्सा: पंखे बंद होने पर दो बार खींची चेन, थमी सेंट्रल लाइन की रफ्तार – Jagran

मुंबई लोकल ट्रेन में पंखे बंद होने से गुस्साए यात्रियों ने दो बार अलार्म चेन खींची, जिससे सेंट्रल लाइन पर ट्रेन सेवाएं बाधित हुईं। भीषण गर्मी में हुई …और पढ़ें
पंखे बंद होने पर दो बार खींची चेन।
मुंबई लोकल में पंखे बंद होने पर यात्रियों ने चेन खींची।
सेंट्रल लाइन पर दो बार चेन खींचने से ट्रेनें लेट हुईं।
रेलवे ने यात्रियों से चेन न खींचने की अपील की, रखरखाव सुधारेगा।
राजेंद्र बी. अकलेकर, मुंबई। मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन में शुक्रवार की सुबह भारी हंगामा देखने को मिला। खचाखच भरी एक लोकल ट्रेन में पंखे न चलने से गुस्साए यात्रियों ने सुबह के पीक ऑवर (भीड़भाड़ वाले समय) में दो बार अलार्म चेन (एसीपी) खींचकर ट्रेन को रोक दिया। भीषण गर्मी और उमस के बीच ट्रेन रुकने से पूरी सेंट्रल लाइन की लोकल सेवाएं लेट हो गईं, जिससे हजारों नौकरीपेशा लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
34 डिग्री तापमान और बंद पंखे
शुक्रवार सुबह मुंबई का तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास था। सुबह के समय दिवा से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) जाने वाली 15 डिब्बों की लोकल ट्रेन में पैर रखने की जगह नहीं थी। इसी बीच ट्रेन के कोच नंबर 2117A के सारे पंखे अचानक बंद हो गए। उमस और गर्मी से यात्रियों का दम घुटने लगा, जिससे उनका गुस्सा फूट पड़ा।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, पंखे ठीक न होने पर यात्रियों ने दो बार ट्रेन को रोका। सुबह 8:46 बजे दिवा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर यात्रियों ने चेन खींची, जिससे ट्रेन 8:48 तक खड़ी रही। जब ट्रेन आगे बढ़ी और पंखे फिर भी नहीं चले, तो सुबह 9:02 बजे ठाणे स्टेशन पर दोबारा चेन खींची गई। यहां ट्रेन 9:08 बजे तक यानी पूरे 6 मिनट रुकी रही। इन दो रुकावटों के कारण पीछे आ रही अन्य लोकल ट्रेनें भी कतार में खड़ी हो गईं और पूरी सेंट्रल लाइन की रफ्तार थम गई।
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि यह समस्या सिर्फ पंखों तक सीमित नहीं है। लोकल ट्रेनों में अक्सर ट्यूबलाइट्स खराब रहती हैं, डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड काम नहीं करते और अंदर होने वाली घोषणाएं भी सुनाई नहीं देतीं।
अक्षय जांगड़ा (यात्री व टूरिज्म प्रोफेशनल)- लोकल ट्रेनें मुंबई की जान हैं, लेकिन पंखे, वेंटिलेशन और टूटी-फूटी चीजों पर ध्यान नहीं दिया जाता। गर्मी में सफर नरक जैसा हो जाता है। रेलवे को यात्रियों की सुविधाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।
शार्दुल साबदे (निजी कंपनी के जनरल मैनेजर)- सेंट्रल रेलवे के खराब मैनेजमेंट ने यात्रियों को निराश कर दिया है। अब तो लोग बस यही दुआ करते हैं कि ट्रेन जैसे-तैसे चल जाए। यहाँ तक कि महंगी एसी लोकल भी 30 से 60 मिनट की देरी से चल रही हैं। यह प्रशासनिक नाकामी है।”
इस घटना पर सेंट्रल रेलवे के अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे ऐसी समस्याओं के लिए अलार्म चेन न खींचें। अधिकारियों का कहना है कि पीक ऑवर में एक ट्रेन रुकने से ‘डोमिनो इफेक्ट’ (चैन रिएक्शन) होता है, जिससे उसके पीछे आ रही सभी ट्रेनें लेट हो जाती हैं और हजारों लोग फंस जाते हैं।
मेंटेनेंस को लेकर एक अन्य अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि सभी ट्रेनों की जांच यात्रा खत्म होने के बाद कारशेड में की जाती है। रेलवे जल्द ही एक विशेष अभियान शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत सभी कारशेड में लोकल ट्रेनों के अंदर की बिजली व्यवस्था और पंखों को ठीक किया जाएगा।

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