'जो कहते हैं, वही करते हैं': PCMC के रिटायर्ड इंजीनियर ने अपने घर को ही बना दिया जल संरक्षण का 'मॉडल' – Jagran

पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम के रिटायर्ड इंजीनियर प्रवीन लाडकत ने अपने घर को जल संरक्षण का मॉडल बनाया है, जहाँ वे एयरेटर और ग्रे-वॉटर रीसाइक्लिंग जैसी तकनी …और पढ़ें
पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) के जल आपूर्ति विभाग के रिटायर्ड प्रमुख प्रवीन लाडकत।
नलों में एयरेटर लगाकर प्रतिदिन 13 लीटर पानी बचाते हैं।
नहाने के पानी को रीसाइकिल कर पौधों को सींचते हैं।
जलदिंडी आंदोलन के संस्थापक, जन जागरूकता पर जोर देते हैं।
अर्चना दहीवाल, मुंबई। ज्यादातर लोगों के लिए ‘पानी बचाओ’ सिर्फ भाषण और चर्चा का विषय होता है। लेकिन पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) के जल आपूर्ति विभाग के रिटायर्ड प्रमुख प्रवीन लाडकत के लिए यह पिछले कई दशकों से जीने का तरीका है।
नौकरी के दौरान पानी की सप्लाई लाइनों में खराबी ढूंढने और जटिल समस्याओं को चुटकियों में सुलझाने के लिए मशहूर लाडकत, रिटायरमेंट के बाद भी अपने घर पर उन्हीं सिद्धांतों का पालन कर रहे हैं जिनका उन्होंने जीवनभर प्रचार किया। वाल्हेकरवाड़ी (सेक्टर 32) में बना उनका दो मंजिला मकान (1,350 वर्ग फीट) आज इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे छोटे-छोटे बदलावों से पानी की बड़ी बर्बादी रोकी जा सकती है।
छोटे बदलाव, बड़ी बचत (नल में एयरेटर)
लाडकत परिवार ने करीब 15 साल पहले अपने घर के सभी नलों में ‘एयरेटर’ (पानी के बहाव को नियंत्रित करने वाला छोटा उपकरण) लगवाए थे। यह उपकरण पानी के प्रेशर (बल) को कम कर देता है, लेकिन इस्तेमाल करने में कोई दिक्कत नहीं होती।
लाडकत ने बताया, “नलों में तेज प्रेशर के कारण बहुत सारा पानी बेकार बह जाता है। बहाव कम करके हम बिना किसी समझौते के हर दिन लगभग 13 लीटर पानी बचा लेते हैं।” यह बहुत ही कम लागत वाला और असरदार उपाय है।
लाडकत ने अपने घर में ‘ग्रे-वाटर रीसाइक्लिंग’ (इस्तेमाल हो चुके पानी को दोबारा काम में लाना) का एक अनोखा और देसी सिस्टम बनाया है। उन्होंने हर बाथरूम में दोहरी जल निकासी की व्यवस्था की है।
नहाने का अनुशासित नियम
परिवार नहाते समय एक कड़ा नियम अपनाता है। जब तक वे साबुन नहीं लगाते, तब तक का साफ पानी बगीचे वाले टैंक में भेजा जाता है। जैसे ही साबुन या शैम्पू का इस्तेमाल होता है, वे लाइन बदलकर पानी को सामान्य नाले में डाइवर्ट कर देते हैं ताकि केमिकल वाला पानी पौधों में न जाए। इस तरीके से वे हर दिन 15 लीटर पानी बचाकर पौधों को सींचते हैं।
PCMC में अपनी सेवा के दौरान लाडकत का मानना था कि सिर्फ बड़े-बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स से पानी की समस्या हल नहीं होगी, जब तक आम जनता पानी की कीमत नहीं समझेगी। इसके लिए उन्होंने कई अनोखे प्रयास किए। 
वे स्कूली बच्चों, हाउसिंग सोसायटियों और मीडिया कर्मियों को निगडी वाटर प्यूरिफिकेशन सेंटर (जल शुद्धिकरण केंद्र) ले जाते थे, ताकि लोग देख सकें कि नदी के गंदे पानी को पीने लायक बनाने में कितनी मेहनत लगती है।
घरेलू सहायिकाओं को ट्रेनिंग
लाडकत ने एक अनोखी पहल के तहत घरों में बर्तन और कपड़े धोने वाली महिलाओं को भी ट्रीटमेंट प्लांट का दौरा कराया। उनका मानना था कि अनजाने में सबसे ज्यादा पानी इन्हीं कामों में बहता है, इसलिए उनका जागरूक होना बेहद जरूरी है।

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