Shreeom Singh
Date: 30-10-26 21:07
पाकिस्तान में सेना और सरकार के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर देश के बड़े प्रांतों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने की योजना बनाने के आरोप लग रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस प्लान के तहत सिंध और पंजाब जैसे बड़े प्रांतों को 12 से 20 हिस्सों में बांटने की तैयारी थी. हालांकि, इस प्रस्ताव का विरोध शुरू होते ही सरकार के भीतर भी मतभेद सामने आने लगे.
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार को सहयोगी पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के विरोध का सामना करना पड़ा. बिलावल भुट्टो ने भी इस योजना पर सवाल उठाए. फिलहाल इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाना मुश्किल नजर आ रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या शहबाज शरीफ सेना प्रमुख आसिम मुनीर के फैसलों को रोक पाएंगे?
क्या थी पाकिस्तान को बांटने की योजना?
इस मामले की शुरुआत 31 जुलाई को हुई, जब पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि देश का मौजूदा प्रशासनिक ढांचा ठीक से काम नहीं कर रहा है. उन्होंने इसे बदलने और सिस्टम को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत बताई.
नकवी के इस बयान को पाकिस्तान में नए प्रशासनिक क्षेत्र बनाने की योजना से जोड़कर देखा गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रस्ताव के तहत सिंध और पंजाब जैसे बड़े प्रांतों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने की बात थी. इससे प्रांतीय सरकारों की ताकत कम हो सकती थी और केंद्र का नियंत्रण बढ़ सकता था.
संविधान की वजह से आसान नहीं है रास्ता
पाकिस्तान में किसी प्रांत की सीमाएं बदलना इतना आसान नहीं है. वहां के संविधान के आर्टिकल 239(4) के मुताबिक, किसी प्रांत की सीमा में बदलाव के लिए संबंधित प्रांतीय विधानसभा की दो-तिहाई बहुमत से मंजूरी जरूरी है.
यही वजह है कि इस योजना को लागू करने के लिए सरकार के सामने संवैधानिक चुनौती खड़ी हो गई. चर्चा थी कि इसके लिए 28वां संवैधानिक संशोधन लाया जा सकता है. हालांकि, प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विरोध बढ़ने लगा और सरकार के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो गया.
सिंध विधानसभा ने किया विरोध, बिलावल ने भी उठाए सवाल
गृह मंत्री के बयान के बाद सिंध में इस योजना का विरोध शुरू हो गया. 4 सितंबर को सिंध विधानसभा ने प्रस्ताव पास कर साफ कर दिया कि राज्य की भौगोलिक अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने भी कहा कि सिंध को बांटने की किसी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
इसके बाद PPP प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि नए प्रशासनिक क्षेत्र बनाने की चर्चा बंद होनी चाहिए. सिंध के लोगों को अपने भविष्य का फैसला खुद करने का अधिकार है.
बिलावल ने यह भी कहा कि 28वें संवैधानिक संशोधन को लेकर केंद्र सरकार ने उनकी पार्टी से कोई बातचीत नहीं की है. शहबाज शरीफ की सरकार को PPP का समर्थन हासिल है. ऐसे में बिलावल के विरोध ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दीं.
मोहसिन नकवी के बयानों से बढ़ी सरकार की परेशानी
बिलावल के विरोध के बाद भी गृह मंत्री मोहसिन नकवी अपने रुख पर कायम रहे. उन्होंने 6 सितंबर और फिर 3 अक्टूबर को कहा कि देश के सिस्टम में बदलाव किया जाएगा और नए प्रशासनिक क्षेत्र बनाए जाएंगे.
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर पाकिस्तान में राजनीतिक और संवैधानिक बहस तेज हो गई है. जानकारों का मानना है कि प्रांतों को बांटने की कोशिश से देश में तनाव बढ़ सकता है. इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर भी दबाव पड़ेगा और जातीय विवाद गहरा सकते हैं.
कब तक आसिम मुनीर को रोक पाएंगे शहबाज शरीफ?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भूमिका को लेकर है. पाकिस्तान में सेना का राजनीति और सरकार के फैसलों पर लंबे समय से प्रभाव रहा है. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि शहबाज शरीफ सेना प्रमुख आसिम मुनीर के सामने कितनी मजबूती से अपना पक्ष रख पाते हैं.
फिलहाल PPP के विरोध और संवैधानिक अड़चनों के कारण पाकिस्तान के प्रांतों को बांटने की योजना आगे बढ़ती नहीं दिख रही है. लेकिन इस मुद्दे ने सरकार और उसके सहयोगियों के बीच मतभेद जरूर उजागर कर दिए हैं.
अब सवाल यही है कि क्या यह योजना हमेशा के लिए ठंडे बस्ते में चली जाएगी या फिर आने वाले दिनों में इसे दोबारा आगे बढ़ाने की कोशिश होगी? साथ ही, क्या शहबाज शरीफ सेना के दबाव के बीच देश की एकता बनाए रख पाएंगे?
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