'मेरी कोई भूमिका नहीं, टिन्नू ने गलत किया…', राम मंदिर चढ़ावा चोरी पूछताछ में चंपत राय ने क्या-क्या बताया? – AajTak

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच चल रही है. इसी बीच एक बड़ी जानकारी सामने आई है. जिसके मुताबिक मामले में पुलिस ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय से सोमवार को पहली बार 3 घंटे तक पूछताछ की और इसके बाद उनका बयान दर्ज किया. पुलिस ने चंपत राय से प्रशासनिक निर्णयों, चढ़ावा प्रबंधन, कर्मचारियों की जवाबदेही और शिकायतों के निस्तारण से जुड़े कई बिंदुओं पर सवाल पूछे.
टिन्नू ने गलत किया, मेरी कोई भूमिका नहीं थी: चंपत राय
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस से चंपत राय ने कहा कि उनकी चढ़ावा चोरी में कोई भूमिका नहीं है. इसकी जानकारी मिलते ही वह सक्रिय हो गए और संदिग्धों को पकड़ा. साथ ही एफआईआर भी कराई. उन्होंने स्वीकार किया, कोई हेरफेर न हो, इसकी जिम्मेदारी उनकी थी. टिन्नू यादव बहुत पहले से जुड़ा था, उसने गलत किया, इसकी उम्मीद नहीं थी.
सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने पूछा-रिश्तेदार या जानने वालों को काम पर किस तरह रखा गया? चंपत राय ने कहा, जरूरतमंदों को काम दिया. इसमें केवल मैं ही नहीं, ट्रस्ट के अन्य सदस्यों की भी भूमिका रही. अनिल व गोपाल राव का भी जिक्र किया. सूत्रों के मुताबिक कड़ी सुरक्षा के बावजूद चढ़ावे की चोरी से निगरानी तंत्र की नाकामी साबित होने के बाद आरएमओ अर्जुन देव पर कार्रवाई हुई है.
SIT जांच में MOU के पालन पर सवाल
राम मंदिर के दान-पात्रों से प्राप्त राशि की गणना को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बीच विस्तृत कार्यप्रणाली तय की गई थी. इस व्यवस्था में दोनों पक्षों की जिम्मेदारियां अलग-अलग निर्धारित थीं, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे. हालांकि, सूत्रों के अनुसार एसआईटी जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि समझौते (एमओयू) के कई प्रावधानों का नियमित रूप से पालन नहीं हुआ.
सूत्रों के अनुसार फरवरी 2025 में ट्रस्ट और एसबीआई के बीच हुए एमओयू में दान-पात्र खोलने और गिनती कक्ष के संचालन के लिए ट्रस्ट और बैंक के अधिकारियों की संयुक्त उपस्थिति अनिवार्य की गई थी. गणना में लगे कर्मियों के लिए ड्रेस कोड भी तय था, लेकिन इन व्यवस्थाओं का हर स्तर पर प्रभावी अनुपालन नहीं हो सका. समझौते में बैंक अधिकारियों के मासिक रोटेशन का भी प्रावधान था, जबकि कुछ कर्मचारी लंबे समय तक एक ही व्यवस्था में कार्यरत रहे. गिनती कक्ष में आने-जाने वाले कर्मचारियों की नियमित अथवा रैंडम तलाशी, प्रत्येक दान-पात्र की राशि का अलग-अलग रिकॉर्ड तथा क्रमवार गणना जैसी व्यवस्थाएं भी तय थीं.
 
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